गढ़वा जिले से मिड-डे मील योजना से जुड़ी एक गंभीर खबर सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कठघरे में ला खड़ा किया है। बरडीहा प्रखंड के दो सरकारी विद्यालयों में हुए औचक निरीक्षण के दौरान बच्चों के भोजन में इस्तेमाल हो रही सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
कैसे हुआ खुलासा
प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) प्रवीन कुमार ने सेमरी स्थित पीएम श्री विद्यालय और आदर गांव के सरकारी विद्यालय की रसोई का अचानक निरीक्षण किया। इस दौरान स्कूल में भोजन पकाने के लिए इस्तेमाल हो रहे सरसों के तेल और मसालों की गुणवत्ता संदिग्ध पाई गई। जांच अधिकारियों का दावा है कि तेल से जला हुआ मोबिल जैसी असामान्य गंध महसूस हुई, जिसने पूरी टीम को सतर्क कर दिया।
संदेह गहराने के बाद बीडीओ ने मौके पर ही तेल और मसालों के नमूने जब्त कर लिए और उन्हें आगे की जांच के लिए खाद्य प्रयोगशाला भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
योजना का मकसद और उठते सवाल
मिड-डे मील योजना केंद्र और राज्य सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और जरूरतमंद बच्चों को स्वच्छ, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। इसके लिए सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है। लेकिन गढ़वा से सामने आई यह घटना इस पूरी व्यवस्था की निगरानी और क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती है।
अगर जांच में यह पुष्टि होती है कि बच्चों को दिया जा रहा भोजन घटिया या मिलावटी सामग्री से तैयार किया जा रहा था, तो इसे प्रशासनिक लापरवाही से कहीं आगे, बच्चों के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ माना जाएगा।
अब लैब रिपोर्ट पर निर्भर आगे की कार्रवाई
फिलहाल जब्त किए गए नमूनों की अंतिम पुष्टि प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट में अगर सामग्री तय मानकों पर खरी नहीं उतरती, तो संबंधित आपूर्तिकर्ताओं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि सरकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन और नियमित निगरानी के बिना, बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े जोखिम को टाला नहीं जा सकता।

