शिक्षा के अधिकार ने खोली नई राह: पश्चिमी सिंहभूम में 79 बच्चों को मिलेगी निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा
चाईबासा, झारखंड: पश्चिमी सिंहभूम जिले के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 (आरटीई) के तहत 79 बच्चों का चयन निजी विद्यालयों में मुफ्त नामांकन के लिए किया गया है। यह उन परिवारों के लिए एक आशा की किरण है जो अपने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक बाधाओं के कारण अक्सर पीछे रह जाते हैं। इस पहल से जिले में निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जिससे वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चों को भी समान अवसर मिल सकेगा।
जिले के विभिन्न मान्यता प्राप्त गैर-सहायता प्राप्त निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर प्रवेश कक्षा में नामांकन के लिए बहुप्रतीक्षित लॉटरी प्रक्रिया हाल ही में पूरी कर ली गई। यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हुई, जिससे सभी पात्र आवेदकों को समान अवसर मिला।
जिला स्तरीय समिति की महत्वपूर्ण बैठक
पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित प्रकोष्ठ में इस महत्वपूर्ण लॉटरी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया था। इस बैठक की अध्यक्षता स्वयं उपायुक्त मनीष कुमार ने की, जो शिक्षा के इस अधिकार को हर बच्चे तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बैठक में उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, पोड़ाहाट-चक्रधरपुर अनुमंडल पदाधिकारी श्रुति राजलक्ष्मी, जिला शिक्षा पदाधिकारी टोनी प्रेमराज टोप्पो और जिला शिक्षा अधीक्षक प्रवीण कुमार सहित कई अन्य महत्वपूर्ण अधिकारी भी उपस्थित थे। इन सभी अधिकारियों ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि चयन प्रक्रिया में कोई त्रुटि न हो और बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहे।
बैठक में आरटीई के तहत अभिवंचित वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और बीपीएल परिवारों के बच्चों के निःशुल्क नामांकन के लिए प्राप्त हुए ऑनलाइन आवेदनों की गहन समीक्षा की गई। यह समीक्षा यह सुनिश्चित करने के लिए की गई थी कि केवल पात्र आवेदक ही लॉटरी प्रक्रिया में शामिल हों। इसके बाद, आरटीई पोर्टल के माध्यम से पूरी लॉटरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी तरीके से संचालित किया गया।
आवेदन और चयन का विस्तृत ब्यौरा
पश्चिमी सिंहभूम जिले के मान्यता प्राप्त गैर-सहायता प्राप्त निजी विद्यालयों में आरटीई के तहत प्रवेश कक्षा की कुल 135 आरक्षित सीटें उपलब्ध थीं। इन सीटों के लिए कुल 235 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए थे, जो इस बात का संकेत है कि कितनी बड़ी संख्या में परिवार इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं। आवेदनों की बारीकी से जांच और सत्यापन के बाद, पात्र पाए गए आवेदनों को लॉटरी प्रक्रिया में शामिल किया गया। अंततः, लॉटरी के माध्यम से कुल 79 बच्चों का चयन नामांकन के लिए किया गया, जिनके चेहरों पर अब मुस्कान आने वाली है।
नामांकन प्रक्रिया और आवश्यक निर्देश
चयनित बच्चों की विद्यालयवार सूची तैयार कर संबंधित विद्यालयों को तुरंत उपलब्ध करा दी गई है। सभी विद्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे चयनित बच्चों के माता-पिता एवं अभिभावकों को तत्काल सूचना दें। इसके बाद, आवश्यक प्रमाण-पत्रों व दस्तावेजों की जांच पूरी करने के लिए एक प्रक्रिया निर्धारित की गई है। दस्तावेज सत्यापन के सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद, सभी विद्यालयों को पांच दिनों के भीतर बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इस प्रक्रिया में कोई भी अनावश्यक देरी न हो, ताकि बच्चों की शिक्षा जल्द से जल्द शुरू हो सके।
उपायुक्त मनीष कुमार ने इस अवसर पर कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम का मुख्य उद्देश्य वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का समान अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों और विद्यालय प्रबंधन को कड़े निर्देश दिए कि नामांकन प्रक्रिया को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी पात्र बच्चे को इस महत्वपूर्ण योजना के लाभ से वंचित न किया जाए। यह एक मानवीय दृष्टिकोण है जो सुनिश्चित करता है कि कोई भी बच्चा अपने सपने पूरे करने से न चूके।
अभिभावक और इच्छुक व्यक्ति नामांकन से संबंधित विस्तृत जानकारी और विद्यालयवार चयनित बच्चों की सूची पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर प्राप्त कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए, कृपया जिला प्रशासन की वेबसाइट https://chaibasa.nic.in पर जाएं। यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में समानता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है और निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा अब पश्चिमी सिंहभूम के कई बच्चों के लिए एक सपना नहीं, बल्कि हकीकत बन गई है।

