रांची: झारखंड की ग्राम पंचायतों में अब योजनाओं, भुगतान और वित्तीय कामकाज को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। केंद्र सरकार के e-Panchayat Mission Mode Project के तहत राज्य की 4,345 ग्राम पंचायतें और समकक्ष पंचायतें eGramSwaraj-PFMS इंटरफेस से जुड़ चुकी हैं। इनमें 4,316 पंचायतों में ऑनलाइन भुगतान की सुविधा भी उपलब्ध है।

केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य की 4,343 ग्राम पंचायतों की ग्राम पंचायत विकास योजनाएं (GPDP) eGramSwaraj पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी हैं। इससे पंचायत स्तर पर तैयार की जाने वाली विकास योजनाओं को डिजिटल रिकॉर्ड में रखने और उनकी निगरानी करने में मदद मिल रही है।
4,039 पंचायतों की ऑडिट रिपोर्ट ऑनलाइन तैयार
पंचायतों के वित्तीय कामकाज की निगरानी के लिए Audit Online का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 की ऑडिट अवधि में झारखंड की 4,345 ग्राम पंचायतों में से 4,039 पंचायतों की ऑडिट रिपोर्ट ऑनलाइन तैयार की गई।
इससे पंचायतों के वित्तीय लेन-देन और खर्च से जुड़ी जानकारी को डिजिटल ऑडिट प्रक्रिया के तहत दर्ज किया जा रहा है। हालांकि, अभी 306 पंचायतें ऐसी हैं, जिनकी ऑडिट रिपोर्ट इस अवधि में तैयार नहीं हुई है।
डिजिटल गवर्नेंस की ट्रेनिंग में 2,460 लोग शामिल
पंचायतों में डिजिटल व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों, पंचायत सचिवों और अन्य कर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में झारखंड के 2,460 प्रतिभागियों को डिजिटल गवर्नेंस और डिजिटल साक्षरता से जुड़ा प्रशिक्षण दिया गया।
वहीं पंचायत विकास योजना (PDP/GPDP) से संबंधित प्रशिक्षण में 2025-26 के दौरान राज्य से 72 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
2026-27 में प्रशिक्षण के आंकड़ों में बदलाव
वित्तीय वर्ष 2026-27 में 10 जुलाई तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में किसी प्रशिक्षण की संख्या दर्ज नहीं की गई है। दूसरी ओर, पंचायत विकास योजना से संबंधित प्रशिक्षण में 144 प्रतिभागियों के प्रशिक्षण का आंकड़ा दर्ज किया गया है।
eGramSwaraj, PFMS और Audit Online जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं के जरिए पंचायतों के कामकाज को ऑनलाइन करने का उद्देश्य योजनाओं की निगरानी, भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता और पंचायतों के वित्तीय रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से व्यवस्थित करना है।
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