पश्चिमीपल्ली में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की हत्या का रहस्य बरकरार, 100 से अधिक लोगों से पूछताछ, मोबाइल कॉल डिटेल और व्हाट्सएप चैट की जांच भी नहीं दे सकी कोई ठोस सुराग

राँची। तीन लोगों की हत्या, गोलियों की तड़तड़ाहट, उजड़ता हुआ एक परिवार और पीछे छूट गए अनगिनत सवाल! अपराधियों ने एक ही परिवार के तीन सदस्यों को मौत के घाट उतार दिया, लेकिन 45 दिन गुजर जाने के बाद भी पुलिस के सामने हत्याकांड की तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। आखिर किसने इस परिवार को निशाना बनाया? हत्या की वजह क्या थी? अपराधियों की संख्या कितनी थी और वारदात को अंजाम देने के बाद वे कहां गायब हो गए? सबसे बड़ा सवाल यह कि 100 से अधिक लोगों से पूछताछ और तमाम तकनीकी जांच के बावजूद पुलिस अब तक हत्यारों तक क्यों नहीं पहुंच सकी?
बेरमो के चंद्रपुरा थाना क्षेत्र स्थित पश्चिमीपल्ली में 17 सितंबर 2026 की देर शाम हुई तिहरे हत्याकांड की जांच अब कई सवालों के घेरे में है। एक ही परिवार के तीन सदस्यों की हत्या ने पूरे इलाके को दहला दिया था। लेकिन वक्त बीतने के साथ लोगों के मन में उठ रहे सवालों की फेहरिस्त भी लंबी होती जा रही है। तीन जिंदगियां छीनने वाले अपराधी अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं और हत्याकांड का रहस्य बरकरार है।
एक ही परिवार के तीन सदस्यों को गोलियों से भूना, आखिर क्या थी दुश्मनी?
17 सितंबर की देर शाम पश्चिमीपल्ली में उस वक्त दहशत फैल गई, जब हथियारबंद अपराधियों ने एक ही परिवार को निशाना बनाते हुए अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस हमले में डीवीसी के सेवानिवृत्त कर्मचारी नरेश सिन्हा, उनकी पत्नी और 30 वर्षीय बेटे रोहित सिन्हा की जान चली गई।
गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल रोहित सिन्हा को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन जिंदगी और मौत के बीच चल रही जंग में आखिरकार वह भी हार गया। कुछ ही देर में हंसता-खेलता परिवार हमेशा के लिए बिखर गया।
इस वारदात ने कई बुनियादी सवाल खड़े किए। क्या अपराधियों की इस परिवार से पुरानी रंजिश थी? क्या हत्या के पीछे कोई आर्थिक विवाद था? क्या किसी खास व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए पूरे परिवार पर हमला किया गया? या फिर इस हत्याकांड के पीछे कोई ऐसी वजह है, जिसका पुलिस अब तक पता नहीं लगा सकी है?
100 से अधिक लोगों से पूछताछ, फिर भी अपराधियों तक क्यों नहीं पहुंची पुलिस?
हत्याकांड के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का दायरा बढ़ाया। संभावित संदिग्धों से लेकर आसपास के लोगों तक से पूछताछ की गई। अब तक 100 से अधिक लोगों से पूछताछ किए जाने की बात सामने आई है।
पुलिस ने केवल पूछताछ तक ही जांच सीमित नहीं रखी। मोबाइल फोन की गतिविधियों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), आपसी बातचीत और व्हाट्सएप चैट की भी जांच की गई। तकनीकी साक्ष्यों के जरिए यह पता लगाने की कोशिश हुई कि घटना से पहले और बाद में किन लोगों की गतिविधियां संदिग्ध थीं।
लेकिन सवाल यह है कि जब इतने बड़े स्तर पर पूछताछ हुई, मोबाइल फोन और डिजिटल बातचीत तक खंगाली गई, तो आखिर ऐसा कौन सा सिरा है जो अब तक पुलिस के हाथ नहीं लग पाया? क्या अपराधियों ने वारदात को अंजाम देने से पहले पूरी तैयारी की थी? क्या उन्होंने अपनी पहचान और गतिविधियों को छिपाने के लिए कोई विशेष सावधानी बरती थी? इन सवालों के जवाब जांच के नतीजों से ही सामने आ सकते हैं।
क्या वारदात के पीछे थी पुरानी रंजिश या कोई गहरी साजिश?
