सारंडा-कोल्हान से दलमा तक सुरक्षाबलों की घेराबंदी, 11 आधुनिक हथियार और 1,562 कारतूस के साथ करेंगे आत्मसमर्पण; 15 लाख का इनामी RCM भी शामिल
रांची। झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे निर्णायक अभियान ‘ऑपरेशन क्लीन’ ने माओवादी संगठन की कमर तोड़ दी है। दशकों तक माओवादियों के सबसे सुरक्षित गढ़ माने जाने वाले सारंडा और कोल्हान के घने जंगल अब सुरक्षाबलों के लगातार दबाव में उनके लिए असुरक्षित साबित हो रहे हैं। इसी दबाव का परिणाम है कि प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के 24 हार्डकोर नक्सलियों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।

कोबरा बटालियन, सीआरपीएफ, झारखंड जगुआर के संयुक्त अभियान ने माओवादियों के पारंपरिक सेफ जोन को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। लगातार सर्च ऑपरेशन और घेराबंदी के कारण माओवादी अपनी जान बचाने के लिए दलमा, पटमदा, बोड़ाम, सरायकेला और पश्चिम बंगाल सीमा के जंगलों की ओर भागने लगे, लेकिन सुरक्षाबलों ने इन इलाकों को भी चारों तरफ से सील कर व्यापक अभियान शुरू कर दिया।
रसद खत्म, संपर्क टूटा और टूट गया मनोबल
सूत्रों का कहना है कि लगातार अभियान के कारण माओवादियों का शीर्ष नेतृत्व से संपर्क टूट गया। रसद आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई, जंगलों में खराब मौसम और हर पल मुठभेड़ का खतरा उनके मनोबल को तोड़ता रहा। ऐसे हालात में संगठन के कई बड़े नेताओं और कैडरों के सामने आत्मसमर्पण के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा।
11 आधुनिक हथियार, 38 मैगजीन और 1,562 जिंदा कारतूस के साथ करेंगे सरेंडर। हथियारों में 6 इंसास राइफल, 2 AK-47, 1 HK-33 राइफल, 1 यूएस कार्बाइन और 1 एम-16 राइफल शामिल हैं।
15 लाख का इनामी RCM समेत कई बड़े कमांडर शामिल
आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे बड़ा नाम संतोष उर्फ बसुदेव उर्फ गांधी का है, जो संगठन का रीजनल कमेटी सदस्य (RCM) था और उस पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसके अलावा चंदन लोहरा (10 लाख), अनिल तुरी (5 लाख), सुखलाल बिरजिया (5 लाख), सुदेश होनहागा (2 लाख) और रिषिव (2 लाख)
सूची में एक RCM, तीन जोनल कमेटी सदस्य (ZCM), तीन सब-जोनल कमेटी सदस्य (SZCM), छह एरिया कमेटी सदस्य (ACM) तथा अन्य सक्रिय कैडर शामिल हैं। इनमें से कई पर हत्या, विस्फोट, लेवी वसूली और सुरक्षाबलों पर हमलों जैसे गंभीर मामलों में संलिप्त रहने के आरोप हैं।
लेवी नेटवर्क और हथियार सप्लाई चेन पर बड़ा खुलासा संभव
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इन आत्मसमर्पणों से माओवादी संगठन के लेवी नेटवर्क, हथियारों की सप्लाई चेन, ठिकानों और सहयोगियों से जुड़े कई अहम राज खुल सकते हैं। पूछताछ के आधार पर संगठन के शेष नेटवर्क पर भी बड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
झारखंड के साथ छत्तीसगढ़ के माओवादी भी शामिल
आत्मसमर्पण करने वालों में झारखंड के गिरिडीह, पश्चिमी सिंहभूम, लातेहार, लोहरदगा, बोकारो, रांची, हजारीबाग और सरायकेला-खरसावां के सदस्य शामिल हैं। इसके अलावा सूची में छत्तीसगढ़ के आठ माओवादी भी शामिल हैं, जिनमें जोनल और एरिया कमेटी स्तर के सदस्य बताए गए हैं।
माओवाद मुक्त झारखंड की ओर बड़ा कदम
‘ऑपरेशन क्लीन’ की लगातार सफलता ने माओवादी संगठन को सबसे बड़ा झटका दिया है। कभी अभेद्य माने जाने वाले सारंडा और कोल्हान के जंगल अब सुरक्षाबलों के प्रभावी नियंत्रण में हैं। सामूहिक आत्मसमर्पण झारखंड को माओवाद मुक्त बनाने की दिशा में अब तक की सबसे महत्वपूर्ण है।
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