दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के दूसरे नाम से मशहूर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के 27% यानि लगभग 60 हजार कर्मचारियों के ऊपर उनके नौकरी का खतरा मंडरा रहा है। माइक्रोसॉफ्ट ने अपने 60 हजार कर्मचारियों को ‘वॉलन्टरी एग्जिट ऑफर‘ थमा दिया है। वोलन्टरी एग्जिट ऑफर का मतलब है कि अब वे कर्मचारी अपने इच्छा से कंपनी को बाय बाय कर सकते है जिसके साथ उन्हें कुछ मुआवजा भी मिलता है। निश्चित समय सीमा के बाद अगर कंपनी उन्हें खुद निष्काषित करती है तो शायद उन्हें मुआवजा न मिले। माइक्रोसॉफ्ट ऑफिशल्स की माने तो ये प्रस्ताव उन योग्य कर्मचारियों को एक नया विक्लप देता है की वो कंपनी से बहार दूसरी जगह अपनी काबिलयत पेश कर सके।
मीडिया सोर्स के मुताबिक माइक्रोसॉफ्ट अपने लिए AI ढांचे को तैयार करने के लिए अरबो का निवेश कर रहा है जिसके लिए वो अपने हज़ारो कर्मचारियों को हटा पैसो की बचत कर रहा है।
इससे पहले कंपनी ने जुलाई में अपने 8700 कर्मचारियों को ‘ वोलन्टरी रिटायरमेंट प्रोग्राम ‘ का प्रस्ताव दिया था। जिसका मतलब है कर्मचारी अपने रिटायरमेंट आयु से पहले ही नौकरी से रिजाइन कर सकते है , उस समय करीब 30 % से ज्यादा कर्मचारियों ने इस प्रस्ताव को मान लिया था। इसके कुछ हफ्तों के दौरान ही माइक्रोसॉफ्ट ने लगभग अपने 4800 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था।
AI के इस बदलते दौर में माइक्रोसॉफ्ट अकेली कम्पनी नहीं है जिसने ऐसा कदम उठाया है , रिपोर्ट्स के मुताबिक 2026 में HSBC, Meta, Amazon जैसी कई नामचीन कंपनियों ने अपने कर्मचारियों के एक बड़े हिस्से को नौकरी से निकाला है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक AI के दौर में नौकरी पर कितना खतरा ?
AI के इस बदलते स्वरुप में जहां हर क्षेत्र में इसका भरपूर प्रयोग किया जा रहा है चाहे वो शिक्षा हो या स्वस्थ्य , टेक से लेकर व्यापार तक AI ने लगभग हर क्षेत्र में अपनी पकड़ बना ली हैं ऐसे में हर कर्मचारियों के मन में ये सवाल उठना लाजमी है कि उनकी नौकरी कितनी सुरक्षित है और उन्हें इसके बचाओ के लिए क्या करना चाहिए ?
अगर एक्सपर्ट्स की माने तो कुछ नौकरियों और कामों पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि AI सभी की नौकरियां खत्म कर देगा। ज्यादा संभावना उन नौकरियों में बदलाव की है, जहां बार-बार एक जैसा काम किया जाता है और जिसे तकनीक की मदद से आसानी से पूरा किया जा सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार दुनिया भर में हर चार में से एक व्यक्ति ऐसे पेशे में है जिस पर GenAI प्रभाव डाल सकती है। हालाँकि प्रभाव डालने का मतलब ये नहीं है कि इन सारे कर्मचारियों की नौकरी को खतरा है।
कुछ एक्सपर्ट्स AI को नए नौकरियों स्रोत के रूप में भी देख रहे है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अनुमान के अनुसार, 2030 तक विभिन्न आर्थिक और तकनीकी बदलावों से दुनिया में शुद्ध 7.8 करोड़ नौकरियां बढ़ सकती हैं। इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन (ILO) की रिपोर्ट का निष्कर्ष भी यही है कि बड़े पैमाने पर नौकरियां पूरी तरह खत्म होने के बजाय अनेक नौकरियों का स्वरूप बदलने की संभावना अधिक है। ऐसे में कर्मचारियों को अपने नौकरी को बचाए रखने के लिए कुछ बातो का ध्यान रखना चाहिए :
1. AI से डरने के बजाय उसे इस्तेमाल करने का स्किल सीखना चाहिए।
2 .अपने क्षेत्र में ऐसी मास्टरी हासिल करना कि आपकी कॉपी नहीं किया जा सके।
3. हर तीन से छह महीने में अपने क्षेत्र से जुड़े नयी स्किल्स सीखे।
4. अपने ह्यूमन रिसोर्स , क्रिएटिविटी, समस्या सुलझाने, कम्युनिकेशन और सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाएं।
भारत में क्या पड़ सकता है असर ?
भारत जैसे भरपूर जनसँख्या और युवाओ से भरे देश में जहां अधिकतर जनसँख्या अपनी प्राइमरी इनकम सोर्स पर ही निर्भर रहता है, AI के कारण नौकरी जाने के खतरे का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ सकता है। इसमें डाटा एंट्री ,कॉल सर्विस , कंटेंट राइटिंग ,अनुवाद, साधारण ग्राफ़िक्स और IT जैसे क्षेत्र शामिल है। पर इसका मतलब ये नहीं है इन क्षेत्रों के सारे कर्मचारियों को अपनी नौकरी से हाथ धोनी होगी , AI एक्सपर्ट्स की माने तो AI अपने साथ कई सारी नौकरियों को भी लाएगी इनमे वो लोग शामिल होंगे जो AI का इस्तेमाल कर अपने काम को और एनहान्स करेंगे।
ऐसे देश में जहां अधिकतर जनसंख्या अच्छी किस्म की नौकरी की कमी से प्रभावित है, युवाओ के बीच डिप्रेशन जैसी बीमारियां बढ़ रही है, वैसे में नीति बनाने वाले लोगो को मानव संसाधन रणनीति और AI फिलोसोफी का खास ध्यान रखना होगा।
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