फ्लिपकार्ट, अमेजन, गूगल पे और एयरटेल पेमेंट बैंक के नाम पर लोगों को बनाते थे निशाना, पांच मोबाइल फोन और छह सिम कार्ड बरामद

देवघर। साइबर अपराध के खिलाफ देवघर पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने फर्जी कस्टमर केयर अधिकारी बनकर देशभर के लोगों से ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह के चार शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस ने पांच मोबाइल फोन और छह सिम कार्ड बरामद किए हैं। आरोपियों पर फ्लिपकार्ट, अमेजन, गूगल पे और एयरटेल पेमेंट बैंक जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को अपने जाल में फंसाने का आरोप है।
इस कार्रवाई के बाद साइबर अपराध की दुनिया में सक्रिय इस गिरोह के नेटवर्क को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आने की उम्मीद है। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर उनके अन्य साथियों और ठगी के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
गुप्त सूचना पर पुलिस ने की छापेमारी
जानकारी के अनुसार, देवघर पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर के निर्देश पर जिले में साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत पुलिस को पत्थरड्डा ओपी क्षेत्र में कुछ संदिग्ध लोगों के साइबर ठगी में शामिल होने की गुप्त सूचना मिली थी।
सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए छापेमारी की योजना बनाई। पुलिस उपाधीक्षक के नेतृत्व में गठित टीम ने पत्थरड्डा ओपी क्षेत्र में छापेमारी की। इस दौरान पुलिस ने मौके से चार संदिग्ध साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान राहुल कुमार रावाणी, गौतम कुमार मंडल, बिरेंद्र दास और दीपक कुमार दास के रूप में हुई है।
नामी कंपनियों के कस्टमर केयर अधिकारी बनकर करते थे ठगी
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों पर फर्जी कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर लोगों को ठगने का आरोप है। बताया जाता है कि ये साइबर अपराधी ऑनलाइन खरीदारी और डिजिटल भुगतान से जुड़ी नामी कंपनियों के नाम का सहारा लेकर लोगों को निशाना बनाते थे।
फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के कस्टमर केयर अधिकारी बनकर लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश की जाती थी। वहीं, गूगल पे और एयरटेल पेमेंट बैंक के नाम का इस्तेमाल कर डिजिटल भुगतान से जुड़ी समस्याओं के बहाने लोगों को अपने जाल में फंसाने का आरोप है।
इस तरह के साइबर अपराध में अपराधी अक्सर ग्राहकों की समस्याओं का समाधान करने का झांसा देकर उनसे संपर्क करते हैं और फिर निजी या बैंकिंग जानकारी हासिल कर आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं। हालांकि, गिरफ्तार आरोपियों ने किन-किन तरीकों से ठगी की और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया, इसकी विस्तृत जानकारी पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पांच मोबाइल और छह सिम कार्ड बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से पांच मोबाइल फोन और छह सिम कार्ड जब्त किए हैं। साइबर अपराध में मोबाइल फोन और सिम कार्ड का इस्तेमाल संदिग्ध कॉल करने, लोगों से संपर्क स्थापित करने और ऑनलाइन गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जा सकता है।
पुलिस अब जब्त मोबाइल फोन और सिम कार्ड की जांच कर रही है। इन उपकरणों से आरोपियों के संपर्कों, कॉल डिटेल और कथित साइबर ठगी से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जानकारी जुटाई जा सकती है। साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि गिरोह के तार दूसरे राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों से तो नहीं जुड़े हैं।
पुलिस की पूछताछ में खुल सकते हैं कई राज
चारों आरोपियों की गिरफ्तारी को देवघर पुलिस की साइबर अपराध के खिलाफ चल रही मुहिम में महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। पुलिस का उद्देश्य केवल आरोपियों को गिरफ्तार करना ही नहीं, बल्कि साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क तक पहुंचना भी है।
जांच के दौरान पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि आरोपियों ने अब तक कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया, ठगी की रकम कितनी है और इस गिरोह में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।
देवघर पुलिस की इस कार्रवाई से साइबर अपराधियों में हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस ने स्पष्ट संकेत दिया है कि साइबर अपराध के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और ऐसे अपराधों में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
साइबर ठगी से बचाव की अपील: आम लोगों को सलाह दी जाती है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, बैंकिंग पासवर्ड, यूपीआई पिन या अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें। कस्टमर केयर नंबर हमेशा संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से ही प्राप्त करें। किसी भी संदिग्ध कॉल या ऑनलाइन ठगी की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।


