रांची। झारखंड में बस व्यवसायियों को परमिट से जुड़ी प्रक्रियाओं में हो रही परेशानियों से राहत दिलाने के लिए रांची स्थित चैंबर भवन में बैठक आयोजित की गई। इसमें बस परमिट के नवीनीकरण, पुरानी बसों की जगह उच्चतर मॉडल की नई बसों को शामिल करने और अस्थायी ठेका परमिट जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाने पर चर्चा हुई। बैठक में इन समस्याओं को लेकर विभागीय सचिव को पत्र लिखकर शीघ्र समाधान का आग्रह किया गया। व्यवसायियों का कहना है कि परमिट संबंधी प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी से उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है और आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
15 अक्टूबर 2026 को हुई इस बैठक में बस व्यवसायियों की व्यावहारिक कठिनाइयों पर विस्तार से चर्चा की गई। चैंबर की ओर से परिवहन विभाग से मांग की गई कि लंबित आवेदनों का जल्द निष्पादन किया जाए और परमिट से संबंधित कामकाज के लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे व्यवसायियों को बार-बार परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े।
जुलाई 2024 से लंबित आवेदनों का जल्द हो निष्पादन
बैठक में बस परमिट के नवीनीकरण के लिए जुलाई 2024 से लंबित आवेदनों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। चैंबर की ओर से कहा गया कि बड़ी संख्या में आवेदन ऑनलाइन माध्यम से जमा किए गए हैं। ऐसे में वाहन पोर्टल पर उपलब्ध दस्तावेजों की जांच कर नियमानुसार परमिट नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
व्यवसायियों का कहना है कि परमिट का समय पर नवीनीकरण परिवहन कारोबार के सुचारु संचालन के लिए जरूरी है। आवेदन लंबित रहने से बस संचालकों को अपने व्यवसाय की योजना बनाने में कठिनाई होती है। इसलिए विभाग को लंबित मामलों की समीक्षा कर उनका शीघ्र निष्पादन करना चाहिए।
चैंबर ने सुझाव दिया कि ऑनलाइन उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर जांच प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जाए, ताकि अनावश्यक देरी से बचा जा सके और पात्र आवेदकों को समय पर राहत मिल सके।
नई बसें खड़ी रहने से हो रहा आर्थिक नुकसान
बैठक में पुरानी बसों को उच्चतर मॉडल की नई बसों से प्रतिस्थापित करने की प्रक्रिया को भी सरल बनाने की मांग की गई। चैंबर की ओर से कहा गया कि कई बार व्यवसायी पुरानी बस के स्थान पर नई बस खरीद लेते हैं, लेकिन परमिट में प्रतिस्थापन की प्रक्रिया पूरी होने में अनावश्यक विलंब होता है।
इसका सीधा असर बस संचालकों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। ऋण लेकर या किस्तों पर खरीदी गई नई बसें प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण खड़ी रह जाती हैं, जबकि उनके लिए किस्तों का भुगतान करना पड़ता है। इससे व्यवसायियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ता है।
चैंबर ने परिवहन विभाग से आग्रह किया कि पहले की तरह निर्धारित समय-सीमा में बसों के प्रतिस्थापन की प्रक्रिया पूरी करने की सुगम व्यवस्था लागू की जाए। इससे व्यवसायियों को राहत मिलने के साथ परिवहन सेवाओं के संचालन में भी सुविधा होगी।
शादी-विवाह और पर्यटन के लिए अस्थायी परमिट आसान करने की मांग
बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा अस्थायी ठेका परमिट जारी करने की प्रक्रिया का रहा। पूजा-पाठ, शादी-विवाह, पर्यटन, मेला और अन्य आयोजनों के दौरान बसों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे अवसरों पर जरूरत के अनुसार एक से 28 दिनों तक के अस्थायी ठेका परमिट जारी किए जाने की व्यवस्था को सरल बनाने पर जोर दिया गया।
चैंबर का कहना है कि इन आयोजनों के लिए बसों की आवश्यकता सीमित अवधि के लिए होती है। ऐसे में परमिट जारी करने की प्रक्रिया आसान और समयबद्ध होने से व्यवसायियों को सुविधा मिलेगी। साथ ही आयोजनों के दौरान परिवहन संबंधी जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।
तुलसी पटेल ने विभागीय सचिव से किया आग्रह
चैंबर अध्यक्ष तुलसी पटेल ने विभागीय सचिव से बस व्यवसायियों की व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने परमिट नवीनीकरण, बसों के प्रतिस्थापन और अस्थायी परमिट जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
बैठक में चैंबर अध्यक्ष तुलसी पटेल, उपाध्यक्ष विकास विजयवर्गीय, सह सचिव अमित शर्मा और कोषाध्यक्ष नवजोत अलंग उपस्थित थे। बैठक के बाद विभागीय सचिव को पत्राचार के माध्यम से समस्याओं से अवगत कराते हुए शीघ्र समाधान की मांग की गई।
अब बस व्यवसायियों की नजर परिवहन विभाग की पहल पर है। यदि लंबित आवेदनों का समय पर निष्पादन होता है और परमिट संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाता है, तो इससे व्यवसायियों को आर्थिक राहत मिलने के साथ राज्य में बस परिवहन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है।
