बोकारो जिले के चास अंचल कार्यालय में लंबे समय से उठ रहे सवालों पर आखिरकार राज्य सरकार ने कार्रवाई की है। भ्रष्टाचार से जुड़ी लगातार शिकायतों और कथित रूप से आपत्तिजनक वायरल ऑडियो के मामले में राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने चास के अंचल अधिकारी (सीओ) सेवा राम साहू को निलंबित कर दिया है। विभाग ने उनके विरुद्ध विभागीय जांच शुरू करने का भी आदेश दिया है। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है।
निलंबन अवधि में रांची मुख्यालय
विभागीय आदेश के अनुसार, निलंबन की अवधि में सेवा राम साहू का मुख्यालय दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के आयुक्त कार्यालय, रांची में निर्धारित किया गया है। इस दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
वायरल ऑडियो बना कार्रवाई का आधार
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान कई अहम साक्ष्य सामने आए हैं। इनमें चास अंचल अधिकारी और जेबीवीएनएल, रांची से जुड़े अनंत कुमार नामक व्यक्ति के बीच बातचीत का एक ऑडियो क्लिप भी शामिल है। विभाग ने इस बातचीत को प्रथम दृष्टया आपत्तिजनक माना और इसी के आधार पर कार्रवाई का निर्णय लिया।
यह स्पष्ट रहे कि ऑडियो की सामग्री और उसकी प्रामाणिकता की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच के निष्कर्षों से ही होगी।
युवक से धक्का-मुक्की का वीडियो भी हुआ था वायरल
चास अंचल कार्यालय से जुड़ा एक और वीडियो हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसमें एक युवक के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट किए जाने का मामला सामने आया था। इसके अलावा, जमीन से जुड़े मामलों में एकपक्षीय कार्रवाई की शिकायतें भी लगातार विभाग तक पहुंच रही थीं। इन्हीं शिकायतों और सामने आए साक्ष्यों के बाद विभाग ने निलंबन की कार्रवाई की।
अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि चास अंचल कार्यालय में बिना पैसे दिए काम कराना मुश्किल था। सरकार की इस कार्रवाई के बाद लोगों ने व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई है।
अंचल कार्यालय राजस्व व्यवस्था की सबसे निचली, लेकिन आम नागरिक के लिए सबसे अहम कड़ी है। दाखिल-खारिज, जमाबंदी और भूमि विवाद जैसे कामों के लिए आम लोगों को इसी दफ्तर के चक्कर काटने पड़ते हैं। ऐसे में यहां कथित अनियमितताओं की शिकायतें सीधे आम जनता के भरोसे पर चोट करती हैं।
आगे क्या?
हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता विभागीय जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगी। सेवा राम साहू का पक्ष अब तक सामने नहीं आया है। प्रशासनिक हलकों में इस निलंबन को अंचल कार्यालयों में कथित अनियमितताओं के खिलाफ बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। अब नजर इस पर रहेगी कि जांच कितनी निष्पक्षता और तेजी से पूरी होती है, और क्या इससे चास अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली में ठोस बदलाव आता है।


