सोशल मीडिया पर दिखने वाली सस्ती डील के लालच में आपकी जेब खाली हो सकती है। फेसबुक पर 299 रुपये की ड्रेस खरीदने की कोशिश मुंबई की एक नर्स को करीब 1 लाख रुपये की पड़ गई। वहीं, इंस्टाग्राम पर एक विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद ग्वालियर के एक परिवार के खाते से 98 हजार रुपये निकल गए। इन घटनाओं के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत आने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने ऑनलाइन खरीदारों को फर्जी विज्ञापनों से सावधान रहने की सलाह दी है।
299 रुपये की ड्रेस के नाम पर पांच दिन तक ठगी
मुंबई के एक निजी अस्पताल में काम करने वाली नर्स ने अप्रैल में फेसबुक पर 299 रुपये की ड्रेस का विज्ञापन देखा। ड्रेस खरीदने की कोशिश के दौरान शुरुआत में भुगतान किया गया, लेकिन इसके बाद उससे शिपिंग, GPS, ट्रैकिंग, वेरिफिकेशन कोड और एड्रेस कन्फर्मेशन जैसे अलग-अलग बहानों से पैसे मांगे जाने लगे।
उसे भरोसा दिलाया गया कि अतिरिक्त रकम का अधिकांश हिस्सा वापस कर दिया जाएगा और ड्रेस भी पहुंचा दी जाएगी। इसी भरोसे में नर्स ने 16 से 20 अप्रैल के बीच कई बार भुगतान किया। जब तक उसे ठगी का एहसास हुआ, तब तक करीब 1 लाख रुपये का नुकसान हो चुका था।
Instagram पर विज्ञापन क्लिक करते ही फोन हुआ हैंग
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 11 अगस्त को सामने आई एक अन्य घटना में रचना बाथम इंस्टाग्राम इस्तेमाल कर रही थीं। एक विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद उनका मोबाइल फोन हैंग हो गया और काम करना बंद कर दिया। परिवार फोन को ठीक कराने के लिए पास की रिपेयरिंग शॉप पर ले गया।
रिपोर्ट के अनुसार, उसी रात रचना के पति को बैंक से नोटिफिकेशन मिला, जिसके बाद खाते से तेजी से पैसे निकलने का पता चला। बैंक से पूछताछ में तीन अनधिकृत UPI लेनदेन के जरिए करीब 98 हजार रुपये निकाले जाने की जानकारी मिली।
फर्जी विज्ञापनों के जरिए कैसे बिछाया जाता है जाल?
I4C के अनुसार, साइबर अपराधी नामी ब्रांड के लोगो, असली उत्पादों की तस्वीरों और भारी छूट का इस्तेमाल करके ऐसे विज्ञापन तैयार करते हैं, जो देखने में विश्वसनीय लगते हैं। इन पर क्लिक करने पर यूजर्स को ऐसी वेबसाइटों पर भेजा जा सकता है, जो असली शॉपिंग पोर्टल जैसी दिखती हैं, लेकिन उनका संचालन ठग करते हैं।
इस तरह के जाल का मकसद एडवांस पेमेंट लेना, बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल करना या शिपिंग और वेरिफिकेशन जैसे बहानों से बार-बार पैसे वसूलना हो सकता है। कुछ मामलों में संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से मोबाइल या डिजिटल सुरक्षा को भी खतरा हो सकता है।
ऑनलाइन शॉपिंग करते समय इन बातों का रखें ध्यान
I4C ने सलाह दी है कि सोशल मीडिया विज्ञापनों या अनजान मैसेज में दिए गए लिंक पर सीधे भरोसा न करें। किसी ऑफर की पुष्टि संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित ऐप पर जाकर करें। अनजान वेबसाइट पर एडवांस भुगतान करने और तुरंत पैसे भेजने का दबाव बनाने वाले विक्रेताओं से सावधान रहें।
अगर साइबर ठगी का संदेह हो, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। साथ ही बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को सूचना दें और लेनदेन के रिकॉर्ड, स्क्रीनशॉट, वेबसाइट लिंक व संदेश सुरक्षित रखें।
साइबर ठगी के मामले बढ़ने की चिंता
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर वित्तीय साइबर अपराध की शिकायतें 2024 में 19.19 लाख से बढ़कर 2025 में 24.03 लाख हो गईं। हालांकि, इन शिकायतों की संख्या और वास्तविक मामलों की संख्या अलग हो सकती है। आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय साइबर धोखाधड़ी से नुकसान 2024 में 22,848 करोड़ रुपये और 2025 में 22,495 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ मोहन श्याम ने भी सलाह दी है कि किसी आकर्षक ऑफर पर भुगतान करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से जांच करें। आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित ऐप से खरीदारी करना और संदिग्ध लिंक से बचना आपकी रकम और निजी जानकारी, दोनों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।


