महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती आज, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी श्रद्धांजलि
नई दिल्ली: 2 अक्टूबर भारत के इतिहास में बेहद खास महत्व रखता है। यह दिन देश की दो महान विभूतियों— महात्मा गांधी और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री—की जयंती के रूप में मनाया जाता है। दोनों नेताओं ने अपने विचारों, सिद्धांतों और कर्मठता से देश के इतिहास और लोकतांत्रिक व्यवस्था को गहराई से प्रभावित किया। देशभर में आज दोनों महापुरुषों को श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है।
महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। सत्य, अहिंसा और सादगी को अपने जीवन का आधार बनाने वाले गांधी ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। उन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ कई आंदोलनों का नेतृत्व किया और आम लोगों को स्वतंत्रता संघर्ष से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गांधी के विचारों को मिला वैश्विक सम्मान
महात्मा गांधी का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। उनके अहिंसा और शांतिपूर्ण संघर्ष के विचारों को दुनिया भर में सम्मान मिला। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2007 में 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में घोषित किया। इस दिन दुनिया भर में अहिंसा, शांति और सह-अस्तित्व के गांधीवादी विचारों को याद किया जाता है।
गांधी का मानना था कि सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलते हुए बड़े से बड़ा बदलाव भी लाया जा सकता है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उनके नेतृत्व में असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे महत्वपूर्ण आंदोलनों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ जनआंदोलन को व्यापक बनाया।
प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों महापुरुषों को किया नमन
2 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने अपने संदेशों में दोनों नेताओं के योगदान और उनके विचारों को याद किया।
गांधी के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने उनके सत्य, अहिंसा और स्वच्छता जैसे विचारों का उल्लेख करते हुए देश के निर्माण में उनके योगदान को याद किया। वहीं लाल बहादुर शास्त्री को सादगी, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और दृढ़ संकल्प का प्रतीक बताया गया।
सादगी और दृढ़ संकल्प की मिसाल थे लाल बहादुर शास्त्री
लाल बहादुर शास्त्री का जन्म भी 2 अक्टूबर को हुआ था। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने वाले शास्त्री ने अपने जीवन में सादगी और ईमानदारी को हमेशा प्राथमिकता दी।
महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित शास्त्री ने स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया और कई बार जेल भी गए। आजादी के बाद उन्होंने सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं और अपनी कार्यशैली से अलग पहचान बनाई।
‘जय जवान, जय किसान’ का नारा आज भी यादगार
लाल बहादुर शास्त्री 1964 में देश के दूसरे प्रधानमंत्री बने। उनका प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल लगभग 18 महीने का रहा, लेकिन इस दौरान देश को कई महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ा। खाद्यान्न संकट और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौर में उन्होंने देश का नेतृत्व किया।
उन्होंने सैनिकों और किसानों के योगदान को रेखांकित करते हुए ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा दिया। यह नारा आज भी देश की सुरक्षा और कृषि व्यवस्था में सैनिकों और किसानों की भूमिका के सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
1965 के युद्ध में देश को दिया नेतृत्व
शास्त्री के कार्यकाल में 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ। इस चुनौतीपूर्ण दौर में उन्होंने देश का नेतृत्व किया और भारतीय सशस्त्र बलों का मनोबल बढ़ाया। युद्ध के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जनवरी 1966 में ताशकंद समझौता हुआ। इसके अगले दिन 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री का निधन हो गया।
2 अक्टूबर इसलिए भी विशेष है क्योंकि एक ही दिन देश गांधी के सत्य और अहिंसा के संदेश को याद करता है, तो दूसरी ओर शास्त्री की सादगी, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा को नमन करता है।
