देशभर में 1,000 सरकारी परीक्षा केंद्रों की सिफारिश, ₹300 करोड़ खर्च करने की खबर; संसद की समिति ने NEET को कंप्यूटर आधारित करने पर भी दिया जोर
रांची। NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और दूसरी राष्ट्रीय परीक्षाओं की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों के बीच परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की व्यवस्था में सुधार के लिए संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति ने 9 अक्टूबर 2026 को अपनी रिपोर्ट पेश की है। समिति ने सरकारी संस्थानों में सुरक्षित कंप्यूटर आधारित परीक्षा केंद्र विकसित करने और इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की सिफारिश की है।
इसी बीच मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि वर्ष 2027 से सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में परीक्षा केंद्र विकसित किए जाएंगे। पहले चरण में देशभर में 1,000 मानक केंद्र बनाने और इस पर 300 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने की योजना बताई गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, बिहार में 32 केंद्र बनाने और झारखंड के 16 जिलों में परीक्षा केंद्र विकसित करने की तैयारी है। हालांकि, इन आंकड़ों और जिलावार सूची की अंतिम आधिकारिक पुष्टि अभी जरूरी है।
क्या है संसद की समिति की नई सिफारिश?
संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी स्थायी समिति ने NTA की परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कई सुझाव दिए हैं। समिति के अनुसार, सरकारी स्वामित्व वाले कंप्यूटर आधारित परीक्षा केंद्रों का नेटवर्क तैयार करना जरूरी है, ताकि निजी परीक्षा केंद्रों पर निर्भरता कम की जा सके।
रिपोर्ट में 1,000 सुरक्षित सरकारी कंप्यूटर आधारित परीक्षा केंद्र विकसित करने की सिफारिश को चरणबद्ध समयसीमा के साथ लागू करने पर जोर दिया गया है। इसके लिए स्कूलों और कॉलेजों में उपलब्ध जगह का इस्तेमाल करते हुए कंप्यूटर लैब विकसित करने तथा आवश्यक उपकरणों पर NTA की ओर से निवेश करने का सुझाव भी दिया गया है।
समिति ने यह भी सिफारिश की है कि विद्यार्थियों को परीक्षा केंद्र के लिए दूसरे शहरों में जाने की परेशानी कम करने के उद्देश्य से हर जिले में कम से कम एक परीक्षा केंद्र उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाए।
ध्यान देने वाली बात: समिति की सिफारिश और सरकार की ओर से किसी योजना को मंजूरी मिलना दो अलग-अलग बातें हैं। रिपोर्ट में बजट और केंद्रों की उपलब्धता को लेकर ठोस कार्ययोजना तैयार करने की जरूरत भी बताई गई है।
झारखंड में कितने जिलों में बनेंगे परीक्षा केंद्र?
मीडिया रिपोर्टों में झारखंड के 16 जिलों में परीक्षा केंद्र विकसित करने की तैयारी का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इसी रिपोर्ट के शीर्षक में 15 जिलों का जिक्र होने से संख्या को लेकर असमंजस है। इसलिए 16 जिलों की संख्या को फिलहाल आधिकारिक रूप से अंतिम नहीं माना जा सकता।
रिपोर्ट में जिन आठ जिलों में फिलहाल केंद्र स्थापित करने पर विचार नहीं किए जाने की बात कही गई है, वे हैं:
- रामगढ़
- जामताड़ा
- लोहरदगा
- पाकुड़
- गोड्डा
- खूंटी
- कोडरमा
- सरायकेला
इन जिलों में केंद्र नहीं बनाने का उल्लेख फिलहाल की योजना के संदर्भ में है। इसे स्थायी निर्णय नहीं समझना चाहिए। संबंधित सरकारी संस्थानों में कंप्यूटर, इंटरनेट, बिजली और अन्य जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता के आकलन के बाद स्थिति बदल सकती है।
झारखंड के बाकी जिलों में किन संस्थानों को केंद्र बनाया जाएगा, इसकी पूरी और प्रमाणित सूची सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि विद्यार्थियों को अपने जिले में परीक्षा देने की कितनी सुविधा मिलेगी।
बिहार में 32 परीक्षा केंद्र बनाने की तैयारी?
