रांची: झारखंड के सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों के लिए अच्छी खबर है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 27 अक्टूबर को हुई कैबिनेट बैठक में फैसला हुआ कि राज्य के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में हेल्थ एंड वेलबीइंग यूनिट बनाई जाएगी। यहां छात्रों को बुनियादी इलाज, इमरजेंसी में तुरंत मदद और मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग की सुविधा मिलेगी।

छात्रों को क्या-क्या मिलेगा?
- रिपोर्ट्स के मुताबिक, उच्च एवंतकनीकी शिक्षा विभाग की इस नई व्यवस्था में ये सुविधाएं शामिल हैं:
- हेल्थ सेंटर: फुल-टाइम डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट और काउंसलर की व्यवस्था।
- हॉस्टल वाले संस्थानों में: सिक रूम, 24 घंटे स्टाफ नर्स और एंबुलेंस सेवा।
- मेंटल हेल्थ वर्कशॉप: हर सेमेस्टर में योग, ध्यान, कला, संगीत और नृत्य पर दो वर्कशॉप, और साल में तीन मानसिक स्वास्थ्य वर्कशॉप।
- ऑनलाइन काउंसलिंग: वीडियो और ऑडियो कंसल्टेशन की सुविधा।
- गोपनीयता: छात्रों की सेहत और काउंसलिंग से जुड़ी जानकारी गोपनीय रखना अनिवार्य होगा।
इसकी निगरानी के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर कुलपति की अध्यक्षता में हेल्थ एंड वेलनेस काउंसिल और कॉलेज स्तर पर प्रिंसिपल की अध्यक्षता में कमेटी बनेगी।
बजट का 2 फीसदी सेहत पर :
इस व्यवस्था को चलाने के लिए विश्वविद्यालयों को अपने सालाना बजट का 2 फीसदी स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करना होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकारी विश्वविद्यालयों के बजट से करीब 51.29 करोड़ रुपये सेहत और मानसिक स्वास्थ्य पर खर्च होंगे।
क्या है डिजिटल हेल्थ आईडी?
हर छात्र की एक डिजिटल हेल्थ आईडी बनेगी, जिसमें उसका पूरा मेडिकल रिकॉर्ड ऑनलाइन सुरक्षित रहेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक छात्रों का रजिस्ट्रेशन e-Samarth पोर्टल के हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम पर होगा। इसका सबसे बड़ा फायदा इमरजेंसी में होगा, जब डॉक्टर छात्र की पुरानी बीमारियों, एलर्जी और दवाओं की जानकारी तुरंत देख सकेंगे।
क्यों जरूरी था यह कदम?
पढ़ाई, परीक्षा, करियर और घर से दूररहने का दबाव कई छात्रों को अंदर ही अंदर तोड़ देता है। अक्सर छात्र किसी से बात नहीं कर पाते, क्योंकि कॉलेज में कोई काउंसलर नहीं होता और बाहर मदद लेना महंगा या शर्मिंदगी भरा लगता है। कैंपस में ही गोपनीय काउंसलिंग मिलने से छात्र समय रहते मदद ले सकेंगे।
कॉलेजों में हेल्थ सेंटर से कैसे बदलेगी छात्रों की जिंदगी?
Jharkhand College Health Centre की यह पहल छात्रों के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। कॉलेज और विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान कई छात्र स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करते हैं। हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के लिए छोटी-मोटी बीमारी या अचानक तबीयत खराब होने पर अस्पताल पहुंचना भी मुश्किल हो सकता है।
कैंपस में हेल्थ सेंटर होने से छात्रों को शुरुआती चिकित्सा सहायता आसानी से मिल सकेगी। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर आगे के इलाज के लिए उचित सलाह दे सकेंगे। हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के लिए सिक रूम, नर्स और एंबुलेंस की व्यवस्था इमरजेंसी के समय विशेष रूप से उपयोगी होगी।
मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह कदम अहम है। परीक्षा का दबाव, करियर की चिंता, पारिवारिक समस्याएं और अकेलापन छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। कॉलेज में गोपनीय काउंसलिंग उपलब्ध होने से छात्र बिना किसी झिझक के विशेषज्ञों से अपनी परेशानी साझा कर सकेंगे।
हालांकि, इस योजना का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब सभी संस्थानों में पर्याप्त डॉक्टर, नर्स और प्रशिक्षित काउंसलर उपलब्ध होंगे और छात्रों को इन सुविधाओं की जानकारी भी दी जाएगी।
तनाव के इन संकेतों को नजरअंदाज न करें :
- लगातार उदासी, चिड़चिड़ापन या किसी काम में मन न लगना
- नींद और भूख में बड़ा बदलाव
- दोस्तों और परिवार से कटना
- पढ़ाई में अचानक गिरावट या क्लास छोड़ना
- खुद को बेकार या निराश महसूस करना
अगर आप या आपका कोई दोस्त ऐसा महसूस कर रहा है, तो किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें। मदद मांगना कमजोरी नहीं है।
मदद कहां मिलेगी:
जब तक कॉलेजों में ये सेंटर शुरू नहीं होते, छात्र केंद्र सरकार की टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 या 1800-891-4416 पर कॉल कर सकते हैं। यह सेवा मुफ्त, गोपनीय और 24 घंटे उपलब्ध है, और हिंदी समेत 20 भाषाओं में प्रशिक्षित विशेषज्ञ बात करते हैं।
अब आगे क्या?
कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन ये यूनिट कब तक शुरू होंगी, इसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है। डॉक्टरों, नर्सों और काउंसलरों की नियुक्ति इस योजना की सफलता की सबसे बड़ी कसौटी होगी। अगर यह सही तरीके से लागू हुआ, तो झारखंड के कॉलेज छात्रों की सेहत का ख्याल रखने वाले कैंपस बन सकेंगे।


