रांची: राजधानी रांची के नामकुम थाना क्षेत्र के जोरार स्थित आवास में अरगोड़ा अंचल के राजस्वकर्मी लक्ष्मीकांत मुंडा की हत्या के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। जमीन के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) में बाधा उत्पन्न होने से नाराज आरोपियों ने साजिश रचकर उनकी हत्या कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान प्रदीप गोसाई (38 वर्ष) , अमित टोप्पो उर्फ अमित गोसाई (34 वर्ष) और सिन्टु कुमार गोसाई (31 वर्ष) शामिल है। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं। वहीं, मामले में फरार बताए जा रहे भोला गोसाई, अमित सिंह और शैलेश समेत अन्य अज्ञात अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों के आपराधिक इतिहास का भी पता लगाया जा रहा है।

रांची के वरीय पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से 30 अक्टूबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 24 अक्टूबर को लक्ष्मीकांत मुंडा (38) की उनके जोरार स्थित आवास पर अज्ञात अपराधियों ने हत्या कर दी थी। मामले में नामकुम थाना कांड संख्या 301/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।
जमीन विवाद में हत्या की रची गई साजिश
घटना की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने ग्रामीण एसपी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया था। पुलिस के अनुसार, हत्या की मुख्य वजह अरगोड़ा अंचल के बड़ा घाघरा मौजा की 96 डिसमिल जमीन का विवाद था। गोसाई परिवार ने खाता संख्या-29 की इस जमीन को अलग-अलग डीड के माध्यम से बेचने और उसका दाखिल-खारिज कराने के लिए अरगोड़ा अंचल में आवेदन दिए थे।
इन आवेदनों की स्थल जांच और दस्तावेजों के सत्यापन की जिम्मेदारी राजस्वकर्मी लक्ष्मीकांत मुंडा के पास थी। जांच के दौरान जमीन के मूल दस्तावेजों और वंशावली में अंतर पाया गया था। इसके बाद लक्ष्मीकांत मुंडा ने कई म्यूटेशन मामलों में प्रतिकूल रिपोर्ट देते हुए दाखिल-खारिज रद्द करने की अनुशंसा की थी। इसी आधार पर अंचलाधिकारी ने कई नामांतरण वादों को अस्वीकृत कर दिया था, जबकि कुछ मामले लंबित थे।
खरीदारों का दबाव, फिर हत्या की साजिश
पुलिस के मुताबिक, दाखिल-खारिज नहीं होने के कारण आरोपी आसानी से जमीन की बिक्री और नामांतरण नहीं करा पा रहे थे। वहीं, जमीन के खरीदार आरोपियों पर नामांतरण और दखल-कब्जा दिलाने का लगातार दबाव बना रहे थे। इससे आरोपी लक्ष्मीकांत मुंडा से नाराज और गुस्सा थे।
पुलिस की जांच में सामने आया कि इसी नाराजगी में आरोपियों ने हत्या की साजिश रची। गिरफ्तार आरोपियों के बयान के अनुसार, 23 अक्टूबर की रात करीब 10:30 से 11 बजे के बीच लक्ष्मीकांत मुंडा की हत्या की गई थी।
इस पूरे मामले के खुलासे में ग्रामीण एसपी के नेतृत्व में गठित SIT और नामकुम, डोरंडा, टाटीसिलवे, खरसीदाग समेत अन्य थानों की पुलिस टीम शामिल रही।


