रांची स्थित झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के केंद्रीय कार्यालय में गुरुवार को प्रेसवार्ता आयोजित की गई। प्रेसवार्ता को मोर्चा की केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य और विधायक लुईस मरांडी तथा विधायक सुदीप गुड़िया ने संबोधित किया। इस दौरान नेताओं ने केंद्र की एनडीए सरकार पर आदिवासी समाज के साथ कथित भेदभाव का आरोप लगाते हुए मध्य प्रदेश के बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत की घटना को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए।
30 आदिवासी बच्चों की मौत का मामला उठाया
लुईस मरांडी ने बालाघाट में 30 आदिवासी बच्चों की मौत की घटना को बेहद गंभीर और चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की मौत के मामले में मध्य प्रदेश सरकार के साथ-साथ केंद्र की भाजपा सरकार को भी जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी समाज से जुड़े मामलों में सरकार की संवेदनशीलता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
लुईस मरांडी ने कहा कि इस घटना की गंभीरता को देखते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए और सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसी स्थिति पैदा होने के पीछे आखिर कौन जिम्मेदार है।
हेमंत सोरेन को बताया आदिवासी समाज का सर्वमान्य नेता
प्रेसवार्ता के दौरान लुईस मरांडी ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन आज आदिवासी समाज के सर्वमान्य नेता हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के अधिकारों और हितों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने की जरूरत है।
सुदीप गुड़िया ने MP सरकार की कार्यशैली पर उठाए सवाल
वहीं विधायक सुदीप गुड़िया ने भी बालाघाट की घटना को मध्य प्रदेश सरकार की नाकामी बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की शिथिलता के कारण इस मामले में न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने कहा कि किसी गंभीर मामले में सरकार को खुद संवेदनशीलता दिखाते हुए समय पर कार्रवाई करनी चाहिए थी। सुदीप गुड़िया ने कहा कि न्यायालय का हस्तक्षेप मध्य प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने घटना की जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की।
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