रांची। सोशल मीडिया आज लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन चुका है, लेकिन क्या यह वास्तविक रिश्तों के बीच दूरियां भी बढ़ा रहा है? इसी महत्वपूर्ण सवाल पर विद्यार्थियों को सोचने और अपने विचार व्यक्त करने का अवसर मिला डीएवी पब्लिक स्कूल, बरियातू, रांची में आयोजित अंतर-सदनीय अंग्रेजी वाद-विवाद प्रतियोगिता में। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आयोजित इस प्रतियोगिता का विषय था, ‘सोशल मीडिया हमें जोड़ता है या अकेला बनाता है?’ विद्यार्थियों ने इस विषय पर अपने तर्क, विचार और विश्लेषण प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता में अनन्या साराफ ने प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि देबप्रिया मैती दूसरे और कुमारी गुंजन तीसरे स्थान पर रहीं।
मानसिक स्वास्थ्य और सोशल मीडिया के संबंध पर चर्चा
विद्यालय में आयोजित इस प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों को सोशल मीडिया के प्रभावों पर गंभीरता से विचार करने और अपनी बात तार्किक ढंग से रखने के लिए प्रेरित करना था। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के संदर्भ में इस विषय ने डिजिटल दुनिया और वास्तविक जीवन के संबंधों पर विचार करने का अवसर दिया।
सोशल मीडिया जहां दूर रहने वाले लोगों से संपर्क बनाए रखने, विचार साझा करने और नई जानकारियां प्राप्त करने में मदद करता है, वहीं इसके अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर भी कई सवाल उठते रहे हैं। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों ने इस विषय के विभिन्न पहलुओं पर विचार करने और अपनी अभिव्यक्ति क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर पाया।
कार्यक्रम में विद्यालय की प्राचार्या डॉ. झूमा महता की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने विद्यार्थियों की प्रतिभा और संवाद कौशल को प्रोत्साहित किया।
चार चरणों में परखी गई विद्यार्थियों की प्रतिभा
प्रतियोगिता को चार चरणों में आयोजित किया गया। इनमें तात्कालिक भाषण (Extempore), प्रतिप्रश्न (Interjection), तर्क-वितर्क (Rebuttal) और ब्लॉक एंड टैकल (Block and Tackle) शामिल थे।
इन चरणों के माध्यम से प्रतिभागियों के वक्तृत्व कौशल, आलोचनात्मक चिंतन, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और विश्लेषणात्मक योग्यता का आकलन किया गया। विद्यार्थियों को विषय के विभिन्न पक्षों पर अपनी बात रखने के साथ विरोधी पक्ष के तर्कों का जवाब देने का अवसर भी मिला।
प्रतियोगिता में प्रतिभागियों के लिए केवल अपने विचार व्यक्त करना ही नहीं, बल्कि दूसरे पक्ष की बात को समझना और उसके आधार पर तार्किक प्रतिक्रिया देना भी महत्वपूर्ण रहा। इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों में प्रभावी संवाद, विचारों की स्पष्टता और आत्मविश्वास विकसित करने में सहायक होती हैं।
अनन्या साराफ प्रथम, देबप्रिया मैती दूसरे स्थान पर
प्रतियोगिता में विद्यार्थियों के प्रदर्शन के आधार पर विजेताओं की घोषणा की गई। परिणाम इस प्रकार रहे:
- प्रथम स्थान: अनन्या साराफ, कक्षा 10-C, विवेकानंद सदन।
- द्वितीय स्थान: देबप्रिया मैती, कक्षा 9-C, विवेकानंद सदन।
- तृतीय स्थान: कुमारी गुंजन, कक्षा 9-B, अरविंदो सदन।
तीनों प्रतिभागियों ने अपने प्रदर्शन से प्रतियोगिता में स्थान हासिल किया। परिणामों के माध्यम से विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता, विषय की समझ और प्रभावी अभिव्यक्ति को प्रोत्साहन मिला।
प्राचार्या ने बताया वाद-विवाद का महत्व
प्रतियोगिता के समापन पर विद्यालय की प्राचार्या डॉ. झूमा महता ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वाद-विवाद प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के संचार कौशल को निखारने, आलोचनात्मक चिंतन विकसित करने और आत्मविश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस प्रकार की गतिविधियां विद्यार्थियों को प्रभावी संवादकर्ता और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए तैयार करती हैं। अपने विचारों को तर्क के साथ प्रस्तुत करना और दूसरों के दृष्टिकोण को समझना व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में पहल
डीएवी पब्लिक स्कूल, बरियातू में आयोजित यह प्रतियोगिता विद्यार्थियों की तार्किक सोच, अभिव्यक्ति क्षमता और आत्मविश्वास को बढ़ावा देने की दिशा में एक सार्थक पहल रही। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया जैसे समकालीन विषय को चर्चा का केंद्र बनाकर विद्यार्थियों को डिजिटल जीवन और सामाजिक संबंधों पर विचार करने का अवसर मिला।
इस आयोजन ने यह भी रेखांकित किया कि विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों के साथ वाद-विवाद जैसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के बौद्धिक और व्यक्तिगत विकास में अहम भूमिका निभाती हैं।