किसी एक परिवार के तीन सदस्यों की हत्या सामान्य आपराधिक वारदात नहीं मानी जा सकती। ऐसे मामलों में हत्या की वजह, संभावित दुश्मनी, पारिवारिक और आर्थिक विवाद तथा पीड़ितों के सामाजिक संपर्क जैसे कई पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होती है।
नरेश सिन्हा डीवीसी के सेवानिवृत्त कर्मचारी थे। ऐसे में यह भी जांच का विषय हो सकता है कि परिवार का किसी के साथ कोई पुराना विवाद तो नहीं था। क्या परिवार को पहले कभी धमकी मिली थी? क्या घटना से पहले किसी संदिग्ध व्यक्ति की आवाजाही देखी गई थी? क्या किसी ने परिवार की गतिविधियों पर नजर रखी थी?
हालांकि, इन संभावनाओं को फिलहाल जांच के सवालों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी भी पहलू को हत्या की वजह मानने के लिए ठोस साक्ष्य जरूरी हैं। पुलिस की ओर से हत्या के पीछे की वास्तविक वजह का खुलासा होना अभी बाकी है।
क्या घटनास्थल और आसपास के साक्ष्य भी नहीं दे सके कोई सुराग?
इस तरह के हत्याकांड में घटनास्थल से मिलने वाले भौतिक साक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। गोलीबारी में इस्तेमाल हथियारों से जुड़े फॉरेंसिक साक्ष्य, बरामद कारतूस, गोली के निशान और घटनास्थल के आसपास मौजूद संभावित गवाह जांच को दिशा दे सकते हैं।
इसके अलावा आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, घटना के समय क्षेत्र में मौजूद संदिग्ध गतिविधियां और संभावित आवाजाही भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती हैं।
अब सवाल यह है कि क्या इन तमाम पहलुओं की जांच से पुलिस को कोई ऐसा सुराग मिला है, जिसे सार्वजनिक नहीं किया गया है? क्या जांच किसी संदिग्ध तक पहुंची है या पुलिस अब भी शुरुआती स्तर पर ही अलग-अलग संभावनाओं को खंगाल रही है? जांच की मौजूदा स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है।
45 दिन बाद भी परिवार को इंसाफ का इंतजार, आखिर कब खुलेगा खूनी राज?
इस हत्याकांड का सबसे दुखद पहलू यह है कि एक परिवार के तीन सदस्य दुनिया से चले गए। पीछे रह गए परिजनों के लिए हर गुजरता दिन इंसाफ की उम्मीद के साथ एक नया सवाल लेकर आ रहा है।
पश्चिमीपल्ली के लोग भी जानना चाहते हैं कि आखिर उस शाम क्या हुआ था? अपराधियों ने इस परिवार को ही क्यों चुना? क्या इस वारदात में एक से अधिक लोग शामिल थे? क्या हत्याकांड की साजिश कहीं और रची गई थी? और सबसे अहम, क्या तीन लोगों की हत्या करने वाले अपराधियों की पहचान पुलिस कर पाएगी?
45 दिन की जांच के बाद भी हत्यारों का सामने नहीं आना पुलिस के लिए गंभीर चुनौती है। हालांकि, यह भी संभव है कि जांच एजेंसियां कुछ अहम तथ्यों को सार्वजनिक करने से बच रही हों, ताकि जांच प्रभावित न हो। लेकिन लंबे समय तक खुलासा नहीं होने से लोगों की बेचैनी बढ़ना स्वाभाविक है।
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या?
पश्चिमीपल्ली ट्रिपल मर्डर में अब केवल पूछताछ और तकनीकी जांच की जानकारी पर्याप्त नहीं होगी। लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस जांच से कोई ठोस नतीजा कब सामने आता है। अपराधियों की पहचान, हत्या की वजह और वारदात की पूरी परिस्थितियों का खुलासा ही इस मामले में उठ रहे सवालों का जवाब दे सकता है।
तीन लोगों की हत्या के बाद 45 दिन गुजर चुके हैं। एक परिवार हमेशा के लिए उजड़ चुका है, लेकिन तीन मौतों का रहस्य अब भी कायम है। सवाल सिर्फ यह नहीं कि हत्यारे कहां हैं, बल्कि यह भी है कि आखिर उस शाम ऐसा क्या हुआ था, जिसने एक पूरे परिवार की जिंदगी छीन ली?
तीन कत्ल हो चुके हैं, 45 दिन गुजर चुके हैं, जांच जारी है… लेकिन पश्चिमीपल्ली आज भी जवाब का इंतजार कर रहा है। आखिर कब बेनकाब होंगे तीन जिंदगियों के कातिल?


