Tuesday, September 22

पितरों को समर्पित पितृ पक्ष को लेकर इस बार 26 या 27 सितंबर की तारीख को लेकर लोगों में असमंजस है। पंचांग के अनुसार, 26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा के साथ पितृ पक्ष की शुरुआत होगी। इसी दिन पूर्णिमा श्राद्ध किया जाएगा, जबकि 27 सितंबर से प्रतिपदा श्राद्ध शुरू होगा। पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा।

26 सितंबर से शुरू होगा पितृ पक्ष

धर्मशास्त्र के अनुसार पितृ पक्ष की शुरुआत भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि से होती है। मिथिला और महावीर पंचांग के मुताबिक इस साल भाद्रपद पूर्णिमा 26 सितंबर, शनिवार को है। इसलिए इसी दिन पूर्णिमा श्राद्ध किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध होगा।

पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। इस अवधि में आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक श्राद्ध की तिथियां आती हैं।

26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक श्राद्ध की तिथियां

पितृ पक्ष में श्राद्ध की प्रमुख तिथियां इस प्रकार हैं—

  • 26 सितंबर— पूर्णिमा श्राद्ध
  • 27 सितंबर— प्रतिपदा श्राद्ध
  • 28 सितंबर— द्वितीया श्राद्ध
  • 29 सितंबर— तृतीया श्राद्ध, महाभरणी
  • 30 सितंबर— चतुर्थी श्राद्ध
  • 1 अक्टूबर— पंचमी श्राद्ध
  • 2 अक्टूबर— षष्ठी श्राद्ध
  • 3 अक्टूबर— सप्तमी और अष्टमी श्राद्ध
  • 4 अक्टूबर— नवमी श्राद्ध
  • 5 अक्टूबर— दशमी श्राद्ध
  • 6 अक्टूबर— एकादशी श्राद्ध
  • 7 अक्टूबर— द्वादशी श्राद्ध
  • 8 अक्टूबर— त्रयोदशी श्राद्ध
  • 9 अक्टूबर— चतुर्दशी श्राद्ध
  • 10 अक्टूबर— सर्वपितृ अमावस्या

तर्पण के लिए इस समय को माना गया है शुभ

पितृ पक्ष में तर्पण और श्राद्ध के लिए कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल को शुभ माना गया है। दी गई पंचांग गणना के अनुसार, कुतुप से अपराह्न मुहूर्त लगभग सुबह 11 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक माना जाता है। हालांकि, स्थानीय समय के अनुसार मुहूर्त में कुछ अंतर हो सकता है।

26 सितंबर को कुतुप मुहूर्त सुबह 11:30 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक और रौहिण मुहूर्त दोपहर 12:18 बजे से 1:06 बजे तक बताया गया है।

अंग्रेजी तारीख नहीं, तिथि का है महत्व

श्राद्ध कर्म में अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख के बजाय हिंदी तिथि को महत्व दिया जाता है। इसलिए पूर्वज की जिस तिथि को मृत्यु हुई हो, पितृ पक्ष में उसी तिथि पर श्राद्ध किया जाता है। यदि मृत्यु की तिथि याद न हो, तो सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध करने की परंपरा बताई गई है।

पितृ पक्ष के बाद शुरू होगा शारदीय नवरात्र

पितृ पक्ष की समाप्ति के अगले दिन यानी 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र शुरू होगा। इस दिन कलश स्थापना के साथ नवरात्र की शुरुआत होगी। वहीं, नवरात्र का समापन 20 अक्टूबर को बताया गया है।

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