मिंस्क, बेलारूस: पूर्वी यूरोप के भू-राजनीतिक गलियारे से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। बेलारूस का मुख्य विपक्षी संगठन ‘यूनाइटेड ट्रांजिशनल कैबिनेट’ ने दावा किया है कि बेलारूस की सरकार बेलारूस रूस-यूक्रेन युद्ध में सीधे तौर पर कूदने की गोपनीय तैयारी कर रही है। विपक्ष ने इस संबंध में एक विस्तृत और संवेदनशील रिपोर्ट यूक्रेन सरकार को आधिकारिक तौर पर सौंपी है। इन दावों ने क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
विपक्षी गुटों का स्पष्ट कहना है कि पिछले कुछ सालों में बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको की सरकार ने लगातार ऐसे कई कड़े कदम उठाए हैं, जो सीधे तौर पर एक बड़े युद्ध की तैयारी की ओर इशारा करते हैं। रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि देश ने हाल ही में अपने बुनियादी सैन्य कानूनों में बड़े बदलाव किए हैं, जिसके चलते अब जरूरत पड़ने पर बेलारूसी सेना को विदेशों में सैन्य ऑपरेशन के लिए भेजने का कानूनी रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। यह कदम अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बेलारूस की पारंपरिक सैन्य नीति से हटकर है।
बेलारूस रूस-यूक्रेन युद्ध: विपक्ष के गंभीर आरोप
बेलारूस की निर्वासित विपक्षी नेता स्वेतलाना त्सिखानोव्सकाया ने इस पर बयान देते हुए कहा है कि यूक्रेन का वर्तमान संघर्ष केवल उसकी अपनी क्षेत्रीय आजादी की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह बेलारूस के भी लोकतांत्रिक भविष्य से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। उनका मानना है कि युद्ध में यूक्रेन की सफलता बेलारूस के भीतर मौजूदा तानाशाही शासन को उखाड़ फेंकने और राजनीतिक बदलाव की उम्मीदों को मजबूत कर सकती है। त्सिखानोव्सकाया लंबे समय से लुकाशेंको शासन की कड़ी आलोचक रही हैं और उन्होंने बेलारूस में लोकतांत्रिक सुधारों की वकालत की है।
विपक्ष ने अपनी रिपोर्ट में बेलारूस की सैन्य तैयारियों को लेकर कई गंभीर खुलासे किए हैं। इन दावों पर अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की निगाहें टिकी हुई हैं:
- सेना का अभूतपूर्व विस्तार: खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बेलारूस ने पिछले कुछ सालों के भीतर अपनी नियमित सेना का अभूतपूर्व और तेजी से विस्तार किया है। अग्रिम मोर्चों पर सैनिकों की संख्या में भारी बढ़ोतरी की गई है।
- नए सैन्य कमांड का गठन: देश भर में नए क्षेत्रीय सैन्य कमांड का गठन किया जा रहा है, जिससे सेना की पहुंच और प्रभाव बढ़ सके।
- ‘रिजर्व बल’ का निर्माण: आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए बैकअप के रूप में बड़ी संख्या में ‘रिजर्व बल’ (लड़ाके) तैयार किए जा रहे हैं। यह रणनीति किसी भी बड़े सैन्य अभियान के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
- कैदियों की भर्ती: विपक्ष का यह भी गंभीर आरोप है कि सरकार ने अनिवार्य सैन्य भर्ती प्रक्रिया का दायरा काफी बढ़ा दिया है और रूस की तर्ज पर अब जेलों में बंद कैदियों को भी अग्रिम मोर्चे के लिए सेना में शामिल करने की कवायद शुरू की जा रही है। यह एक विवादास्पद कदम है, जिस पर मानवाधिकार संगठनों की भी चिंताएं बढ़ सकती हैं।
रूसी हथियारों और वैगनर ग्रुप की तैनाती
इस रिपोर्ट में एक और बड़ा दावा किया गया है कि बेलारूस की सीमा के भीतर रूसी सैनिकों की सक्रिय मौजूदगी पहले की तुलना में काफी बढ़ गई है। रूस ने अपने बेहद खतरनाक सामरिक परमाणु हथियार (Tactical Nuclear Weapons) और कई अन्य आधुनिक मिसाइल प्रणालियां भी बेलारूस के सैन्य ठिकानों पर तैनात कर दी हैं। यह कदम नाटो देशों और पश्चिमी यूरोप के लिए एक बड़ी चिंता का विषय रहा है, क्योंकि यह क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकता है।
इसके साथ ही, रूसी निजी सैन्य समूह ‘वैगनर ग्रुप’ (Wagner Group) के अत्यधिक अनुभवी कमांडर इन दिनों बेलारूसी सैनिकों और नए रंगरूटों को युद्ध कला की विशेष ट्रेनिंग दे रहे हैं। वैगनर ग्रुप के लड़ाके अपने क्रूर युद्ध कौशल और विभिन्न संघर्षों में भागीदारी के लिए जाने जाते हैं। उनकी बेलारूस में मौजूदगी से प्रशिक्षण और सैन्य क्षमताओं के स्तर में वृद्धि की आशंका है।
हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ये सभी दावे पूरी तरह से बेलारूस के विपक्षी संगठनों की रिपोर्ट पर आधारित हैं। बेलारूस की वर्तमान सरकार या राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से इन तीखे आरोपों पर अभी तक कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया या खंडन सामने नहीं आया है। इस स्थिति ने अटकलों और अनिश्चितता को जन्म दिया है, जिसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन वे निश्चित रूप से भविष्य में बेलारूस रूस-यूक्रेन युद्ध में बेलारूस की भूमिका पर गहन बहस छेड़ेंगे।
अधिक जानकारी के लिए, आप रायटर्स की इस रिपोर्ट को पढ़ सकते हैं: बेलारूस के युद्ध में शामिल होने की आशंका पर रायटर्स की रिपोर्ट


