सामाजिक कार्यकर्ता ज्योति शर्मा ने भारत सरकार के कानून एवं न्याय मंत्रालय को एक विस्तृत प्रतिनिधित्व (Representation) भेजकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और भारत के मुख्य न्यायाधीश जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पदों के विरुद्ध सार्वजनिक मंचों पर अश्लील, अभद्र और अपमानजनक भाषा के प्रयोग को रोकने के लिए कानूनी ढांचे की समीक्षा और आवश्यकता पड़ने पर नए कानून पर विचार करने का अनुरोध किया है।

अपने पत्र में ज्योति शर्मा ने कहा कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद हैं तथा इन पदों की गरिमा बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता के विश्वास के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने उल्लेख किया कि संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है, जबकि अनुच्छेद 19(2) सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता, नैतिकता और मानहानि जैसे आधारों पर उचित प्रतिबंधों की अनुमति भी देता है।
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि सरकार की आलोचना, राजनीतिक असहमति, न्यायिक समीक्षा, व्यंग्य, पत्रकारिता और जनहित की बहस लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा हैं और इन पर किसी प्रकार का अनावश्यक प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए। हालांकि, जानबूझकर अश्लील, अभद्र और अत्यंत अपमानजनक भाषा का प्रयोग लोकतांत्रिक विमर्श को कमजोर करता है और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को प्रभावित कर सकता है।
ज्योति शर्मा ने सरकार से आग्रह किया है कि संवैधानिक विशेषज्ञों, विधि विद्वानों, मीडिया प्रतिनिधियों और अन्य संबंधित पक्षों से परामर्श कर यह विचार किया जाए कि क्या वर्तमान कानूनी व्यवस्था पर्याप्त है या इस संबंध में नए या सुदृढ़ कानूनी प्रावधानों की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि ऐसा कानून बनाया जाता है तो उसमें केवल जानबूझकर और बार-बार किए गए गंभीर उल्लंघनों पर ही न्यायालय द्वारा कानून के अनुसार उचित कार्रवाई का प्रावधान हो।
पत्र में यह भी कहा गया है कि किसी भी संभावित कानून में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पूरा संरक्षण सुनिश्चित किया जाए, ताकि वैध आलोचना, राजनीतिक असहमति, न्यायिक समीक्षा, व्यंग्य, पत्रकारिता और जनहित से जुड़े विचारों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
यह पत्र कानून एवं न्याय मंत्री, राष्ट्रपति सचिवालय तथा संबंधित संवैधानिक कार्यालयों को ई-मेल के माध्यम से भेजा गया है। फिलहाल इस पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



