हजारीबाग: झारखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने और मरीजों तक समय पर एंबुलेंस पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं। 108 एंबुलेंस सेवा को आपात स्थिति में मरीजों के लिए अहम माना जाता है, लेकिन इस सेवा को चलाने वाले कर्मचारियों की हालत ही सवालों के घेरे में है। तीन महीने से वेतन नहीं मिला, भुगतान के नाम पर कभी 95 रुपये तो कभी 195 रुपये खाते में आ रहे हैं और कई एंबुलेंस खराब पड़ी हैं।
सोचिए जब कर्मचारियों को उनके वेतन तय समय सिमा पर नहीं मिल रही है और वाहन दुरुस्त नहीं हैं, तो स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों की जमीनी हकीकत क्या है?
हजारीबाग में 108 एंबुलेंस सेवा के कर्मचारियों ने शुक्रवार को अपनी इन्हीं समस्याओं को लेकर कैंडल मार्च निकाला। शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर से निकला मार्च समाहरणालय पहुंचा, जहां कर्मचारियों ने जिला प्रशासन के सामने अपनी परेशानी रखी और तीन महीने के बकाया वेतन के भुगतान की मांग की।
वेतन के लिए भटक रहे कर्मचारी, खाते में आ रहे 95 और 195 रुपये
कैंडल मार्च में शामिल एंबुलेंस चालकों, सहायकों और अन्य कर्मचारियों का आरोप है कि वे सम्मान फाउंडेशन के अंतर्गत काम करते हैं। संस्था पर झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा के संचालन और कर्मचारियों के वेतन भुगतान की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद उन्हें पिछले तीन महीने से नियमित वेतन नहीं मिला है।
कर्मचारियों के मुताबिक, कभी खाते में 95 रुपये भेजे जाते हैं, कभी 195 रुपये और कभी एक-दो हजार रुपये ही मिलते हैं। ऐसे भुगतान से घर चलाना और परिवार की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है।
अब सवाल यह है कि जिन कर्मचारियों से आपात स्थिति में मरीजों की मदद करने की अपेक्षा की जाती है, वे खुद आर्थिक संकट से जूझ रहे हों, तो उनकी समस्याओं का समाधान कौन करेगा?
कहीं टायर खराब, तो कहीं धक्का देकर स्टार्ट करनी पड़ती है एंबुलेंस
कर्मचारियों की परेशानी सिर्फ वेतन तक सीमित नहीं है। उन्होंने एंबुलेंस की खराब हालत पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई वाहन खराब पड़े हैं। कहीं टायर की समस्या है, तो कहीं एंबुलेंस को धक्का देकर स्टार्ट करना पड़ता है।
यह स्थिति मरीजों को समय पर सेवा देने की चुनौती को और बढ़ा रही है। एंबुलेंस सेवा का मकसद आपात स्थिति में मरीज को जल्द चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना है। लेकिन जब वाहन ही दुरुस्त नहीं हों, तो सेवा की उपलब्धता और समयबद्धता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
शिकायत करो तो वेतन की जगह मरीज लाने की बात?
कर्मचारियों का आरोप है कि वेतन को लेकर शिकायत करने पर उन्हें अधिक मरीज लाने की बात कही जाती है। उनका कहना है कि वे अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन समय पर पारिश्रमिक नहीं मिलने से आर्थिक संकट बढ़ता जा रहा है।
ऐसे में सवाल सिर्फ बकाया वेतन का नहीं, बल्कि उन कर्मचारियों की कार्यस्थितियों का भी है, जिनके भरोसे आपातकालीन एंबुलेंस सेवा चलती है। अगर कर्मचारियों को समय पर भुगतान नहीं मिलेगा और वाहनों की मरम्मत भी नहीं होगी, तो व्यवस्था की कमियों का असर अंततः मरीजों पर पड़ने की आशंका बनी रहेगी।
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मंत्री जी, क्या एंबुलेंस कर्मी स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा नहीं हैं?
स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और मरीजों को समय पर सेवा उपलब्ध कराने के दावों के बीच हजारीबाग के एंबुलेंस कर्मचारियों की शिकायतें कई सवाल खड़े कर रही हैं। अगर व्यवस्था पटरी पर है, तो एंबुलेंस कर्मियों को तीन महीने से वेतन के लिए क्यों परेशान होना पड़ रहा है? खराब वाहनों की मरम्मत में देरी क्यों है? और कर्मचारियों की शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
स्वास्थ्य व्यवस्था सिर्फ अस्पतालों, डॉक्टरों और दवाओं तक सीमित नहीं है। आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाने वाले एंबुलेंस कर्मचारी भी इसी व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। ऐसे में उनकी समस्याओं को नजरअंदाज करके स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह दुरुस्त बताना कई सवाल खड़े कर रहा है।
आगामी पर्व-त्योहारों को देखते हुए कर्मचारियों ने जिला प्रशासन से तीन महीने के बकाया वेतन का भुगतान सुनिश्चित कराने और खराब एंबुलेंस की मरम्मत कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि उनकी मांगों पर कार्रवाई होती है या वेतन और वाहन की समस्या के बीच एंबुलेंस सेवा चलाने की चुनौती आगे भी बनी रहती है।
