रांची, 23 सितंबर 2026: झारखंड के डीजीपी की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में बुधवार को राज्य सरकार ने अपनी नियुक्ति प्रक्रिया पर जवाब दिया। सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत के सामने डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति के पीछे नियमों और सरकार के फैसले का पक्ष रखा। दूसरी ओर, मामले में सुप्रीम कोर्ट की सहायता कर रहे अमिकस क्यूरी की रिपोर्ट में इसी नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए गए हैं। अब गुरुवार को राज्य सरकार इस रिपोर्ट पर अपना विस्तृत जवाब अदालत के सामने रखेगी।

मामले की सुनवाई के दौरान विवाद का केंद्र केवल एक अधिकारी की नियुक्ति नहीं रहा, बल्कि डीजीपी नियुक्ति के लिए राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियम और उन्हें लागू करने की प्रक्रिया भी चर्चा में रही। अमिकस क्यूरी ने तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व दिशा-निर्देशों की कसौटी पर परखा है, जबकि सरकार ने अपने फैसले के पीछे नियमों में किए गए बदलाव को आधार बनाया है।
सरकार ने बताया, क्यों बदला गया था नियम
बाबूलाल मरांडी की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाने के बाद राज्य सरकार की ओर से कपिल सिब्बल ने अदालत में अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि डीजीपी रैंक में प्रोन्नत होने वाली इकलौती महिला अधिकारी तदाशा मिश्रा को अवसर देने के लिए नियम-5 में संशोधन किया गया था।
सरकार का कहना है कि डीजीपी की नियुक्ति के लिए तैयार की गई राज्य की नियमावली सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। सिब्बल ने तदाशा मिश्रा के पुलिस सेवा के दौरान नक्सल और अपराध से जुड़े क्षेत्रों में किए गए काम का भी उल्लेख किया। विदित हो कि तदाशा मिश्रा ने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान नक्सल और अपराध पर लगाम कसने की दिशा में महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। यानी सरकार का पक्ष यह रहा कि नियुक्ति को केवल उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि लागू नियमों और अधिकारी के सेवा रिकॉर्ड को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
डीजीपी तदाशा मिश्रा के कार्यकाल में झारखंड हुआ नक्सलमुक्त
इस पूरे प्रकरण में जो सबसे ज्यादा उल्लेखनीय है वह यह है कि कभी झारखंड के 22 जिले घोर नक्सलप्रभावित माने जाते थे। केन्द्र और राजय की सरकार लगातार इससे निपटने के उपाय करती रही लेकिन पूरी कामयाबी कभी हासिल नहीं हो पायी। राज्य पुलिस और सीआरपीएफ के बीच भी समन्वय की भारी कमी दिखाई देती रही। लेकिन डीजीपी के पद पर योगदान के साथ ही तदाशा मिश्रा ने नक्सलमुक्त झारखंड का बीड़ा इउठा लिया और महज कुछ महीनों में ही केन्द्र सरकार की रिपोर्ट के अनुसार झारखंड पूरी तरह नक्सलमुक्त हो गया। झारखंड का अंतिम नक्सलप्रभावित जिला चाईंबासा को भी नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया है। मिशिर बेसरा और कई ईनामी नक्सलियों ने या तो सरेंडर कर दिया या पुलिस मुठभेड़ में मार गिराए गए।
अमिकस क्यूरी की रिपोर्ट में उठाया गया अलग सवाल
दूसरी तरफ, सुप्रीम कोर्ट की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता और अमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन की रिपोर्ट में तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर आपत्ति दर्ज की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले डीजीपी नियुक्त किया गया, जबकि सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह फैसलों से जुड़े दिशा-निर्देशों के तहत डीजीपी पद के लिए विचार किए जाने वाले अधिकारी के पास कम से कम छह महीने की शेष सेवा का सिद्धांत लागू होता है।
अमिकस क्यूरी ने झारखंड के 2025 के डीजीपी नियुक्ति नियमों के कुछ प्रावधानों पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में डीजीपी को हटाने को लेकर राज्य सरकार को मिले व्यापक विवेकाधिकार और नियुक्ति प्रक्रिया में कुछ सुरक्षा उपायों की जरूरत का भी उल्लेख किया गया है।
नियम में बदलाव बना विवाद का अहम हिस्सा
मामले में एक अहम सवाल यह भी है कि डीजीपी नियुक्ति से जुड़े राज्य के नियमों में बदलाव किस तरह किया गया और उसका तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर क्या प्रभाव पड़ा।
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, नियमों में ऐसा प्रावधान जोड़ा गया था, जिसके तहत 30 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद DGP/AGP रैंक में बिताई गई सेवा अवधि को शेष सेवा की गणना में शामिल किया जा सकता था। इसी बदलाव को नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े विवाद के महत्वपूर्ण हिस्से के तौर पर उठाया गया है।
गुरुवार को सरकार रखेगी विस्तृत जवाब
बुधवार की सुनवाई में कपिल सिब्बल ने कहा कि अमिकस क्यूरी की रिपोर्ट पर राज्य सरकार गुरुवार को अपना विस्तृत पक्ष रखेगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले में डीजीपी नियुक्ति की प्रक्रिया, राज्य के नियमों और सामने रखे गए कानूनी पक्षों पर आगे की दिशा तय कर सकता है।
फिलहाल इस मामले में अगली सुनवाई इसलिए अहम हो गई है क्योंकि गुरुवार को सरकार अमिकस क्यूरी की आपत्तियों का औपचारिक जवाब अदालत के सामने रखेगी। अदालत का अगला रुख यह स्पष्ट करेगा कि झारखंड की डीजीपी नियुक्ति प्रक्रिया और उससे जुड़े नियमों को लेकर किन पहलुओं पर आगे विचार किया जाना है।
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