Wednesday, October 14

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​झारखंड सीआईडी ने सभी जिलों के कप्तानों से एक सप्ताह के भीतर मांगी एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स की रिपोर्ट
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रांची: देश में लापता बच्चों और मानव तस्करी (Human Trafficking) के बढ़ते मामलों पर  सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एक उच्च स्तरीय राष्ट्रीय समिति देश भर में इन गंभीर अपराधों से निपटने और लापता बच्चों की त्वरित बरामदगी के लिए एक एकीकृत मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure – SOP) तैयार कर रही है। यह पूरी कवायद सर्वोच्च न्यायालय में लंबित वाद ‘जी. गणेश बनाम तमिलनाडु राज्य व अन्य’ (SLP Crl. No. 11263/2025) के आदेशों के आलोक में की जा रही है।
​इस राष्ट्रीय स्तर के एसओपी को अंतिम रूप देने और राज्यों से जमीनी इनपुट व सुझाव लेने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के तत्वावधान में क्षेत्रीय परामर्श (Zonal Consultation) की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसी क्रम में पूर्वी क्षेत्र (Eastern Zone) की एक महत्वपूर्ण बैठक आगामी 25 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली में (सुबह 11:00 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक) आयोजित की जा रही है। इस बैठक में बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) और महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी व नोडल अफसर व्यक्तिगत रूप से हिस्सा लेंगे।

​सुप्रीम कोर्ट की समिति ने राज्यों से इन 7 बिंदुओं पर मांगी विस्तृत रिपोर्ट:
​अदालती आदेश का अनुपालन: सुप्रीम कोर्ट द्वारा 22 मई, 2026 को जारी निर्देशों की व्यापक अनुपालन रिपोर्ट (ताकि 5 अगस्त 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में इसे कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके)।

​लापता बच्चों का पोर्टल: क्या राज्यों के पास CCTNS और मिशन वात्सल्य के अलावा कोई समर्पित राज्य-स्तरीय पोर्टल है? यदि हाँ, तो उसकी सफलता दर की जानकारी।
​एएचटीयू (AHTU) की स्थिति: राज्यों में कार्यात्मक एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स की संख्या, कर्मियों की तैनाती, और पिछले दो वर्षों (2024, 2025 और मई 2026 तक) में दर्ज मामलों एवं बरामद बच्चों का डेटा।
​बाल गृहों (CCIs) की मैपिंग: पंजीकृत और गैर-पंजीकृत सरकारी व निजी बाल गृहों की संख्या तथा उनमें रह रहे लापता/बरामद बच्चों का पूरा विवरण।
​जिला बाल संरक्षण इकाइयाँ (DCPUs) और टास्क फोर्स: जिलों में बाल संरक्षण इकाइयों और जिला टास्क फोर्स (DTF) की कार्यप्रणाली और पिछले दो वर्षों के कार्यों का लेखा-जोखा।
​नवाचार (Innovations): तस्करी रोकने और बच्चों को रेस्क्यू करने में राज्यों द्वारा अपनाई गई बेस्ट प्रैक्टिसेज (Best Practices) और तकनीकें।
​चुनौतियां और सुझाव: अंतर-विभागीय समन्वय में आ रही व्यावहारिक दिक्कतें और कार्यप्रणाली सुधारने के सुझाव।
​झारखंड पुलिस मुख्यालय अलर्ट, सीआईडी ने जिलों को जारी किया अल्टीमेटम
​केंद्रीय गृह मंत्रालय के इस कड़े निर्देश के बाद झारखंड पुलिस का अपराध अनुसंधान विभाग (CID) पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। सीआईडी (CID) के पुलिस अधीक्षक ने रांची मुख्यालय से राज्य के सभी वरीय पुलिस अधीक्षकों (SSPs), पुलिस अधीक्षकों (SPs) और रेल पुलिस अधीक्षकों को एक अति-महत्वपूर्ण पत्र (ज्ञापांक 75/रामा०अप०) जारी किया है।
​सीआईडी ने सभी जिला कप्तानों को सख्त हिदायत दी है कि वे एक निर्धारित ‘विहित प्रपत्र’ में अपने-अपने जिलों की एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स (AHTU) में स्वीकृत व तैनात स्टाफ (इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर, एएसआई, कांस्टेबल), वर्ष 2024, 2025 और मई 2026 तक दर्ज चाइल्ड तस्करी के मामलों और रिकवर किए गए बच्चों की संख्या का पूरा आंकड़ा एक सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से मुख्यालय को उपलब्ध कराएं।
​सीआईडी मुख्यालय ने इस कार्य को ‘उच्च प्राथमिकता’ देने का निर्देश दिया है ताकि दिल्ली में होने वाली इस राष्ट्रीय स्तर की बैठक में झारखंड राज्य का सही, सटीक और प्रभावी पक्ष रखा जा सके और राष्ट्रीय एसओपी में राज्य की आवश्यकताओं को शामिल कराया जा सके।
​विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की इस प्रत्यक्ष निगरानी और गृह मंत्रालय की इस पहल के बाद पूरे देश में मानव तस्करी के अंतर-राज्यीय नेटवर्क को तोड़ने और लापता बच्चों को उनके परिवारों से मिलाने के प्रयासों में एक क्रांतिकारी बदलाव आएगा।

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SURBHI SHIPRA is a news editor, content writer , and graphic designer with experience in digital journalism and online media . she specializes in editing news ,articles, content writing, fact-checking , and creating engaging digital content . Along with editorial work, She designs eye-catching graphic and YouTube thumbnails . She is committed to delivering accurate, informative , and reader- focused content with creativity and professionalism. currently working as a journalist at Jharkhand Digital

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