हज़ारीबाग जिले के कटकमसांडी अंचल कार्यालय से गुरुवार को एक ऐसा मामला सामने आया है, जो सरकारी कार्यप्रणाली की गंभीर खामियों को उजागर करता है। देर रात तक कार्यालय में काम जारी रहा, लेकिन न वहाँ कोई सुरक्षा इंतज़ाम था, न कोई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद।
जानकारी के अनुसार, सीआई और राजस्व कर्मचारी — सुरेंद्र, सीमन और जितेंद्र — वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर देर रात तक वंशावली सत्यापन और रिपोर्ट तैयार करने के काम में जुटे रहे। यह सिलसिला सुबह 10 बजे से शुरू होकर रात तक बिना रुके चलता रहा — इस दौरान कर्मचारियों को न भोजन मिला, न पानी।
सूत्रों के मुताबिक, एसआईआर और प्रमाण पत्रों से जुड़ी सैकड़ों फाइलों को एक ही दिन में ऑफलाइन और ऑनलाइन निपटाने का भारी दबाव कर्मचारियों पर बनाया गया। हैरानी की बात यह रही कि अंचल अधिकारी (सीओ) स्वयं बिना किसी पूर्व सूचना के कार्यालय से निकल गए, जिससे कर्मचारी अधिकारी-विहीन स्थिति में देर रात तक काम करने को मजबूर हुए।
कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रात 8-9 बजे तक कुछ जनप्रतिनिधि और बिचौलिए फाइलों के बंडल लेकर कार्यालय पहुंचते रहे — एक ऐसा दृश्य, जो सरकारी दफ्तर की तय प्रक्रिया और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।
सबसे अहम सवाल कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर उठ रहा है। बिना किसी सुरक्षा गार्ड और अधिकारी के रात के अंधेरे में सरकारी कर्मियों से काम लिया जाना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि उनकी जान से जुड़ा गंभीर जोखिम भी है। कर्मचारियों का कहना है कि अगर देर रात कोई अप्रिय घटना घटती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा — यह सवाल फिलहाल अनुत्तरित है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या हज़ारीबाग जिला प्रशासन इस मामले पर संज्ञान लेकर जवाबदेही तय करता है, या कर्मचारियों की सुरक्षा एक बार फिर भरोसे के हवाले छोड़ दी जाएगी।


