Thursday, October 15

रांची: JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले के बाद चयनित अभ्यर्थियों का विरोध तेज हो गया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में CGL पास अभ्यर्थी झारखंड मंत्रालय यानी प्रोजेक्ट भवन के बाहर जुटे। कल तक इसी भवन में सरकारी कर्मचारी के तौर पर काम कर रहे कई चयनित अभ्यर्थी आज सड़क पर खड़े होकर सरकार के फैसले का विरोध करते नजर आए।

प्रोजेक्ट भवन का गेट बंद होने के बाद बाहर जुटे अभ्यर्थियों में काफी नाराजगी देखने को मिली। उनका कहना है कि उन्होंने लंबी चयन प्रक्रिया और कड़ी मेहनत के बाद JSSC-CGL परीक्षा पास की थी। नियुक्ति मिलने के बाद वे अलग-अलग विभागों में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। लेकिन परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले के बाद उनके सामने नौकरी और भविष्य को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

केंद्र और दूसरी नौकरियां छोड़कर झारखंड आए थे अभ्यर्थी

प्रदर्शन कर रहे चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि कई युवाओं ने केंद्र सरकार और दूसरे विभागों की नौकरी छोड़कर झारखंड में सेवा करने का फैसला किया था। नियुक्ति के बाद वे नियमित रूप से अपनी ड्यूटी कर रहे थे।

अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि अब उनका करियर सुरक्षित है, लेकिन परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले ने अचानक पूरी स्थिति बदल दी।

‘बिना हमारा पक्ष सुने फैसला क्यों?’

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि परीक्षा रद्द करने से पहले चयनित अभ्यर्थियों का पक्ष नहीं सुना गया। उनका कहना है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

अभ्यर्थियों का सवाल है कि यदि उन्होंने किसी तरह की अनियमितता नहीं की है तो उन्हें सामूहिक रूप से इसका खामियाजा क्यों भुगतना पड़े?

सचिवालय से सड़क तक पहुंची लड़ाई

कल तक जिन युवाओं की पहचान सचिवालय कर्मियों के रूप में थी, वे अब अपनी नौकरी बचाने के लिए प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि एक ओर उन्होंने वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की, दूसरी ओर नियुक्ति के बाद सरकारी सेवा में योगदान दिया। ऐसे में परीक्षा रद्द होने से उनका पूरा भविष्य अनिश्चित हो गया है।

सरकार से सीधे बातचीत की मांग

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने सरकार से उनके साथ सीधे संवाद करने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार के वरिष्ठ अधिकारी या जनप्रतिनिधि उनके प्रतिनिधियों से बातचीत करें और परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले तथा उनकी नियुक्ति को लेकर स्थिति स्पष्ट करें।

अभ्यर्थी चाहते हैं कि जांच हो, लेकिन जांच के नाम पर उन सभी लोगों की नौकरी प्रभावित न हो, जिन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास कर नियुक्ति हासिल की है।

फिलहाल प्रोजेक्ट भवन के बाहर चयनित अभ्यर्थियों का विरोध जारी है। एक तरफ परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच और कार्रवाई की मांग कर रहे आंदोलनकारी छात्र हैं, तो दूसरी ओर उसी परीक्षा से चयनित होकर नौकरी कर चुके अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति बचाने के लिए सड़क पर उतर आए हैं। अब सरकार के अगले कदम पर सभी की नजर है।

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