पेट्रोल पर निर्यात शुल्क ₹0.50 से बढ़ाकर ₹2.50 प्रति लीटर, डीजल पर ₹16 से घटाकर ₹8.50 हुआ; घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर तत्काल कोई बदलाव नहीं
केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक, नई दरें 16 अक्टूबर 2026 से लागू हो गई हैं। सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क बढ़ाया है, जबकि डीजल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में कटौती की है। विमान ईंधन यानी एटीएफ (ATF) पर शुल्क पहले की तरह बरकरार रखा गया है।
इस फैसले के तहत पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क ₹0.50 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹2.50 प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, डीजल के निर्यात पर लगने वाला कुल शुल्क ₹16 प्रति लीटर से घटाकर ₹8.50 प्रति लीटर कर दिया गया है। एटीएफ के निर्यात पर ₹10.50 प्रति लीटर का शुल्क जारी रहेगा।
नई और पुरानी दरों में कितना अंतर?
| पेट्रोलियम उत्पाद | पुरानी दर | नई दर |
|---|---|---|
| पेट्रोल निर्यात | ₹0.50/लीटर | ₹2.50/लीटर |
| डीजल निर्यात | ₹16/लीटर | ₹8.50/लीटर |
| एटीएफ (विमान ईंधन) निर्यात | ₹10.50/लीटर | ₹10.50/लीटर |
ये दरें 16 अक्टूबर से शुरू होने वाली अगली पखवाड़े की अवधि के लिए लागू की गई हैं।
क्या पेट्रोल पंप पर महंगा मिलेगा पेट्रोल?
इस फैसले का सीधा असर घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल खरीदने वाले ग्राहकों पर नहीं पड़ा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में घरेलू खपत के लिए बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर लागू मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
इसलिए केवल निर्यात शुल्क में बदलाव के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि पेट्रोल पंप पर पेट्रोल महंगा या डीजल सस्ता हो गया है। घरेलू खुदरा कीमतों में बदलाव के लिए अलग निर्णय की जरूरत होगी।
सरकार क्यों बदलती है विंडफॉल टैक्स की दरें?
विंडफॉल टैक्स का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौरान पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को नियंत्रित करना और देश में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने में मदद करना है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ती हैं, तब निर्यात से अधिक कमाई की संभावना बन सकती है। ऐसी स्थिति में सरकार निर्यात शुल्क के जरिए घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश करती है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता के बीच सरकार इस शुल्क की दरों की समय-समय पर समीक्षा कर रही है। नई दरों में पेट्रोल पर शुल्क बढ़ाने और डीजल पर घटाने का फैसला इसी समीक्षा के तहत लिया गया है।
हर पखवाड़े होती है समीक्षा
पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर लगने वाले शुल्क की दरों की लगभग हर 15 दिन में समीक्षा की जाती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों और ईंधन की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए सरकार इनमें बदलाव कर सकती है।
फिलहाल, 16 अक्टूबर 2026 से लागू नई दरों में पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क बढ़ा है, डीजल के निर्यात पर शुल्क घटा है और विमान ईंधन पर शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आम उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस अधिसूचना से घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई सीधा बदलाव नहीं हुआ है।


