रांची: सावन का महीना आते ही चारों ओर भोलेनाथ के जयकारे सुनाई देने लगते हैं। राजधानी रांची में भी सावन के दौरान शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। इन्हीं आस्था के केंद्रों में से एक है नामकुम के राजाउलातू क्षेत्र में स्थित मरासिल्ली पहाड़, जहां प्रकृति की खूबसूरती के बीच भगवान शिव विराजमान हैं। सावन की आखिरी सोमवारी पर यहां सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। बारिश होती रही, लेकिन भक्तों के उत्साह और आस्था में कोई कमी नहीं आई।
करीब 230 एकड़ में फैले इस पहाड़ पर स्थित शिव मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पहाड़ की चढ़ाई करनी पड़ती है। चारों ओर हरियाली, चट्टानें और बारिश के बाद का खुशनुमा मौसम इस जगह की खूबसूरती को और बढ़ा देता है। यही वजह है कि मरासिल्ली पहाड़ अब सिर्फ स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए इसकी पहचान दूर-दूर तक पहुंची है।
दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु
सावन की सोमवारी पर मरासिल्ली बाबा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कई लोग सुबह-सुबह यहां पहुंचकर जलाभिषेक करते हैं और बेलपत्र, फूल और अन्य पूजा सामग्री भगवान शिव को अर्पित करते हैं। कुछ श्रद्धालु ऐसे भी हैं जो आसपास के जिलों और दूसरे राज्यों से यहां पहुंचते हैं।
इन भक्तों के लिए यह सिर्फ एक मंदिर तक पहुंचने का सफर नहीं है। पहाड़ की चढ़ाई, बारिश और रास्ते की मुश्किलें भी उनकी श्रद्धा के आगे छोटी पड़ जाती हैं। मन में एक ही विश्वास होता है कि भोलेनाथ के दरबार में मांगी गई मनोकामना एक दिन जरूर पूरी होगी।
स्थानीय मान्यता है कि मरासिल्ली बाबा सच्ची श्रद्धा से मांगी गई मनोकामना पूरी करते हैं। कोई विवाह की इच्छा लेकर पहुंचता है, कोई संतान की कामना लेकर, तो कोई नौकरी और परिवार की खुशहाली के लिए बाबा के दरबार में माथा टेकता है। स्थानीय पुजारी और श्रद्धालु भी इस स्थान को मनोकामना पूरी होने वाले धाम के रूप में मानते हैं।
चट्टानों के बीच विराजमान हैं भोलेनाथ
यहाँ की सबसे खास बात इसका प्राकृतिक स्वरूप है। यह एक बड़े चट्टानी क्षेत्र में फैला पहाड़ है और इसकी चोटी पर भगवान शिव का प्राचीन मंदिर स्थित है। मंदिर और शिवलिंग को लेकर स्थानीय लोगों के बीच कई मान्यताएं और लोककथाएं प्रचलित हैं।
एक मान्यता के अनुसार यहां स्थित शिवलिंग स्वयंभू है। वहीं कुछ स्थानीय बुजुर्गों का मानना है कि मंदिर का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने किया था। इन मान्यताओं की ऐतिहासिक पुष्टि अलग विषय है, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए इनका धार्मिक महत्व आज भी कायम है।
वह जलकुंड, जो कभी नहीं सूखता
मरासिल्ली पहाड़ की कहानी को और रहस्यमय बनाता है यहां मौजूद जलकुंड। स्थानीय लोगों के अनुसार पहाड़ पर कई जलकुंड हैं, लेकिन इनमें से एक प्रमुख कुंड ऐसा है जिसका पानी भीषण गर्मी में भी नहीं सूखता।
स्थानीय मान्यता में इस कुंड को बेहद खास माना जाता है। वर्षों से इसके पानी और गहराई को लेकर कई तरह की बातें कही जाती रही हैं। यही प्राकृतिक रहस्य और धार्मिक आस्था इस पहाड़ को दूसरे शिवधामों से अलग पहचान देते हैं।
सोशल मीडिया ने बढ़ाई पहचान
कुछ साल पहले तक मरासिल्ली पहाड़ की पहचान मुख्य रूप से आसपास के गांवों और रांची के स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच थी। लेकिन अब सोशल मीडिया पर यहां की तस्वीरें और वीडियो तेजी से लोगों तक पहुंच रहे हैं।
बारिश में हरियाली से घिरा पहाड़, चट्टानों के बीच बना मंदिर, जलकुंड और पहाड़ की चोटी से दिखाई देने वाला प्राकृतिक नजारा लोगों को आकर्षित करता है। धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति का यह मेल युवाओं और दूसरे शहरों से आने वाले लोगों के लिए भी इसे खास बना रहा है।
भारी बारिश में भी दिखा आस्था का जनसैलाब
सावन की आखिरी सोमवारी पर मौसम ने भी करवट ली। रुक-रुककर बारिश होती रही, लेकिन भक्तों के कदम नहीं रुके। कोई सिर पर पूजा की थाली लिए पहाड़ की ओर बढ़ता दिखा तो कोई बारिश से बचते हुए परिवार के साथ बाबा के दर्शन के लिए पहुंचा।
भक्तों के चेहरों पर थकान से ज्यादा उत्साह था। हर-हर महादेव के जयकारों के बीच श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार करते रहे और बाबा का जलाभिषेक किया।
आखिर सावन सिर्फ एक महीना नहीं, बल्कि शिवभक्तों के लिए विश्वास का महीना है। और मरासिल्ली पहाड़ जैसे धाम उस विश्वास को और गहरा करते हैं। यहां आने वाला हर भक्त अपने साथ एक उम्मीद लेकर आता है कि भोलेनाथ के दरबार में रखी मन की बात जरूर सुनी जाएगी।
पत्थर से घर बनाने की भी है मान्यता
मरासिल्ली पहाड़ से जुड़ी एक और दिलचस्प मान्यता स्थानीय लोगों के बीच काफी प्रचलित है। कहा जाता है कि यहां के पत्थरों से अगर कोई श्रद्धालु अपने घर का निर्माण करता है, तो उसकी यह मनोकामना पूरी होती है और उसका अपना घर बनकर तैयार होता है। इसी विश्वास के साथ कई लोग यहां से पत्थर लेकर जाते हैं और उसे अपने घर के निर्माण से जोड़कर देखते हैं।
स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ एक पत्थर नहीं, बल्कि भोलेनाथ का आशीर्वाद माना जाता है। यही वजह है कि दूर-दूर से आने वाले कई श्रद्धालु बाबा के दर्शन के साथ इस मान्यता को भी अपने मन में रखते हैं। किसी के लिए यह घर बनाने की इच्छा है, किसी के लिए परिवार की खुशहाली और किसी के लिए जीवन में नई शुरुआत की उम्मीद।
हालांकि यह एक स्थानीय धार्मिक मान्यता है, लेकिन श्रद्धालुओं के बीच इसका विश्वास आज भी कायम है। शायद यही विश्वास है जो लोगों को बारिश, चढ़ाई और दूरी की परवाह किए बिना मरासिल्ली पहाड़ तक खींच लाता है।
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