रांची: कानून की पढ़ाई सिर्फ किताबों और कक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की जमीनी समस्याओं को समझना भी इसका अहम हिस्सा है। इसी उद्देश्य से नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (एनयूएसआरएल), रांची के करीब 64 विद्यार्थियों ने रांची जिले के रातू प्रखंड स्थित चितरकोटा गांव का क्षेत्रीय दौरा किया। यहां विद्यार्थियों ने ग्रामीण जीवन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति को समझने का प्रयास किया।
14 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह दौरा ग्रामीण जीवन, सामाजिक परिस्थितियों, कानूनी प्रावधानों और सरकारी नीतियों के जमीनी प्रभाव को समझने के लिए संचालित शोध परियोजना का हिस्सा था। विद्यार्थियों का मार्गदर्शन विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. जे. के. पटनायक ने किया।
रोजगार के लिए पलायन, शिक्षा और स्वास्थ्य भी बड़ी चिंता
क्षेत्रीय अध्ययन के दौरान विद्यार्थियों ने ग्रामीण परिवारों से बातचीत कर उनकी आजीविका और रोजमर्रा की समस्याओं को समझा। अध्ययन में सामने आया कि गांव के कई परिवार कृषि और वन आधारित गतिविधियों पर निर्भर हैं। नियमित रोजगार के सीमित अवसरों के कारण युवाओं को काम की तलाश में पलायन करना पड़ता है। इसके अलावा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण चिंता के विषय रहे।
विद्यार्थियों ने साक्षात्कार, केस स्टडी और प्रत्यक्ष अवलोकन के माध्यम से जानकारी जुटाई। उन्होंने ग्रामीण परिवारों, मुखिया, पारंपरिक ग्राम प्रमुखों, आशा कार्यकर्ताओं और वार्ड सदस्यों से बातचीत कर स्थानीय प्रशासन और सरकारी सेवाओं की स्थिति को समझने की कोशिश की।
पेसा कानून और ग्राम सभा की भूमिका को समझा
चितरकोटा गांव पाली ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है और अनुसूचित क्षेत्र में स्थित है। यहां विद्यार्थियों ने पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 यानी पेसा कानून के संदर्भ में स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था को समझा।
मुखिया और पारंपरिक ग्राम प्रमुखों के साथ चर्चा के दौरान विद्यार्थियों ने जाना कि निर्वाचित पंचायती राज संस्थाएं और पारंपरिक नेतृत्व संरचनाएं किस प्रकार साथ-साथ काम करती हैं। उन्होंने ग्राम पंचायत, ग्राम सभा और स्थानीय प्रशासन की भूमिका का भी अध्ययन किया।
आंगनबाड़ी और सरकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति देखी
दौरे के दौरान विद्यार्थियों ने आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण कर उसकी कार्यप्रणाली, पोषण संबंधी सेवाओं और मध्याह्न भोजन योजना के क्रियान्वयन की जानकारी ली। आशा कार्यकर्ताओं और वार्ड सदस्यों से बातचीत के जरिए ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं तथा स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिला।
सरकारी कल्याणकारी योजनाओं को लेकर ग्रामीणों के अनुभव अलग-अलग रहे। कुछ योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचा है, लेकिन जागरूकता की कमी और प्रक्रियागत देरी के कारण पात्र लाभार्थियों को कई बार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
किताबों से आगे ग्रामीण जीवन को समझने का मिला मौका
इस क्षेत्रीय अध्ययन ने विद्यार्थियों को कक्षा में पढ़े गए सिद्धांतों को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने का अवसर दिया। ग्रामीणों से बातचीत और समस्याओं के प्रत्यक्ष अवलोकन के जरिए उन्होंने कानून, शासन व्यवस्था और समाज के बीच संबंधों को समझा। साथ ही, उन्हें साक्षात्कार लेने, तथ्यों का दस्तावेजीकरण करने और केस स्टडी तैयार करने का व्यावहारिक अनुभव भी मिला।
डॉ. जे. के. पटनायक ने कानूनी शिक्षा में क्षेत्रीय अध्ययन के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे अभ्यास विद्यार्थियों को कानून, शासन व्यवस्था और समाज के बीच संबंधों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं। उन्होंने बताया कि दौरे के दौरान जुटाए गए तथ्यों और अवलोकनों को क्षेत्रीय रिपोर्ट तथा शोध कार्य के रूप में संकलित किया जाएगा।
ग्रामीण विकास के लिए विद्यार्थियों ने दिए सुझाव
दौरे के समापन पर विद्यार्थियों ने अपने अनुभवों और निष्कर्षों पर चर्चा की। उन्होंने सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने, पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने, ग्राम सभा में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने और युवाओं के लिए शिक्षा के अवसर बढ़ाने जैसे सुझाव दिए।
विद्यार्थियों ने मनरेगा, आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया। इस अध्ययन से प्राप्त निष्कर्षों को शोध रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा, जिनके माध्यम से स्थानीय समस्याओं और ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों को संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखने में मदद मिल सकती है।
