अंधविश्वास के नाम पर आखिर कब तक महिलाओं को प्रताड़ित किया जायेगा? डायन बताकर महिलाओं को प्रताड़ित करने और हिंसा का शिकार बनाने की घटनाओं के बीच गढ़वा की एक महिला पर खौलता पानी डालकर झुलसा देने का मामला सामने आया है। घटना ने एक बार फिर समाज और प्रशासन के सामने सवाल खड़ा कर दिया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लिया है और गढ़वा के जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
आयोग ने दोनों अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट में घटना की जांच की वर्तमान स्थिति, आरोपियों के खिलाफ की गई कार्रवाई, पीड़िता की स्वास्थ्य स्थिति और उसे उपलब्ध कराए गए इलाज व सहायता का विवरण मांगा गया है। साथ ही, पीड़िता को किसी तरह की आर्थिक सहायता या मुआवजा दिए जाने की जानकारी भी आयोग ने तलब की है।
अंधविश्वास के नाम पर हिंसा, आखिर कब तक?
यह मामला सिर्फ एक महिला के साथ हुई हिंसा तक सीमित नहीं है। यह उस सोच पर सवाल खड़ा करता है, जिसमें आज भी बीमारी, अनहोनी या किसी पारिवारिक परेशानी का ठीकरा महिलाओं के सिर फोड़ दिया जाता है। आखिर कब तक अंधविश्वास के नाम पर महिलाओं को डराया, अपमानित और प्रताड़ित किया जाता रहेगा?
NHRC ने मांगा जवाब, अब कार्रवाई पर नजर
NHRC ने जिला प्रशासन और पुलिस से मामले में अब तक की गई कार्रवाई के साथ-साथ पीड़िता को मिले उपचार और राहत की जानकारी भी मांगी है। अब यह देखना अहम होगा कि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ क्या कदम उठाए हैं और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन की ओर से क्या ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि कानून और जागरूकता के बावजूद अगर अंधविश्वास के नाम पर महिलाओं को हिंसा का शिकार बनाया जाता रहा, तो ऐसी घटनाओं पर स्थायी रोक आखिर कैसे लगेगी?
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