रिम्स में इलाज के दौरान मौत के बाद उठे सवाल, सरकार ने दो सदस्यीय कमेटी बनाई; एंबुलेंस से लेकर पुलिस कार्रवाई और इलाज में देरी तक की होगी जांच
झारखंड के गुमला जिले की 13 वर्षीय आदिवासी छात्रा की रिम्स, रांची में इलाज के दौरान हुई मौत के मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रा के परिजनों ने इलाज में कथित देरी और लापरवाही के आरोप लगाए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब राज्य सरकार ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने का फैसला लिया है। इसके लिए दो सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है।
सरकार की ओर से गठित समिति में आईएएस अधिकारी नेहा अरोड़ा और आईपीएस अधिकारी सरोजिनी लकड़ा शामिल हैं। समिति को मामले के सभी पहलुओं की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपने का निर्देश दिया गया है। जांच के लिए समिति को महज तीन दिनों का समय दिया गया है।
24 सितंबर की घटना से शुरू होगी पड़ताल
परिजनों के मुताबिक 24 सितंबर की शाम कुछ अज्ञात लोग छात्रा को अपने साथ ले गए थे। बाद में छात्रा अचेत अवस्था में मिली। इसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। छात्रा को अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों से होते हुए रिम्स, रांची लाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
परिजनों ने इस पूरे घटनाक्रम में इलाज में देरी और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को लेकर सवाल उठाए हैं। अब जांच समिति यह पता लगाएगी कि छात्रा के अस्पताल पहुंचने से लेकर रिम्स में इलाज मिलने तक किस स्तर पर क्या प्रक्रिया अपनाई गई और कहीं अनावश्यक देरी तो नहीं हुई।
कोलेबिरा से रिम्स तक हर चरण की होगी जांच
जांच समिति छात्रा के इलाज से जुड़े पूरे मेडिकल ट्रेल की समीक्षा करेगी। इसमें कोलेबिरा, सिमडेगा, गुमला और रिम्स में मिले इलाज और चिकित्सा सुविधाओं की पड़ताल की जाएगी।
समिति यह देखेगी कि छात्रा को किस हालत में अस्पताल लाया गया था, डॉक्टरों ने क्या उपचार दिया, उसे कब रेफर किया गया और एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक पहुंचने में कितना समय लगा।
इसके साथ ही एंबुलेंस सेवा को लेकर भी जांच की जाएगी। एंबुलेंस की मांग कब की गई, उसे उपलब्ध कराने में कितना समय लगा और मरीज को समय पर अगले अस्पताल तक पहुंचाया गया या नहीं, इन सभी बिंदुओं की जांच रिकॉर्ड के आधार पर की जाएगी।
पुलिस की भूमिका भी जांच के दायरे में
मामले में पुलिस की कार्रवाई को भी उच्चस्तरीय जांच समिति के दायरे में रखा गया है। समिति यह देखेगी कि घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने क्या कदम उठाए और प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया में किसी तरह की देरी या लापरवाही हुई या नहीं।
पुलिस से जुड़े दस्तावेज, प्राथमिकी और मामले में अब तक की गई कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी। जांच में यदि किसी स्तर पर निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आती है, तो समिति अपनी रिपोर्ट में कार्रवाई की अनुशंसा कर सकती है।
POCSO के प्रावधानों के पालन की भी होगी समीक्षा
छात्रा नाबालिग थी और मामले में यौन अपराध से जुड़े आरोप सामने आए हैं। ऐसे में जांच समिति POCSO Act के तहत निर्धारित प्रावधानों और यौन अपराध की पीड़िता के उपचार से संबंधित सरकारी दिशा-निर्देशों के पालन की भी जांच करेगी।
समिति यह भी देखेगी कि छात्रा को इलाज के दौरान आवश्यक चिकित्सा सहायता, सुरक्षा और निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं या नहीं।
मेडिकल रिकॉर्ड और पोस्टमार्टम रिपोर्ट खंगालेगी समिति
जांच के दौरान छात्रा के सभी मेडिकल रिकॉर्ड, अस्पतालों से जुड़े दस्तावेज, पुलिस रिकॉर्ड और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की गहन समीक्षा की जाएगी। इन दस्तावेजों के आधार पर छात्रा की चिकित्सकीय स्थिति और इलाज के दौरान हुई घटनाओं का क्रम समझने की कोशिश की जाएगी।
सरकार ने समिति को यह भी निर्देश दिया है कि यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई को लेकर स्पष्ट अनुशंसा की जाए।
तीन दिन में गृह विभाग को देनी होगी रिपोर्ट
इस संवेदनशील मामले में जांच समिति को तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपनी है। रिपोर्ट में घटना से जुड़े तथ्यों के साथ इलाज, एंबुलेंस सेवा, पुलिस कार्रवाई और निर्धारित नियमों के पालन से संबंधित निष्कर्ष शामिल होंगे।
फिलहाल इस मामले में सबसे अहम नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि छात्रा के इलाज और पुलिस कार्रवाई के दौरान कहीं लापरवाही या प्रक्रिया संबंधी चूक हुई थी या नहीं। साथ ही, यदि किसी स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है तो संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई का रास्ता भी साफ होगा।
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