देशभर में जहां मतदाता सूचियों की शुद्धता को लेकर बहस तेज है, वहीं झारखंड से भी एक चिंताजनक मामला सामने आया है। राज्य में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने के लिए बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज जमा किए जाने का खुलासा हुआ है। यह प्रक्रिया 30 सितंबर तक जारी रहेगी, जिसमें स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूसरे राज्यों के नागरिक भी दावेदारी कर रहे हैं।
दूसरे राज्यों के करीब 20 हजार दस्तावेज जांच के लिए भेजे
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अनुसार अब तक करीब 20 हजार दस्तावेज दूसरे राज्यों में सत्यापन के लिए भेजे गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा दस्तावेज बिहार भेजे गए हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश का स्थान है। ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ के अलावा आंध्र प्रदेश, गुजरात और असम जैसे राज्यों के संबंधित अधिकारियों को भी दस्तावेज भेजे गए हैं।

झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रवि कुमार के मुताबिक दूसरे राज्यों से जारी दस्तावेजों का सत्यापन संबंधित राज्य के CEO के माध्यम से कराया जा रहा है। वहीं, राज्य के भीतर जारी दस्तावेजों की जांच जिला निर्वाचन पदाधिकारी स्तर पर की जा रही है। CBSE और ICSE से जुड़े प्रमाण पत्रों का सत्यापन संबंधित बोर्ड से कराया जा रहा है।
कुछ प्रमाण पत्रों की वैधता पर सवाल
SIR के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों में कुछ प्रमाण पत्रों के फर्जी या अवैध होने की शिकायतें सामने आई हैं। प्रयाग महिला विद्यापीठ, प्रयागराज से जारी कुछ प्रमाण पत्रों को अवैध पाया गया है, क्योंकि संबंधित संस्थान की मान्यता को लेकर सवाल सामने आए हैं। निर्वाचन विभाग ने ऐसे मामलों में संबंधित राज्यों और संस्थानों से दस्तावेजों का सत्यापन कराने की प्रक्रिया तेज की है। अधिकारियों का कहना है कि कोई दस्तावेज अवैध या फर्जी पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ERO के नोटिस के बाद अतिरिक्त दस्तावेज जरूरी
जिन लोगों का नाम पिछले SIR में शामिल नहीं था, उन्हें पात्रता साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज देने पड़ सकते हैं। इसके अलावा पता बदलने, मतदाता सूची में एक से अधिक बार नाम होने या दस्तावेजों में कमी पाए जाने वाले मामलों में भी नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
ERO के स्तर पर मांगे गए अतिरिक्त दस्तावेज BLO ऐप के जरिए अपलोड किए जाएंगे। जिला निर्वाचन पदाधिकारी को ECINET पर दस्तावेज प्राप्त होने के पांच दिनों के भीतर उनका सत्यापन करना है। यदि दस्तावेज दूसरे जिले या दूसरे राज्य से जारी हुआ है, तो उसे संबंधित अधिकारी के पास सत्यापन के लिए भेजा जाएगा।
बिहार में सबसे ज्यादा दस्तावेज लंबित
24 सितंबर तक बिहार में 1,340 दस्तावेज सत्यापन के लिए लंबित थे। सभी राज्यों को मिलाकर करीब 3,000 दस्तावेजों का वेरिफिकेशन अभी बाकी है। 30 सितंबर तक दावे-आपत्तियां स्वीकार किए जाने के कारण दस्तावेजों की संख्या और बढ़ सकती है। निर्वाचन विभाग का कहना है कि सत्यापन पूरा होने के साथ लंबित मामलों की संख्या लगातार कम हो रही है ।


