धनबाद: सदर अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए बुधवार को रोगी कल्याण समिति की गवर्निंग बॉडी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में साफ-सफाई, दवाओं की उपलब्धता, ओपीडी, ऑपरेशन थिएटर, मरीजों की सुरक्षा और एम्बुलेंस सेवा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि अब हर तीन महीने पर रोगी कल्याण समिति की बैठक होगी, जिसमें पुराने फैसलों की समीक्षा कर सुधार कार्यों की प्रगति का जायजा लिया जाएगा।
बैठक के बाद धनबाद के मेयर संजीव सिंह, जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह और प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. संजीव कुमार प्रसाद ने मीडिया से बातचीत की। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने अस्पताल की मौजूदा व्यवस्था और मरीजों को होने वाली परेशानियों पर अपनी बात रखी।
सुरक्षा गार्ड की कमी पर चिंता, महिला मरीजों की सुरक्षा का मुद्दा उठा
मेयर संजीव सिंह ने सदर अस्पताल में सुरक्षा गार्ड की कमी को गंभीर समस्या बताया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होने से मरीजों, खासकर महिला मरीजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।
उन्होंने अस्पताल परिसर में पार्किंग और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत भी बताई। इसके लिए उपायुक्त और ट्रैफिक डीएसपी से बातचीत कर होमगार्ड की तैनाती की मांग करने की बात कही। बैठक में अस्पताल की विभिन्न व्यवस्थाओं की समीक्षा के साथ पिछली बैठक में लिए गए फैसलों पर भी चर्चा हुई।
चार-पांच महीने से मानदेय नहीं मिलने का आरोप, प्रदर्शन कर रहे 108 कर्मियों का मुद्दा उठा
बैठक के दौरान सदर अस्पताल के बाहर प्रदर्शन कर रहे 108 एम्बुलेंस कर्मियों की समस्याओं पर भी चर्चा हुई। कर्मियों का आरोप है कि उन्हें पिछले चार से पांच महीने से मानदेय नहीं मिला है। उन्होंने एम्बुलेंस की खराब स्थिति को लेकर भी चिंता जताई है।
मेयर संजीव सिंह ने एम्बुलेंस कर्मियों की मांगों को जायज बताते हुए राज्य सरकार से मामले में जल्द संज्ञान लेने की मांग की।
वहीं, प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. संजीव कुमार प्रसाद ने बताया कि 108 एम्बुलेंस सेवा एनजीओ के माध्यम से संचालित होती है और इसका राज्य सरकार के साथ एमओयू है। ऐसे में जिला स्तर पर हस्तक्षेप की सीमाएं हैं। हालांकि, उन्होंने एम्बुलेंस सेवा में कमियां होने की बात स्वीकार की।
37 में से सिर्फ 10 एम्बुलेंस से जिले में सेवा देना चुनौती
प्रभारी सिविल सर्जन के मुताबिक, धनबाद जिले को कुल 37 एम्बुलेंस आवंटित की गई थीं। इनमें से 27 एम्बुलेंस डेढ़ लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी हैं और आठ साल पुरानी हैं। ऐसे में केवल 10 एम्बुलेंस के सहारे पूरे जिले में सेवा उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों, इसके लिए सीएसआर और रेडक्रॉस की एम्बुलेंस के साथ ममता वाहन की मदद से विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।
135 बेड का सदर अस्पताल, 420 बेड के मेडिकल कॉलेज में विकसित करने की प्रक्रिया
डॉ. संजीव कुमार प्रसाद ने बताया कि सदर अस्पताल फिलहाल 135 बेड का है। इसे पीपीपी मॉडल पर 420 बेड के मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया चल रही है।
उन्होंने कहा कि रोगी कल्याण समिति की बैठक का मुख्य उद्देश्य अस्पताल की सुविधाओं में सुधार करना और मरीजों को सम्मानपूर्वक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। बैठक में समय पर चिकित्सकीय सेवा, दवाएं, साफ-सफाई, गुणवत्तापूर्ण भोजन, पेयजल और एम्बुलेंस की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
हर तीन महीने में होगी समीक्षा, फैसलों पर अमल की होगी निगरानी
मेयर संजीव सिंह ने बताया कि रोगी कल्याण समिति की पिछली बैठक वर्ष 2025 में हुई थी। उस समय नगर निगम चुनाव नहीं होने के कारण जिला परिषद अध्यक्ष इसकी मॉनिटरिंग कर रही थीं। इस बार मेयर और जिला परिषद अध्यक्ष दोनों बैठक में शामिल हुए।
अब हर तीन महीने पर बैठक आयोजित करने का फैसला लिया गया है, ताकि अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार और लिए गए निर्णयों के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा हो सके।
कुल मिलाकर, बैठक में मरीजों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और एम्बुलेंस सेवा की चुनौतियों को प्रमुखता से उठाया गया। अब इन फैसलों का वास्तविक असर अस्पताल की व्यवस्था और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में कितना दिखता है, यह आगामी बैठकों की समीक्षा से स्पष्ट होगा।
