‘सालों की मेहनत से मिली नौकरी’
चयनित अभ्यर्थियों ने कहा कि वे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं और वर्षों तक पढ़ाई व तैयारी करने के बाद परीक्षा में सफल हुए हैं। उन्होंने 35 से 40 लाख रुपये देकर नौकरी हासिल करने के आरोपों को सिरे से खारिज किया। अभ्यर्थियों के मुताबिक, उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे इतनी बड़ी रकम देकर नौकरी खरीद सकें।
दोषियों पर कार्रवाई की मांग
अभ्यर्थियों ने कहा कि अगर परीक्षा या नियुक्ति प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। लेकिन जांच के नाम पर सभी चयनित अभ्यर्थियों को एक ही नजर से देखना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि मामले की जांच CID कर रही है और न्यायालय भी पूरे विवाद को देख रहा है। ऐसे में जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए।
‘नौकरी गई तो परिवार पर पड़ेगा असर’
प्रेस वार्ता के दौरान कुछ चयनित अभ्यर्थी भावुक भी हो गए। उन्होंने कहा कि इस विवाद का असर सिर्फ उनकी नौकरी पर नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार के भविष्य पर पड़ रहा है।
एक अभ्यर्थी ने बताया कि वह आदिवासी और गरीब परिवार से आते हैं। उनकी मां घर पर रहती हैं। उन्होंने कहा कि 35-40 लाख रुपये देकर नौकरी हासिल करना उनके लिए संभव नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि कोर्ट के फैसले के बाद उनकी नियुक्ति हुई थी और इससे पहले वह ITBP में कार्यरत थे, लेकिन JSSC CGL में नौकरी मिलने के बाद उन्होंने वहां की नौकरी छोड़ दी।
अभ्यर्थियों की एक ही मांग
चयनित अभ्यर्थियों ने कहा कि निष्पक्ष जांच हो, दोषियों को सजा मिले, लेकिन बिना दोष साबित किए निर्दोष चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी रद्द न की जाए। उनका कहना है कि भीड़ के दबाव या आरोपों के आधार पर फैसला लेने के बजाय जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए।