Tuesday, October 13

रांची/इटकी: झारखंड में किसानों को उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए। आधुनिक मशीनें लगाई गईं, गोदाम बना, गार्ड रूम, जेनरेटर रूम और कर्मचारियों के रहने के लिए क्वार्टर तक तैयार किए गए। तत्कालीन राज्यपाल ने उद्घाटन भी किया। लेकिन इस पूरी कवायद का किसानों को क्या फायदा मिला? जवाब है – 12 साल बाद भी बीज प्रसंस्करण इकाई शुरू नहीं हो सकी। अब हालात ऐसे हैं कि भवन जर्जर हो रहा है और मशीनों के कई पुर्जे तक गायब बताए जा रहे हैं।

यह मामला रांची जिले के इटकी प्रखंड के तिलकसूती गांव का है। विडंबना यह है कि राज्य की इस इकलौती बीज प्रसंस्करण इकाई की बदहाली के बीच कृषि विभाग की कमान संभाल रहीं मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने अप्रैल 2025 में खुद यहां का निरीक्षण किया था। उन्होंने इकाई का इस्तेमाल नहीं होने पर नाराजगी जताई थी और अधिकारियों को एक महीने के भीतर कागजी प्रक्रिया पूरी कर सिडकोफेड के माध्यम से संचालन शुरू कराने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद इकाई की मौजूदा स्थिति व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

करोड़ों का भवन बना, लेकिन किसानों के काम नहीं आया

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत इस इकाई की स्थापना किसानों को उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। यहां दो इमारतें बनाई गई थीं। एक में बीज प्रसंस्करण के लिए आधुनिक मशीनें लगाई गईं, जबकि दूसरी इमारत को गोदाम के रूप में तैयार किया गया। इसके अलावा गार्ड रूम, जेनरेटर रूम और स्टाफ क्वार्टर भी बनाए गए।

लेकिन निर्माण और उद्घाटन के बाद इकाई का नियमित संचालन शुरू ही नहीं हो सका। नतीजा यह हुआ कि जिस परिसर को किसानों की मदद के लिए तैयार किया गया था, वह धीरे-धीरे बदहाली का शिकार होता चला गया। भवन के उपयोग में नहीं आने से उसके जर्जर होने की स्थिति सामने आई है और परिसर झाड़ियों से घिर चुका है।

 

मशीनें लगाने पर करोड़ों खर्च, अब पुर्जे गायब होने का दावा

इकाई की बदहाली केवल भवन तक सीमित नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यहां लगाए गए जेनरेटर के कल-पुर्जे गायब हैं। आधुनिक मशीनों के भी कई पुर्जे नहीं हैं और कुछ मशीनों के केवल ढांचे बचे होने की बात कही जा रही है।

बिजली आपूर्ति के लिए लगाया गया ट्रांसफार्मर, इलेक्ट्रिक पैनल, स्विच और तार भी बेकार पड़े हैं। परिसर की स्ट्रीट लाइटें भी अब उपयोग में नहीं हैं। मुख्य गेट, खिड़कियां, दरवाजे और चहारदीवारी तक टूटने की जानकारी सामने आई है।

यानी इकाई को चालू करने के लिए जिस बुनियादी ढांचे और मशीनों पर सरकारी पैसा खर्च किया गया, उनका इस्तेमाल किसानों के हित में नहीं हो सका।

अप्रैल 2025 में मंत्री ने जताई थी नाराजगी, एक महीने में संचालन का दिया था निर्देश

अप्रैल 2025 में कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने इकाई का निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों के साथ मौके की स्थिति का जायजा लिया। इकाई का इस्तेमाल नहीं होने पर मंत्री ने नाराजगी जताई और अधिकारियों को एक महीने के भीतर जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी कर सिडकोफेड के माध्यम से संचालन शुरू कराने का निर्देश दिया था।

लेकिन अब भी इकाई के चालू नहीं होने और उपकरणों की बदहाली से जुड़े सवाल उठ रहे हैं।

निर्माण हुआ, लेकिन संचालन की योजना ही नहीं बनी?

बताया जाता है कि इकाई का निर्माण वेजफेड के माध्यम से कराया गया था, लेकिन निर्माण पूरा होने के बाद संचालन की ठोस योजना नहीं बनाई गई। पूर्व मंत्री बंधु तिर्की भी इस मामले को लेकर कई बार शिकायत कर चुके हैं। उनकी शिकायत पर कृषि निदेशक ने जांच का आदेश दिया था।

जब करोड़ों रुपये खर्च कर भवन और मशीनें तैयार की गईं, तो संचालन की व्यवस्था पहले क्यों नहीं की गई? 

किसानों की उम्मीदों पर लगा ताला

स्थानीय किसानों का कहना है कि इकाई का शुरू नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्हें उम्मीद थी कि यहां बीजों का प्रसंस्करण होने से उन्नत किस्म के बीज सुलभ हो सकेंगे और खेती में मदद मिलेगी। लेकिन 12 साल गुजरने के बाद भी यह उम्मीद पूरी नहीं हुई है।

जिस इकाई को किसानों की मदद के लिए बनाया गया था, वह आज खुद सरकारी व्यवस्था की बदहाली की तस्वीर बन गई है।

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