Tuesday, October 13

रांची: झारखंड में खनिज संपदा से जुड़े नए कानून को लेकर सियासी विरोध तेज हो गया है। केंद्र सरकार के खनिज खान एवं खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन अधिनियम 2026 के खिलाफ सोमवार को रांची में वाम दलों ने सड़क पर उतरकर विरोध जताया। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रूप से अल्बर्ट एक्का चौक पर प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का पुतला दहन किया। इस दौरान “काला कानून वापस लो” और “जल-जंगल-जमीन बचाओ” जैसे नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कानून को वापस लेने की मांग की।

वाम दलों का कहना है कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और ऐसे में खनन से जुड़े कानून में बदलाव का सीधा असर राज्य और यहां के लोगों पर पड़ सकता है। पार्टी नेताओं ने केंद्र सरकार से कानून पर दोबारा विचार करने की मांग की है।

राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग

वाम दलों ने राष्ट्रपति से अपील की है कि विधेयक को तत्काल पुनर्विचार के लिए संसद की स्थायी समिति के पास भेजा जाए। नेताओं के मुताबिक, कानून के प्रावधानों पर व्यापक चर्चा और उसके संभावित प्रभावों का आकलन जरूरी है।

साथ ही वाम दलों ने झारखंड सरकार से केंद्र पर दबाव बनाने और राज्य में इस कानून को लागू नहीं होने देने की मांग की है।

15 दिन बाद बड़े आंदोलन की चेतावनी

प्रदर्शन के दौरान वाम दलों ने केंद्र सरकार को 15 दिन का समय देते हुए आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी। नेताओं ने कहा कि यदि सरकार इस अवधि में अपने फैसले से पीछे नहीं हटती है, तो वाम दल मिलकर पूरे झारखंड में चक्का जाम और राजभवन घेराव करेंगे।

वाम दलों ने साफ किया कि खनिज संसाधनों और राज्य के हितों से जुड़े इस मुद्दे पर उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।

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