मीडिया रिपोर्टों में बिहार में 32 टेस्ट सेंटर विकसित करने का दावा किया गया है। रिपोर्ट में शेखपुरा, शिवहर, अरवल, मुंगेर, खगड़िया और मधेपुरा में फिलहाल केंद्र स्थापित करने पर विचार नहीं किए जाने का उल्लेख है।
हालांकि, बिहार के जिलों के नामों को लेकर प्रकाशित खबरों में अंतर है। ऐसे में 32 केंद्रों और जिलावार सूची को अंतिम सरकारी निर्णय के रूप में प्रकाशित करने से पहले NTA की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
300 करोड़ रुपये कहां खर्च होंगे?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, देशभर में 1,000 मानक परीक्षा केंद्र विकसित करने के लिए 300 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने की योजना है। प्रस्तावित व्यवस्था में सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में पहले से उपलब्ध बुनियादी ढांचे का उपयोग करने पर जोर रहेगा।
संभावित खर्च में कंप्यूटर और अन्य उपकरण, तकनीकी सुविधाएं, इंटरनेट कनेक्टिविटी तथा परीक्षा संचालन के लिए जरूरी व्यवस्था शामिल हो सकती है। लेकिन उपलब्ध आधिकारिक संसदीय रिपोर्ट में बजट की ठोस कार्ययोजना को अंतिम रूप देने की जरूरत बताई गई है। इसलिए ₹300 करोड़ से अधिक की राशि को अभी स्वीकृत और जारी बजट बताना उचित नहीं होगा।
NEET परीक्षा में भी हो सकता है बड़ा बदलाव
संसदीय समिति ने NEET-UG को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में बदलने की सिफारिश की है। अभी NEET-UG पारंपरिक ऑफलाइन प्रारूप में आयोजित होती रही है, जबकि JEE-Main, UGC-NET और CUET जैसी कई परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित तरीके से होती हैं।
कंप्यूटर आधारित परीक्षा में प्रश्नपत्रों की छपाई और उन्हें विभिन्न केंद्रों तक पहुंचाने की जरूरत कम हो सकती है। इससे सुरक्षा संबंधी कुछ जोखिम घट सकते हैं। हालांकि, इसके लिए पर्याप्त कंप्यूटर केंद्र, मजबूत डिजिटल सुरक्षा, पारदर्शी मूल्यांकन और दूरदराज के विद्यार्थियों की पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी होगा।
समिति ने यह भी कहा है कि NEET को कंप्यूटर आधारित करने से पहले विद्यार्थियों, अभिभावकों और संबंधित संस्थाओं से विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। इसलिए परीक्षा का प्रारूप कब और किस तरीके से बदलेगा, यह आधिकारिक निर्णय पर निर्भर करेगा।
अभ्यर्थियों के लिए क्या है इसका मतलब?
यदि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होती है, तो सरकारी संस्थानों में परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ने से विद्यार्थियों को केंद्र आवंटन में सुविधा मिल सकती है। कंप्यूटर लैब और तकनीकी संसाधनों में सुधार से परीक्षा संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने में भी मदद मिल सकती है।
लेकिन अभी अभ्यर्थियों को यह मानकर तैयारी नहीं करनी चाहिए कि 2027 से सभी परीक्षाएं केवल सरकारी केंद्रों पर ही होंगी या हर जिले में केंद्र निश्चित रूप से उपलब्ध होगा। परीक्षा के प्रारूप, केंद्रों और आवेदन प्रक्रिया से जुड़ी अंतिम जानकारी के लिए NTA की आधिकारिक अधिसूचना देखना जरूरी होगा।


