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रांची। धुर्वा स्थित विवेकानंद विद्या मंदिर सेक्टर-2 की छात्रा सिद्धि सिंह के एडमिशन को लेकर पिछले कई महीनों से चला आ रहा विवाद अब समाप्त हो गया है। फीस और एडमिशन को लेकर बने गतिरोध के बीच अब स्कूल प्रबंधन और छात्रा के अभिभावकों के बीच बातचीत हुई, जिसके बाद सिद्धि सिंह का 11वीं कक्षा में एडमिशन हो गया है।
इस पूरे मामले में एक बात अहम रही कि जिला प्रशासन ने शुरुआत में ही मामले को संज्ञान में लिया था। वहीं, जब मामला लंबे समय तक नहीं सुलझा तो झारखंड डिजिटल ने भी इसे प्रमुखता से उठाया और पूरे मामले को प्रशासन और स्कूल प्रबंधन के सामने रखा। इसके बाद मामले में दोबारा पहल हुई और आखिरकार छात्रा के एडमिशन का रास्ता साफ हो गया।
शुरुआत से ही प्रशासन की नजर में था मामला
सिद्धि सिंह के एडमिशन का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने पहले भी इस पर संज्ञान लिया था। 17 जून को जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय की ओर से स्कूल प्रबंधन को पत्र जारी किया गया था।
पत्र के जरिए स्कूल प्रबंधन से मामले का समाधान निकालने और छात्रा का एडमिशन सुनिश्चित करने को कहा गया था। साथ ही यह स्पष्ट किया गया था कि फीस को लेकर स्कूल और अभिभावक आपस में बातचीत कर समाधान निकालें, लेकिन इसका असर किसी भी स्थिति में छात्रा की पढ़ाई पर नहीं पड़ना चाहिए।
इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने छात्रा के पिता कमलेश सिंह को 17 जून को ही स्कूल बुलाकर एडमिशन कराने के लिए आमंत्रित किया था। हालांकि, उस समय अभिभावक स्कूल नहीं पहुंचे और मामला पूरी तरह सुलझ नहीं पाया।
स्कूल ने एडमिशन से इनकार की बात नकारी थी
मामले के दौरान स्कूल प्रबंधन ने छात्रा का एडमिशन लेने से इनकार करने की बात से साफ इनकार किया था। स्कूल का कहना था कि सिद्धि ने 9वीं और 10वीं की पढ़ाई इसी विद्यालय से की है और इन दोनों कक्षाओं की कुछ फीस बकाया है।
स्कूल रिकॉर्ड के मुताबिक, 9वीं की करीब 29,100 रुपये और 10वीं की करीब 30,900 रुपये फीस बकाया थी। वहीं, 2026-27 के सत्र में 11वीं कॉमर्स में एडमिशन के लिए 29,980 रुपये एडमिशन फीस निर्धारित होने की बात सामने आई थी।
फीस जमा करने के तरीके को लेकर भी स्थिति अटकी हुई थी। अभिभावक डेबिट कार्ड से भुगतान करना चाहते थे, जबकि स्कूल का POS मशीन काम नहीं कर रहा था। स्कूल की ओर से ऑनलाइन भुगतान के लिए ERPF पोर्टल या NEFT/RTGS का विकल्प दिए जाने की बात कही गई थी।
झारखंड डिजिटल ने भी मामले को प्रमुखता से उठाया
जब विवाद लंबे समय तक जारी रहा और छात्रा की पढ़ाई प्रभावित होने की स्थिति बनी रही, तब झारखंड डिजिटल ने मामले को प्रमुखता से उठाया।
छात्रा की परेशानी, एडमिशन को लेकर उसके परिवार की शिकायत और फीस-सिलेबस से जुड़े पूरे विवाद को सामने रखा गया। इसके साथ ही मामले के दूसरे पक्ष यानी स्कूल प्रबंधन और प्रशासन का पक्ष भी सामने लाया गया, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
झारखंड डिजिटल की खबर के बाद मामले में प्रशासनिक स्तर पर भी दोबारा पहल तेज हुई। जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय और जिला प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि फीस से जुड़ा विवाद अपनी जगह रहे, लेकिन एक छात्रा का एडमिशन और उसकी पढ़ाई किसी भी वजह से न रुके।
दोबारा हुई बातचीत, अब हुआ एडमिशन
मामले को सुलझाने के लिए स्कूल प्रबंधन और छात्रा के अभिभावक के बीच बातचीत कराई गई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी और सिद्धि सिंह का 11वीं में एडमिशन हो गया।
इस तरह जिस एडमिशन को लेकर कई महीनों से गतिरोध बना हुआ था, उसका अब समाधान निकल गया है। छात्रा की आगे की पढ़ाई का रास्ता भी साफ हो गया है।
बकाया फीस जमा करने के लिए 40 दिन की मोहलत
एडमिशन के साथ ही बकाया फीस का मुद्दा भी बातचीत के जरिए सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ा है। अभिभावक की ओर से बकाया राशि जमा करने के लिए 30 दिनों का समय मांगा गया था। इसके बाद जिला शिक्षा अधीक्षक द्वारा 40 दिनों की मोहलत दी गई है।
यानी फीस का जो भी बकाया मामला है, उसे स्कूल और अभिभावक आपसी बातचीत से सुलझाएंगे। फिलहाल इसका असर सिद्धि के एडमिशन पर नहीं पड़ा है और वह अपनी आगे की पढ़ाई जारी रख सकेगी।
पूरे घटनाक्रम को देखा जाए तो प्रशासन ने इस मामले में पहली शिकायत के बाद ही संज्ञान लिया था। 17 जून को स्कूल को पत्र भेजकर समाधान और एडमिशन सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए गए थे। इसके बाद जब मामला पूरी तरह नहीं सुलझ पाया और झारखंड डिजिटल ने इसे प्रमुखता से उठाया, तो मामले की फिर से समीक्षा और बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
डीसी और जिला शिक्षा अधीक्षक के स्तर से लगातार यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई कि फीस का विवाद छात्रा की शिक्षा के आड़े न आए। स्कूल और अभिभावक के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकाला गया और अब इसका परिणाम भी सामने है।
सिद्धि सिंह का एडमिशन हो चुका है। महीनों से चला आ रहा गतिरोध खत्म हो गया है और अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक छात्रा की पढ़ाई, जो विवाद के बीच अटक गई थी, दोबारा आगे बढ़ सकेगी।
इस पूरे मामले में झारखंड डिजिटल की रिपोर्टिंग से लेकर प्रशासन की पहल और स्कूल-अभिभावक के बीच हुई बातचीत तक, घटनाक्रम का सकारात्मक परिणाम सामने आया है – सिद्धि का एडमिशन हो गया और उसकी पढ़ाई का रास्ता साफ हो गया।
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