बोकारो: जिले में अवैध खनन, खनिजों के अवैध परिवहन और कोयला चोरी पर लगाम कसने के लिए प्रशासन ने निगरानी और कार्रवाई दोनों को और सख्त करने का फैसला लिया है। सोमवार को डीसी अजय नाथ झा की अध्यक्षता में हुई जिला स्तरीय खनन टास्क फोर्स की बैठक में जिले के सात संवेदनशील स्थानों पर चेकनाका स्थापित कर तीन पालियों में 24 घंटे निगरानी रखने का निर्देश दिया गया। इन पुलिस बैरियर की मानिटरिंग लगातार डीएमओ और जिला प्रशासन के अन्य पदाधिकारी करते रहेंगे।
बैठक में पिछली कार्रवाई की समीक्षा के दौरान सामने आया कि 28 जुलाई से 19 सितंबर 2026 के बीच अवैध खनन और खनिज परिवहन के मामलों में 46 वाहन जब्त किए गए। 8 शिकायत वाद दर्ज किए गए और 28.18 लाख रुपये की वसूली हुई।
बालू और पत्थर के मामलों में सबसे ज्यादा कार्रवाई
आंकड़ों के मुताबिक, बालू से जुड़े मामलों में 32 वाहन जब्त किए गए और 12.04 लाख रुपये की वसूली हुई। वहीं पत्थर के मामलों में 10 वाहन जब्त कर 16.14 लाख रुपये की वसूली की गई। कोयले से जुड़े मामलों में भी चार वाहन जब्त किए गए और नियमानुसार शिकायत वाद दर्ज कर कार्रवाई की गई।
प्रशासन अब इन गतिविधियों पर निगरानी के लिए सात संवेदनशील जगहों पर चेकनाका शुरू करेगा। यहां दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी और पुलिस बल की तैनाती होगी। तीन शिफ्ट में लगातार निगरानी रखी जाएगी, ताकि अवैध खनन, परिवहन या भंडारण की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
परियोजनाओं के GM की गैरमौजूदगी पर उपायुक्त नाराज
बैठक में विभिन्न परियोजनाओं के महाप्रबंधकों की अनुपस्थिति पर उपायुक्त ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जिला स्तरीय खनन टास्क फोर्स की बैठक में संबंधित परियोजनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी जरूरी है।
उपायुक्त ने जिला खनन पदाधिकारी को निर्देश दिया कि अगली बैठक से सभी संबंधित परियोजनाओं के महाप्रबंधकों की उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए।
सात बालू घाटों की नीलामी पूरी, 15 अक्टूबर से दो घाटों का संचालन
बैठक में बताया गया कि जिले के सात बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सभी सात घाट समर्थ एड प्रोटेक्शन प्राइवेट लिमिटेड को प्राप्त हुए हैं। कंपनी की ओर से करीब पांच करोड़ रुपये की प्रतिभूति राशि जमा की जा चुकी है।
NGT की रोक से संबंधित अवधि समाप्त होने के बाद 15 अक्टूबर से खेतको और पिछड़ी बालू घाटों का संचालन शुरू किया जा सकेगा। दोनों घाटों के लिए जरूरी स्वीकृतियां मिल चुकी हैं, जबकि बाकी घाटों के संचालन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।
बंद कोयला खदानों पर बढ़ेगी पेट्रोलिंग
परित्यक्त और गैर-संचालित कोयला खदानों में अवैध खनन और कोयला चोरी रोकने के लिए भी प्रशासन ने निगरानी बढ़ाने का फैसला लिया है। उपायुक्त ने नियमित पेट्रोलिंग के साथ रूट-चार्ट तैयार करने, एप्रोच रोड विकसित करने और जरूरत के अनुसार जांच चौकियां स्थापित करने का निर्देश दिया।
सीसीएल और बीसीसीएल समेत संबंधित परियोजनाओं को अपनी परिसंपत्तियों की सुरक्षा की व्यवस्था मजबूत करने तथा सीआईएसएफ की नियमित पेट्रोलिंग सुनिश्चित करने को कहा गया।
खनिज लदे वाहनों की होगी औचक जांच
अब खनिज परिवहन करने वाले वाहनों की नियमित जांच के साथ औचक जांच भी की जाएगी। सीआईएसएफ और संबंधित अधिकारियों को परिवहन चालान, फॉर्म-डी और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच करने का निर्देश दिया गया है। दस्तावेजों में गड़बड़ी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
रॉयल्टी भुगतान को लेकर भी प्रशासन ने स्पष्टता पर जोर दिया है। संबंधित पक्षों से यह विवरण लेने को कहा गया है कि किस खनिज के एवज में कितनी राशि जमा की गई। बीएसएल से जुड़े मामलों में भी खनिज उपयोग और रॉयल्टी भुगतान से संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं।
प्रदूषण पर सिर्फ कागज नहीं, जमीन पर दिखे असर
खनन और औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ी प्रदूषण की शिकायतों की जांच तथ्यपरक तरीके से करने का निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए जा रहे उपायों का असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
प्रदूषण मापन इकाइयों से मिलने वाले आंकड़ों की नियमित समीक्षा करने और उसके आधार पर व्यवस्था में सुधार करने को कहा गया है। प्रभावित खनन क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार सेंसर आधारित निगरानी व्यवस्था मजबूत करने तथा प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित विभाग को मासिक रिपोर्ट देने का भी निर्देश दिया गया।
विस्थापितों की समस्याओं पर भी बनेगी लंबी योजना
खनन परियोजनाओं से जुड़े विस्थापितों की समस्याओं, आंतरिक विधि-व्यवस्था और भविष्य की चुनौतियों को लेकर परियोजनावार दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है। संबंधित परियोजनाओं को अपने क्षेत्र की समस्याओं और संभावित चुनौतियों की पहचान कर उनके समाधान की योजना बनाने का निर्देश दिया गया।
अधिकारियों को कानून की बारीकियों की ट्रेनिंग
बैठक के दूसरे चरण में जिला खनन पदाधिकारी रवि कुमार ने एमएमडीआर अधिनियम और अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। अधिकारियों को शिकायत वाद, प्राथमिकी, शक्तियों के प्रत्यायोजन और कार्रवाई की प्रक्रिया समझाई गई।
इस दौरान धारा 21(4) के तहत तलाशी और जब्ती, धारा 22 के तहत न्यायालय द्वारा संज्ञान और धारा 24 के तहत प्रवेश एवं निरीक्षण से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी गई।
जब्ती की कार्रवाई के दौरान वाहन, खनिज की मात्रा, दस्तावेज और गवाहों से जुड़ी जानकारी स्पष्ट रूप से दर्ज करने तथा जब्ती की प्रति वाहन मालिक या चालक को उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
विभागों के बीच समन्वय पर जोर
उपायुक्त ने कहा कि अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन पर प्रभावी रोक के लिए खनन विभाग, पुलिस, सीआईएसएफ, सीसीएल, बीसीसीएल और अन्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
बैठक में अधिकारियों को अपने अधिकार क्षेत्र और कानूनी शक्तियों को स्पष्ट रूप से समझते हुए एकरूपता के साथ कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। साथ ही परियोजना पदाधिकारियों से जनहित, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कार्यों से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया, बैनर, पोस्टर और होर्डिंग के जरिए आम लोगों तक पहुंचाने को भी कहा गया।
