250 करोड़ की साइबर ठगी का खेल! फर्जी आधार से म्यूल अकाउंट, कानपुर में 4 गिरफ्तार; झारखंड में 15 हजार खाते जांच के घेरे में
कानपुर में IIT गेट से पकड़े गए चार आरोपी, एक खाते में तीन दिन में 8 करोड़ का लेनदेन; झारखंड में भी देशभर की ठगी से जुड़े म्यूल खातों का नेटवर्क सामने आया
देश में बढ़ते साइबर अपराध के बीच म्यूल बैंक अकाउंट का नेटवर्क पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। झारखंड में 2025 में म्यूल बैंक खातों से साइबर ठगी के मामले के खुलासे के बाद ताजा मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर से सामने आया है, जहां साइबर क्राइम सेल, रावतपुर और कल्याणपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने करीब 250 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करने का दावा किया है। पुलिस ने गुरुवार को आईआईटी गेट से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी कूटरचित आधार कार्ड तैयार कर उनके आधार पर म्यूल बैंक खाते खुलवाते थे और इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लेनदेन के लिए किया जाता था।

मामले की जांच के दौरान एनसीआरपी पोर्टल पर एक ऐसा बैंक खाता सामने आया, जिसमें सिर्फ तीन दिन में करीब 8 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ था। पुलिस के अनुसार, इस खाते से जुड़े मामलों को लेकर अलग-अलग राज्यों में 115 शिकायतें दर्ज थीं। इसके बाद पुलिस ने खाते से जुड़े लोगों और पूरे नेटवर्क की कड़ियों की जांच शुरू की।
फर्जी आधार से खुलते थे म्यूल खाते, ठगी की रकम होती थी ट्रांसफर
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी कूटरचित आधार कार्ड तैयार कर बैंक खाते खुलवाते थे। इन खातों को साइबर अपराध की भाषा में म्यूल अकाउंट कहा जाता है। ऐसे खातों का इस्तेमाल ठगी से हासिल रकम को पहले प्राप्त करने और फिर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है।
कानपुर पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने कूटरचित आधार कार्ड तैयार करने, म्यूल खाते खुलवाने और इन खातों के जरिए ऑनलाइन ठगी की रकम का लेनदेन करने की जानकारी दी है। गिरफ्तार आरोपियों में औरैया निवासी विपिन और शिवप्रताप, औरैया के बिधूना निवासी राजशेखर उर्फ अजीत और कानपुर देहात के रनियां निवासी हिमांशु गौतम शामिल हैं। पुलिस ने राजशेखर को नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड बताया है।
झारखंड में भी हजारों म्यूल खातों का नेटवर्क सामने आ चुका है
कानपुर की कार्रवाई के बीच झारखंड का मामला भी इस पूरे नेटवर्क की गंभीरता को सामने रखता है। झारखंड में साइबर अपराध थाना पुलिस ने 2025 में करीब 15 हजार संदिग्ध म्यूल बैंक खातों की पहचान किए जाने की बात सामने आई थी। यह कार्रवाई 10 लाख रुपये या उससे अधिक के लेनदेन वाले लेयर-1 खातों की जांच से आगे बढ़ी थी।
जानकारी के अनुसार, साइबर अपराध थाना की तत्कालीन थानेदार नेहा बाला के बयान पर 29 जुलाई 2025 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शुरुआत में 40 ऐसे खातों को जांच के दायरे में लिया गया था, जिनमें 10 लाख रुपये या उससे अधिक का लेनदेन सामने आया था। इन्हीं खातों की जांच के दौरान करीब 15 हजार म्यूल बैंक खातों की पहचान किए जाने की बात सामने आई।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि इन खातों का इस्तेमाल मुख्य रूप से निवेश के नाम पर होने वाली साइबर ठगी की रकम को छिपाने और आगे ट्रांसफर करने में किया जा रहा था। जांच के दौरान नेटवर्क के कई राज्यों तक फैले होने की जानकारी भी सामने आई थी।
झारखंड के कई जिलों के लोगों के खातों में पहुंची करोड़ों की ठगी की रकम
इन राज्यों के लोगों से निवेश के नाम पर ठगी की गई, उनसे इन बैंक खातों में राशि जमा कराई गई, जिसके मामले में प्राथमिकी दर्ज हुई हैं।
इनके विरुद्ध विभिन्न राज्यों में दर्ज हैं मामले
रौशन कुमार : ये झारखंड के रांची का रहने वाला है। इसका म्यूल बैंक खाता आइडीएफसी बैंक में खाता नंबर 10212450309 है। इस खाते में धोखाधड़ी के 10.2 करोड़ रुपये जमा हुए थे। इस खाते के विरुद्ध कर्नाटक, तमिलनाडू, उत्तर प्रदेश व आंध्र प्रदेश में मामले दर्ज हैं।
राजेंद्र कुमार साव : ये झारखंड के कोडरमा का रहने वाला है। इसका म्यूल बैंक खाता आइसीआइसीआइ बैंक में खाता नंबर 100605500583 है। इस खाते में धोखाधड़ी के 67 लाख रुपये जमा हुए थे। इस खाते के विरुद्ध दिल्ली में मामले दर्ज हैं।
