रांची: झारखंड की राजधानी रांची में आगामी 10 से 12 दिसंबर तक नेशनल फॉरेस्ट्री कांग्रेस का आयोजन किया जाएगा। डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेस्ट, एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट चेंज की ओर से आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में वन, वन्यजीव, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। कार्यक्रम का उद्देश्य वन विज्ञान और पर्यावरण के क्षेत्र में काम कर रहे शोधकर्ताओं, स्कॉलर्स, विशेषज्ञों और विभिन्न संस्थानों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना है।
17 अक्टूबर से शुरू होगा रजिस्ट्रेशन, पूरी तरह निःशुल्क होगी भागीदारी
नेशनल फॉरेस्ट्री कांग्रेस को लेकर शुक्रवार, 16 अक्टूबर को रांची के डोरंडा स्थित वन भवन में संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया गया। इसे संबोधित करते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने कार्यक्रम से जुड़ी तैयारियों और रजिस्ट्रेशन की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि नेशनल फॉरेस्ट्री कांग्रेस में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 17 अक्टूबर से शुरू होगी, जो 20 नवंबर तक चलेगी। इस कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है। इसके माध्यम से वन एवं पर्यावरण के क्षेत्र में रुचि रखने वाले लोगों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों को इसमें भाग लेने का अवसर मिलेगा।
12 महत्वपूर्ण विषयों पर विचार रखेंगे विशेषज्ञ
तीन दिनों तक चलने वाली इस कांग्रेस में वन और पर्यावरण से जुड़े 12 विषयों पर विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे। इनमें वाइल्डलाइफ, फॉरेस्ट लाइवलीहुड, क्लाइमेट चेंज और हाइड्रोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
इन विषयों पर होने वाली चर्चा के दौरान वन्यजीव संरक्षण, वनों पर निर्भर आजीविका, बदलती जलवायु के प्रभाव और जल विज्ञान से जुड़े पहलुओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। कार्यक्रम में सामने आने वाले विचारों और जानकारियों का डॉक्यूमेंटेशन भी किया जाएगा, ताकि इनका उपयोग भविष्य में शोध और वन प्रबंधन से संबंधित कार्यों में किया जा सके।
वन और पर्यावरण में हो रहे बदलावों पर होगा मंथन
प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में वन और पर्यावरण से जुड़े बदलावों को समझना बेहद जरूरी है। जलवायु परिवर्तन, वन संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन जैसे मुद्दों पर विशेषज्ञों के बीच संवाद के माध्यम से नई जानकारियों और विचारों को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि नेशनल फॉरेस्ट्री कांग्रेस के आयोजन के पीछे मुख्य उद्देश्य वन विज्ञान और पर्यावरण के क्षेत्र में काम कर रहे अलग-अलग शोधकर्ताओं, स्कॉलर्स और संस्थाओं को एक मंच पर लाना है। इससे विशेषज्ञों को अपने शोध, अनुभव और विचार साझा करने का अवसर मिलेगा।
शोध और ज्ञान के आदान-प्रदान को मिलेगा बढ़ावा
नेशनल फॉरेस्ट्री कांग्रेस को वन एवं पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के बीच संवाद और ज्ञान के आदान-प्रदान के एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है। तीन दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में विभिन्न विषयों पर होने वाली चर्चाओं और उनके दस्तावेजीकरण से वन विज्ञान से जुड़े शोध एवं अध्ययन को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
रांची में इस आयोजन के जरिए झारखंड को वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का केंद्र बनाने की दिशा में भी पहल की जा रही है। कार्यक्रम में भाग लेने के इच्छुक लोगों को 17 अक्टूबर से 20 नवंबर के बीच अपना निःशुल्क रजिस्ट्रेशन कराना होगा।


