राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने किया भव्य पूजा पंडाल का उद्घाटन, तिरुपति बालाजी की दिव्यता और महाभारत के प्रसंगों ने मोहा श्रद्धालुओं का मन
राजधानी राँची के पिंजरा पोल, गौशाला स्थित कल्पना लोक दुर्गा पूजा समिति का दुर्गोत्सव इस वर्ष धार्मिक आस्था, भारतीय सांस्कृतिक विरासत और कलात्मक भव्यता के विशिष्ट समन्वय के रूप में सामने आया है। झारखंड के माननीय राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार ने भव्य पूजा पंडाल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर पूरा परिसर भक्तिभाव और उत्सवी उल्लास से सराबोर नजर आया।
वर्ष 1969 से निरंतर दुर्गा पूजा का आयोजन करती आ रही समिति की यह परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सहभागिता, सामूहिक सहयोग और सांस्कृतिक निरंतरता की एक सशक्त मिसाल भी है। बदलते समय के साथ आयोजन के स्वरूप में नवीनता आई है, लेकिन माँ दुर्गा के प्रति श्रद्धा और समाज को एक सूत्र में जोड़ने की मूल भावना आज भी इसकी सबसे बड़ी पहचान बनी हुई है।
इस वर्ष के पूजा पंडाल की विशेषता इसकी विषयवस्तु और कलात्मक प्रस्तुति है।
तिरुपति बालाजी की भव्य मंदिर स्थापत्य शैली से प्रेरित पंडाल श्रद्धालुओं को दक्षिण भारतीय मंदिर परंपरा की दिव्यता का अनुभव कराता है। वहीं, महाभारत के विभिन्न प्रसंगों का चित्रण भारतीय पौराणिक चेतना, धर्म, कर्तव्य और जीवन मूल्यों की गहरी अनुभूति प्रदान करता है। धार्मिक आस्था को कला और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति से जोड़ने का यह प्रयास आयोजन को विशिष्ट पहचान देता है।
पंडाल की सज्जा और उसकी विषयगत संरचना के माध्यम से श्रद्धालुओं को भारतीय सभ्यता की समृद्ध परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया गया है। महाभारत के प्रसंग जहाँ जीवन में धर्म, विवेक और कर्तव्य के महत्व को रेखांकित करते हैं, वहीं तिरुपति बालाजी की आध्यात्मिक परंपरा श्रद्धा और समर्पण की भावना को सुदृढ़ करती है। इस दृष्टि से यह आयोजन मनोरम दृश्य प्रस्तुत करने के साथ-साथ सांस्कृतिक संवाद का माध्यम भी बनता है।
राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न उद्घाटन समारोह ने आयोजन की महत्ता को और बढ़ाया। दुर्गोत्सव जैसे सार्वजनिक धार्मिक आयोजन हमारी सामुदायिक चेतना को मजबूत करते हैं। ऐसे अवसर विभिन्न वर्गों के लोगों को एक साथ लाते हैं और सामाजिक सौहार्द, परस्पर सहयोग तथा सांस्कृतिक गौरव की भावना को प्रोत्साहित करते हैं।
कल्पना लोक दुर्गा पूजा समिति की 1969 से चली आ रही यात्रा इस बात का प्रमाण है कि किसी परंपरा की वास्तविक शक्ति केवल उसकी भव्यता में नहीं, बल्कि उससे जुड़े लोगों की आस्था, निरंतरता और सामूहिक प्रतिबद्धता में निहित होती है। दशकों से चले आ रहे इस आयोजन ने स्थानीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक जीवन में अपनी अलग पहचान बनाई है।
कल्पना लोक दुर्गोत्सव की विशेषता यही है कि यहाँ परंपरा अतीत की स्मृति बनकर नहीं रहती, बल्कि वर्तमान की जीवंत अनुभूति और भविष्य की सांस्कृतिक विरासत के रूप में आगे बढ़ती है। माँ दुर्गा की आराधना के साथ भारतीय कला, अध्यात्म और सामाजिक एकता का यह संगम राजधानी राँची के दुर्गोत्सव की समृद्ध परंपरा को नई गरिमा प्रदान करता है।
इस भव्य दुर्गोत्सव के आयोजन में समिति के मुख्य संरक्षक सह सामाजिक कार्यकर्ता सीए दीपक बंका, अध्यक्ष श्री शैलेंद्र यादव, सचिव श्री पवन मुरारका, संयोजक श्री विनय काबरा, संरक्षक श्री आलोक सिंह, श्री रोहित सिंह, श्री मिनी सिंह, एकांश कुमार, भोलनाथ ओझा, साकेत भदानी, गौरव शर्मा, दिवा शंकर ओझा, समीर सागर और श्री नवनीत सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समिति के पदाधिकारियों एवं संरक्षकों के सामूहिक प्रयास, समर्पण और सहयोग से वर्ष 1969 से चली आ रही दुर्गा पूजा की गौरवशाली परंपरा निरंतर आगे बढ़ रही है।


