रांची। झारखंड सरकार में कांग्रेस कोटे के वरिष्ठ मंत्री राधाकृष्ण किशोर की नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। सुरक्षा और सरकारी वाहन विवाद के बाद अब उनके सरकारी गाड़ी को लौटाने की चर्चा तेज है और आगे निजी वाहन से चलेंगे। पहले 16 सुरक्षाकर्मी और तीन वाहन, फिर पूरी Y श्रेणी सुरक्षा, और अब सरकारी गाड़ी — पिछले एक सप्ताह में यह उनका तीसरा बड़ा कदम है।
मंत्री का यह रुख राज्य की गठबंधन सरकार में जेएमएम-कांग्रेस रिश्तों में असहजता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि अब तक इसकी पुष्टि किसी आधिकारिक बयान से नहीं हुई है।
कांग्रेस आलाकमान के सामने बड़ा सवाल
इस पूरे प्रकरण ने कांग्रेस हाईकमान के सामने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है — क्या पार्टी वर्षों से सेवा दे रहे अपने वरिष्ठ नेता राधाकृष्ण किशोर का साथ देगी, या गठबंधन सरकार बचाने की प्राथमिकता में उन्हें नजरअंदाज कर देगी?
यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि जून 2026 में हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को झारखंड में करारी हार का सामना करना पड़ा था। पर्याप्त संख्याबल होने के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को केवल 20 वोट मिले और एनडीए समर्थित निर्दलीय परिमल नाथवानी 28 वोट पाकर जीत गए थे। झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने इसे गठबंधन सहयोगियों से अपेक्षित समर्थन न मिलना बताते हुए इसे “दुर्भाग्यपूर्ण” करार दिया था।
आगे क्या
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस अब भी मंत्री की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेती, तो यह गठबंधन के भीतर असंतोष को और गहरा सकता है। फिलहाल न तो मुख्यमंत्री कार्यालय और न ही जेएमएम या कांग्रेस की ओर से कोई प्रतिक्रिया आई है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि पार्टी अपने पुराने नेता के साथ खड़ी होती है या नहीं।