प्राण रंजन सिन्हा : यह झारखंड के पलामू का रहने वाला है। इसका म्यूल बैंक खाता बंधन बैंक में खाता नंबर 20100048056523 है। इस खाते में धोखाधड़ी के 1.6 करोड़ रुपये जमा हुए थे। इस खाते के विरुद्ध आंध्र प्रदेश, दिल्ली व राजस्थान में मामले दर्ज हैं।
जितेंद्र कुमार पप्पू : यह झारखंड के जामताड़ा का रहने वाला है। इसका म्यूल बैंक खाता इंडसइंड बैंक में खाता नंबर 100275805970 है। इस खाते में धोखाधड़ी के 5.1 करोड़ रुपये जमा हुए थे। इस खाते के विरुद्ध केरल, मध्य प्रदेश, तमिलनाडू, उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ के मामले दर्ज हैं।
नुरेज अंसारी : यह झारखंड के लोहरदगा का रहने वाला है। इसका म्यूल बैंक खाता जम्मू एंड कश्मीर बैंक में खाता नंबर 520010100001057 है। इस खाते में धोखाधड़ी के 5.5 करोड़ रुपये जमा हुए थे। इस खाते के विरुद्ध दिल्ली, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडू, राजस्थान, छत्तीसगढ़ व पश्चिम बंगाल में मामले दर्ज हैं।
सतीश कुमार : यह झारखंड के रांची का रहने वाला है। इसका म्यूल बैंक खाता इंडसइंड बैंक में खाता नंबर 251986100300 है। इस खाते में धोखाधड़ी के 6.2 करोड़ रुपये जमा हुए थे। इस खाते के विरुद्ध आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक व महाराष्ट्र में मामले दर्ज हैं।
गणेश चिक बड़ाईक : यह झारखंड के सिमडेगा का रहने वाला है। इसका म्यूल बैंक खाता बंधन बैंक में खाता नंबर 20200081019805 है। इस खाते में धोखाधड़ी के 3.2 करोड़ रुपये जमा हुए थे। इस खाते के विरुद्ध कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र व पश्चिम बंगाल में मामले दर्ज हैं।
सात आरोपियों की गिरफ्तारी, मोबाइल से चेकबुक तक बरामद
झारखंड पुलिस की कार्रवाई में इस नेटवर्क से जुड़े सात साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी की बात सामने आई थी। आरोपियों के पास से आठ मोबाइल फोन, 12 सिम कार्ड, नौ एटीएम कार्ड, चार पासबुक, नौ चेकबुक, एक उद्यम पंजीयन और मामले से संबंधित व्हाट्सऐप चैट बरामद किए गए थे।
जांच में यह भी सामने आया था कि इन म्यूल खातों के माध्यम से निवेश के नाम पर लोगों से रकम ट्रांसफर कराई जा रही थी। पुलिस के मुताबिक, ऐसे नेटवर्क की कड़ियां अलग-अलग राज्यों में फैली हुई थीं।
आखिर म्यूल अकाउंट होता क्या है?
म्यूल अकाउंट ऐसा बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति या साइबर अपराधी के कहने पर ठगी अथवा अवैध रकम को प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए किया जाता है। कई मामलों में अपराधी कमीशन या कुछ पैसों का लालच देकर लोगों से उनका बैंक खाता, एटीएम, चेकबुक, पासबुक या नेट बैंकिंग की जानकारी हासिल कर लेते हैं।
इसके बाद ठगी की रकम एक खाते से दूसरे खाते में भेजी जाती है। इस प्रक्रिया से रकम को कई स्तरों पर घुमाया जाता है, जिससे जांच एजेंसियों के लिए वास्तविक साइबर अपराधी तक पहुंचना मुश्किल हो सके।
पुलिस की अपील- खाते और दस्तावेज किसी को न दें
झारखंड में हुई जांच के दौरान पुलिस ने आम लोगों को चेतावनी दी थी कि वे अधिक लाभ या आसान कमाई का लालच देने वाले प्रस्तावों से सावधान रहें। किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता संचालित करने के लिए देना, एटीएम कार्ड, चेकबुक या बैंकिंग जानकारी साझा करना बाद में कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है।
साइबर ठगी होने पर पीड़ित 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
कानपुर पुलिस टीम को 25 हजार का इनाम
कानपुर में 250 करोड़ रुपये के कथित साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा करने वाली टीम की कार्रवाई की अधिकारियों ने सराहना की है। डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क की अन्य कड़ियों और लेनदेन की जांच कर रही है।
कानपुर की कार्रवाई और झारखंड में सामने आए हजारों संदिग्ध म्यूल खातों के मामलों से यह स्पष्ट होता है कि साइबर ठगी में बैंक खातों का इस्तेमाल केवल रकम निकालने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कई स्तरों पर रकम को ट्रांसफर करने के लिए ऐसे खातों का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। ऐसे में अपने बैंक खाते, एटीएम, चेकबुक, सिम और बैंकिंग दस्तावेज किसी अनजान व्यक्ति को उपलब्ध कराना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
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