रांची, 17 अगस्त। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी यात्रा के अवसर पर विश्व संवाद केंद्र, रांची के तत्वावधान में ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता’ पुस्तक पर विशेष परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में महिला सहभागिता, भारतीय परिवार व्यवस्था, सामाजिक संस्कार, राष्ट्र निर्माण और बदलती सामाजिक परिस्थितियों में महिलाओं की भूमिका जैसे विषयों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय सह कार्यवाहिका सुनीता इंदुलकर, झारखंड प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा, उत्तर पूर्व क्षेत्र के संपर्क प्रमुख अनिल ठाकुर, प्रांत सह संघचालक अशोक श्रीवास्तव और पुस्तक की लेखिका डॉ. शोभा विजेंद्र सहित संघ एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े पदाधिकारी, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
महिला सहभागिता और संघ पर विमर्श
पुस्तक की लेखिका डॉ. शोभा विजेंद्र ने कहा कि सोशल मीडिया और दूसरे माध्यमों के जरिए अलग-अलग तरह के नैरेटिव तेजी से समाज तक पहुंच रहे हैं। ऐसे में किसी भी धारणा को स्वीकार करने से पहले उसके तथ्य और स्रोत को समझना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता’ में संघ और महिलाओं की भूमिका को लेकर प्रचलित धारणाओं का अध्ययन करने का प्रयास किया गया है। पुस्तक के लिए उन्होंने देशभर की करीब 100 महिलाओं से संवाद किया, जिनमें से 34 महिलाओं के अनुभवों को पुस्तक में शामिल किया गया है। पुस्तक को तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है, जिसमें व्यक्तिगत अनुभव, संघ के सरसंघचालकों के महिला एवं राष्ट्र निर्माण से जुड़े विचार तथा संघ विचार से जुड़ी महिलाओं के अनुभव शामिल हैं।
डॉ. विजेंद्र ने कहा कि महिला सहभागिता को केवल किसी संगठन की गतिविधियों तक सीमित नहीं किया जा सकता। परिवार, शिक्षा, सामाजिक चेतना और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका को व्यापक रूप से देखने की आवश्यकता है। उन्होंने परिवार और बच्चों के संस्कार को भी समाज निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताया।
परिवार और समाज में महिलाओं की भूमिका पर जोर
झारखंड प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा ने कहा कि संघ की शताब्दी यात्रा में महिलाओं की सहभागिता महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने राष्ट्र सेविका समिति सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के माध्यम से महिलाओं की भूमिका का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि परिवार सामाजिक संस्कार और राष्ट्र निर्माण की बुनियादी इकाई है। वर्तमान समय में परिवार को मजबूत करने और नई पीढ़ी को बेहतर संस्कार देने की आवश्यकता है।
राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय सह कार्यवाहिका सुनीता इंदुलकर ने कहा कि भारतीय परंपरा में महिला को परिवार के साथ-साथ समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। उन्होंने राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना और महिलाओं के संगठनात्मक कार्यों में सहभागिता का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में महिलाओं और पुरुषों दोनों की प्रभावी सहभागिता जरूरी है। उनके अनुसार महिलाओं की भूमिका केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है और विभिन्न सामाजिक संगठनों के कार्यों में महिलाएं अलग-अलग जिम्मेदारियां निभा रही हैं।
बाबूलाल मरांडी ने भारतीय विचार परंपरा का किया उल्लेख
कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भारतीय समाज और हिंदुत्व की अवधारणा पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारतीय दृष्टिकोण को केवल उपासना पद्धति के आधार पर नहीं समझा जा सकता। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ जैसी अवधारणाओं का उल्लेख करते हुए भारतीय विचार परंपरा की व्यापकता पर जोर दिया।
मरांडी ने कहा कि भारत की विविधता उसकी विशेषता है और समाज को साथ लेकर चलना भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहा है। उन्होंने पुस्तक को महत्वपूर्ण बताते हुए इसके अध्ययन की बात कही।
राज्यपाल बोले- निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी जरूरी
मुख्य वक्ता राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता’ के माध्यम से संघ की भूमिका और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं के योगदान को समझने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका को केवल परिवार तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। महिलाएं आज विज्ञान, शिक्षा, प्रशासन, उद्योग, खेल, सामाजिक सेवा और सार्वजनिक जीवन समेत विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भूमिका निभा रही हैं।
राज्यपाल ने कहा कि महिलाओं की सहभागिता केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि निर्णय प्रक्रिया में उनकी प्रभावी भागीदारी भी सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया और महिला आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन की बात कही।
उन्होंने पंचायत और स्थानीय निकायों में महिलाओं की भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं ने प्रशासनिक जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने की क्षमता साबित की है।
विकसित भारत 2047 में महिला सहभागिता को बताया जरूरी
राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में नारी शक्ति की सक्रिय भूमिका जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षित और आत्मनिर्भर महिला परिवार के साथ-साथ समाज और आने वाली पीढ़ी को भी प्रभावित करती है।
उन्होंने पुस्तक की लेखिका को बधाई देते हुए विश्वास जताया कि पुस्तक शोधार्थियों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं के लिए उपयोगी साबित होगी। झारखंड के संदर्भ में उन्होंने कहा कि राज्य की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर मिलना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने महिला सहभागिता को परिवार, शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, सेवा, नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया जैसे व्यापक क्षेत्रों से जोड़ते हुए चर्चा की। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की सक्रिय सहभागिता और परिवार एवं सामाजिक मूल्यों को मजबूत करने के संकल्प के साथ हुआ।



