परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद के 61वें बलिदान दिवस पर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर स्थित धामूपुर में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। अब्दुल हमीद धाम में आयोजित कार्यक्रम में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के साथ वीर अब्दुल हमीद को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम के दौरान वीर अब्दुल हमीद की शौर्यगाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया। रक्षा राज्य मंत्री ने 21 परमवीर जल स्मारक, वीर अब्दुल हमीद संग्रहालय और भारतीय सेना की ओर से लगाई गई सैन्य प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में टैंक और निष्क्रिय सैन्य हथियारों को भी प्रदर्शित किया गया है।
1965 के युद्ध में दिखाई थी अदम्य वीरता
वीर अब्दुल हमीद भारतीय सैन्य इतिहास के उन योद्धाओं में शामिल हैं, जिन्होंने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान असाधारण साहस का परिचय दिया था। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने अपने संबोधन में कहा कि अब्दुल हमीद ने दुश्मन के शक्तिशाली पैटन टैंकों के सामने अदम्य साहस दिखाते हुए देश की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
उनकी बहादुरी और असाधारण सैन्य पराक्रम को देखते हुए उन्हें देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। उनका नाम भारतीय सेना के इतिहास में वीरता और बलिदान की मिसाल के तौर पर दर्ज है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगा संग्रहालय
रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि अब्दुल हमीद धाम में बनाए गए स्मारक और संग्रहालय केवल इतिहास को संजोने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को देश के वीर सैनिकों के त्याग से परिचित कराने का भी काम करेंगे।
उन्होंने कहा कि वीर अब्दुल हमीद का जीवन राष्ट्रभक्ति, साहस, कर्तव्य के प्रति निष्ठा और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान की प्रेरणा देता है। ऐसे स्मारकों के माध्यम से युवाओं को भारतीय सेना के जवानों के संघर्ष और बलिदान की जानकारी मिलेगी और उनमें राष्ट्रसेवा की भावना को मजबूती मिलेगी।
शहीदों के परिजनों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम में देश के वीर शहीदों के परिजनों को भी सम्मानित किया गया। भारतीय सेना की ओर से परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान सैन्य परंपराओं और सम्मान के साथ उनके बलिदान को याद किया गया।
कार्यक्रम में परमवीर चक्र विजेता कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव, भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी, शहीदों के परिवारजन और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
बलिदान की गाथा को संजोने की पहल
अब्दुल हमीद धाम में शुरू किए गए स्मारक, संग्रहालय और सैन्य प्रदर्शनी को वीर सैनिकों की गाथा को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है। यहां आने वाले लोगों को न सिर्फ वीर अब्दुल हमीद के सैन्य जीवन और बलिदान से जुड़ी जानकारी मिलेगी, बल्कि भारतीय सेना के शौर्य और देश की रक्षा में सैनिकों के योगदान को भी करीब से समझने का अवसर मिलेगा।
वीर अब्दुल हमीद का बलिदान दिवस हर साल देशवासियों को यह याद दिलाता है कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवान किस साहस और समर्पण के साथ अपना कर्तव्य निभाते हैं। 1965 के युद्ध में दिखाई गई उनकी वीरता आज भी भारतीय सैन्य इतिहास का गौरवपूर्ण अध्याय है।


