झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां और दिवंगत झामुमो नेता शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताया है। खास बात यह रही कि प्रधानमंत्री ने रूपी सोरेन के निधन पर अपनी संवेदना तीन भाषाओं—अंग्रेजी, हिंदी और संताली में व्यक्त की। संताली संदेश को ओल चिकी लिपि में लिखा गया है।
प्रधानमंत्री ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में रूपी सोरेन के निधन पर दुख जताते हुए उनके जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण के लिए किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया। इसके बाद उन्होंने शोक की इस घड़ी में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कल्पना सोरेन और पूरे परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
अंग्रेजी में पीएम मोदी ने क्या लिखा?
अपने संदेश के अंग्रेजी हिस्से में प्रधानमंत्री ने रूपी सोरेन के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि वह जनजातीय समुदायों को सशक्त बनाने के लिए लगातार काम करती रहीं। उन्होंने इस कठिन समय में हेमंत सोरेन, कल्पना सोरेन और उनके पूरे परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।
हिंदी में भी जताई संवेदना
इसके बाद प्रधानमंत्री ने यही भाव हिंदी में भी व्यक्त किया। हिंदी संदेश में उन्होंने रूपी सोरेन के निधन पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण के लिए काम किया। पीएम ने शोक की इस घड़ी में हेमंत सोरेन, कल्पना सोरेन और उनके परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
संताली (ओल चिकी ) लिपि भाषा में भी संदेश
पीएम मोदी के पोस्ट का तीसरा हिस्सा संताली भाषा में है, जिसे ओल चिकी लिपि में लिखा गया है। यह हिस्सा विशेष रूप से झारखंड के संताली भाषी आदिवासी समाज के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। रूपी सोरेन की पहचान झारखंड के आदिवासी समाज और सोरेन परिवार से गहराई से जुड़ी रही है। प्रधानमंत्री के संदेश में संताली का इस्तेमाल करते हुए शोक और संवेदना का वही भाव स्थानीय भाषा में भी सामने रखा गया है।
आखिर क्यों संथाली में लिखा pm ने ?
संताली में संदेश देने की वजह भी खास मानी जा रही है। झारखंड में संताली एक प्रमुख आदिवासी भाषा है और इसे ओल चिकी लिपि में लिखा जाता है। रूपी सोरेन का जुड़ाव भी आदिवासी समाज और झारखंड की सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से रहा है। ऐसे में पीएम मोदी ने संताली भाषा और ओल चिकी लिपि के जरिए संवेदना व्यक्त कर स्थानीय आदिवासी समाज तक अपने संदेश को उनकी अपनी भाषा में पहुंचाने की कोशिश की।
रूपी सोरेन के निधन से शोक में डूबा सोरेन परिवार
रूपी सोरेन का निधन 7 अक्टूबर की रात करीब 8:30 बजे रांची के एक निजी अस्पताल में हुआ था। वह 80 वर्ष की थीं और 18 सितंबर से सांस लेने में परेशानी के चलते अस्पताल में भर्ती थीं। उनकी हालत बिगड़ने के बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था।
रूपी सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की पत्नी तथा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां थीं। 1999 में उन्होंने दुमका लोकसभा सीट से चुनाव भी लड़ा था। इसके बाद उन्होंने सक्रिय चुनावी राजनीति से दूरी बनाए रखी और परिवार के साथ रहीं। इस वर्ष वह राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में शिबू सोरेन को मरणोपरांत दिए गए पद्म भूषण सम्मान को ग्रहण करने भी पहुंची थीं।
रूपी सोरेन के निधन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी भावुक संदेश के जरिए अपनी मां को याद किया। वहीं, झारखंड के अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी शोक व्यक्त करते हुए सोरेन परिवार के प्रति संवेदना जताई है।


