Tuesday, October 13

रामगढ़/ रांची : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन को गुरुवार को उनके पैतृक गांव नेमरा में अंतिम विदाई दी गई। अंतिम संस्कार के दौरान नेमरा गांव में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। बड़ी संख्या में ग्रामीण, पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक और शुभचिंतक अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। पूरे गांव में शोक का माहौल रहा और लोगों ने नम आंखों से रूपी सोरेन को श्रद्धांजलि दी।

उसी जगह हुआ अंतिम संस्कार, जहां 14 महीने पहले शिबू सोरेन को दी गई थी अंतिम विदाई

नेमरा गांव का वह स्थान सोरेन परिवार के लिए भावनात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। करीब 14 महीने पहले इसी जगह पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पिता और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता शिबू सोरेन के अंतिम संस्कार से जुड़ी पारिवारिक स्मृतियां रही हैं। अब बाद  जगह पर सोरेन परिवार की मातृशक्ति रूपी सोरेन को अंतिम विदाई दी गई।

अंतिम संस्कार के दौरान नेमरा में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने माहौल को और भावुक बना दिया। ग्रामीणों के साथ झामुमो समर्थक और बड़ी संख्या में शुभचिंतक भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए।

अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब

रूपी सोरेन के निधन की खबर के बाद से ही नेमरा में लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। अंतिम संस्कार के समय तक गांव में बड़ी संख्या में लोग जुट चुके थे। लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना जताई और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

हेमंत सोरेन अपनी मां के अंतिम संस्कार में मौजूद रहे। इस दौरान परिवार और समर्थकों के बीच गमगीन माहौल रहा। बड़ी संख्या में लोगों ने मुख्यमंत्री और उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

सिंगापुर में इलाज के कारण नहीं पहुंच सके बसंत सोरेन

रूपी सोरेन के अंतिम संस्कार में हेमंत सोरेन के भाई और झामुमो नेता बसंत सोरेन मौजूद नहीं हो सके। जानकारी के अनुसार बसंत सोरेन इस समय सिंगापुर में इलाज करा रहे हैं। मां के निधन की खबर के बाद उनके रांची लौटने की चर्चा थी, लेकिन स्वास्थ्य और इलाज से जुड़ी परिस्थितियों के कारण वह नेमरा पहुंच नहीं सके।

सोरेन परिवार के लिए बेहद भावुक दिन

नेमरा गांव सिर्फ सोरेन परिवार का पैतृक गांव ही नहीं, बल्कि झारखंड आंदोलन और सोरेन परिवार की कई महत्वपूर्ण यादों से जुड़ा हुआ है। इसी गांव में आज बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बीच रूपी सोरेन को अंतिम विदाई दी गई। 14 महीने बाद उसी स्थान पर एक बार फिर सोरेन परिवार के किसी सदस्य के अंतिम संस्कार ने पुराने दुख और यादों को ताजा कर दिया।

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