Friday, October 23

रांची। झारखंड में संपत्ति का ब्योरा ऑनलाइन दर्ज नहीं कर पाने के कारण करीब 300 पुलिस पदाधिकारियों की प्रोन्नति पर संकट खड़ा हो गया है। वहीं, राज्य सेवा के 700 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी भी इसी समस्या से प्रभावित बताए जा रहे हैं। मामला ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (HRMS) यानी मानव संपदा पोर्टल से जुड़ा है, जिसके बंद रहने के कारण संबंधित पदाधिकारी अपनी संपत्ति का लंबित विवरण जमा नहीं कर पा रहे हैं। इससे उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट तैयार होने और प्रोन्नति की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है।

इस मुद्दे को लेकर राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कार्मिक विभाग के सचिव प्रवीण टोप्पो के रवैये पर नाराजगी जताई है। उन्होंने 14 अक्टूबर 2026 को मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मामले की समीक्षा करने और पोर्टल दोबारा खोलने की संभावना पर निर्णय लेने का आग्रह किया है।

संपत्ति का विवरण नहीं देने से क्यों अटकी प्रोन्नति?

मामला उन पुलिस पदाधिकारियों से जुड़ा है, जो निर्धारित अवधि में HRMS पोर्टल पर अपनी संपत्ति का विवरण दर्ज नहीं कर सके। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इनमें ऐसे अधिकारी भी शामिल हैं, जो जनवरी-फरवरी में निर्धारित अवधि के दौरान माओवादी विरोधी अभियान और अन्य आवश्यक ड्यूटी में तैनात थे।

संपत्ति का विवरण लंबित रहने के कारण उनकी सेवा संबंधी प्रक्रियाओं में बाधा आने की आशंका है। विशेष रूप से वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (ACR/APAR) और प्रोन्नति की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रभावित पुलिस पदाधिकारियों में सहायक अवर निरीक्षक (ASI) से लेकर पुलिस निरीक्षक स्तर तक के अधिकारी शामिल हैं।

यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो प्रस्तावित प्रोन्नति बोर्ड की बैठक में संबंधित अधिकारियों के मामलों पर विचार नहीं हो पाने की आशंका है। इससे उनकी वरीयता और करियर की प्रगति पर भी असर पड़ सकता है।

वित्त मंत्री ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए कार्मिक सचिव से चर्चा की थी। उनका कहना है कि यदि कोई सरकारी पदाधिकारी अपनी संपत्ति का विवरण जमा करना चाहता है, तो उसे यह अवसर देने में क्या वैधानिक कठिनाई है, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।

मंत्री के अनुसार, उन्होंने कार्मिक सचिव से कहा था कि यदि पोर्टल खोलने में कोई कानूनी या प्रशासनिक बाधा है, तो इसकी जानकारी लिखित रूप में दी जाए। इसके बाद उन्होंने मुख्य सचिव से पूरे मामले की समीक्षा करने और यह देखने का आग्रह किया कि पोर्टल दोबारा खोलने से प्रशासनिक स्तर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा या नहीं।

मंत्री ने अपने पत्र में प्रशासनिक व्यवस्था को संवेदनशीलता के साथ चलाने पर जोर देते हुए कहा कि “शासन-प्रशासन संवेदनशीलता से चलता है, हठधर्मिता से नहीं।”

पोर्टल खोलने पर कार्मिक विभाग की क्या दलील?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कार्मिक सचिव प्रवीण टोप्पो का तर्क है कि पोर्टल निर्धारित अवधि के बाहर खोलने से ऐसी व्यवस्था बन सकती है, जिसमें कर्मचारी और अधिकारी सालभर पोर्टल खोलने की मांग करेंगे। इसी आधार पर पोर्टल दोबारा खोलने को लेकर असहमति सामने आई है।

हालांकि, इस मामले में कार्मिक सचिव का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों में सामने नहीं आया है। इसलिए पोर्टल खोलने से संबंधित अंतिम प्रशासनिक निर्णय और उसके पीछे की वैधानिक स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है।

700 से अधिक राज्य सेवा के अधिकारी-कर्मचारी भी प्रभावित

यह मामला केवल पुलिस विभाग तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, झारखंड राज्य सेवा के 700 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी भी संपत्ति विवरण जमा करने से जुड़ी समस्या का सामना कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि HRMS पोर्टल को दोबारा खोलने का मुद्दा कई विभागों के कर्मचारियों की सेवा संबंधी प्रक्रियाओं से जुड़ा हुआ है।

अब मुख्य सचिव के स्तर पर इस मामले की समीक्षा और सरकार के अगले कदम पर नजर रहेगी। यदि प्रभावित अधिकारियों को लंबित संपत्ति विवरण जमा करने का अवसर मिलता है, तो उनकी प्रोन्नति और अन्य सेवा लाभों से जुड़ी बाधाओं के समाधान का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल, संबंधित अधिकारियों को राहत देने के लिए किसी अंतिम आदेश की पुष्टि नहीं हुई है।

 

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