भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाउरी ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए परिसीमन के मुद्दे पर कांग्रेस से कई सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 में जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी, तब जनसंख्या के आधार पर परिसीमन कर लोकसभा और विधानसभा सीटों का बंटवारा किया गया था, जिसके लिए 84वां संविधान संशोधन भी लाया गया था। उन्होंने बताया कि उस समय तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने भी इस प्रस्ताव को पास कराने में साथ दिया था। बाउरी ने सवाल उठाया कि जब भाजपा ने अब 50% अधिक सीट बढ़ाने का प्रस्ताव लोकसभा में रखा, तो कांग्रेस ने उसे सिरे से खारिज क्यों कर दिया।
झारखंड गठन और आदिवासी हितों का किया जिक्र
प्रदेश महामंत्री ने कहा कि झारखंड को अलग राज्य का दर्जा वर्ष 2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दिया था और उन्होंने ही भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर 15 नवंबर की तिथि तय की थी। उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा से आदिवासी और जनजातीय हितों की पक्षधर रही है, और इसी कड़ी में डॉक्टर द्रौपदी मुर्मू को देश की राष्ट्रपति बनाया गया।
परिसीमन के बाद सीटों में होगा बड़ा बदलाव
बाउरी ने बताया कि 2008 में 2026 तक झारखंड में परिसीमन न करने का प्रस्ताव था, जिसकी अवधि अब समाप्त हो रही है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने 50% सीट बढ़ाने का फैसला लिया है। उनके अनुसार, वर्तमान 81 विधानसभा सीटें बढ़कर करीब 121 हो जाएंगी, जिसमें आदिवासी और अनुसूचित जाति की सीटें भी क्रमशः 14-14 बढ़ेंगी। लोकसभा में आदिवासी सीटें 5 से बढ़कर 10 और अनुसूचित जाति सीट 1 से बढ़कर 2 होने की बात कही गई। उन्होंने राहुल गांधी से इस प्रस्ताव के विरोध पर सवाल किया और कांग्रेस से माफी की भी मांग की।
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