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झारखंड में NHAI के अधिकांश प्रोजेक्ट या तो जमीन अधिग्रहण के मामले में फंस जा रहें हैं या राज्य सरकार के साथ समन्वय नहीं बन पाने के कारण सड़क NH निर्माण की प्रकिया बाधित हो जा रही है. NHAI ने इसका ऐसा समाधान सोचा है जो देशभर में झारखंड की भद्द पिटवाने वाला साबित हो सकता है. जानकारों की मानें तो NHAI जल्द ही राज्य के नेशनल हाइवे पर झारखंड की विफलताओं के पोस्टर्स लगाने की तैयारी में है. इन पोस्टर्स में NHAI की सभी परियोजनाओं का उल्लेख रहेगा साथ ही उन परियोजनाओं को किन कारणों से पूरा नहीं किया जा सका या क्यों कुछ परियाजनाएं अधर में लटकी हैं इसका पूरा ब्यौरा लिखा होगा. झारखंड में रहने वाले लोगों के साथ साथ देश के किसी भी हिस्से से झारखंड के नेशनल हाइवे पर यात्रा करने वाले लोग इन पोस्टर्स को देखेंगे और राज्य सरकार की कार्यशैली पर नए सवाल खड़े होते रहेंगे. पोस्टर्स लगाने को लेकर तैयारियां शुरु हो गयी हैं और जल्द ही यह राजधानी समेत अन्य जिलों की सड़कों पर नजर आने लगेंगी.
CRPF और CISF की तर्ज पर CHPF (सेन्ट्रल हाइवे प्रोटेक्शन फोर्स) की कवायद
देश के नेशनल हाइवे की सुरक्षा और रखरखाव पर लगातार नजर बनाए रखने के लिए CRPF और CISF की तर्ज पर CHPF (सेन्ट्रल हाइवे प्रोटेक्शन फोर्स) के गठन की कवायद भी शुरु हो गयी है. यह फोर्स विशेष तौर पर हाइवे पर चलने वाले लोगों की सुरक्षा के साथ साथ हाइवे पर होने वाली दुर्घटनाओं, सड़क जाम, क्षतिग्रस्त वाहन को हटवाने, सड़क की सुविधाओं समेत अन्य व्यवस्थाओं पर काम करेगी. इसको लेकर सभी प्रमुख पदाधिकारियों से उनके क्षेत्र की स्थिति और फोर्स की क्षमता पर विस्तृत व्यौरा मांगा जा रहा है. झारखंड की 10 महत्वपूर्ण परियाजनाओं को लेकर मैराथन बैठकों का दौर चल रहा है.
100 करोड़ का लगा चुके हैं फाइन
एक तरफ MMDR बिल के खिलाफ राज्य के सत्तारुढ़ दल विरोध करने की तैयारी कर रहे हैं कि झारखंड का हक मारा जा रहा है, राज्य सरकार का आरोप है कि केन्द्र में बैठी NDA सरकार झारखंड को कंगाल बनाने का काम कर रही है. इधर, दूसरी तरफ ताजा जानकारियों के अनुसार (MORTH) ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार के पथ निर्माण विभाग और उसके इंजीनियर सही ढंग से कार्य नहीं कर रहे. अनुबंध की शर्तों का सही पालन नहीं हो रहा और संवेदकों को समय पर भुगतान नहीं होने के कारण मामला हाईकोर्ट तक पहुंच जा रहा है. वेबजह केंद्र सरकार को अतिरिक्त राशि का भुगतान करना पड़ जाता है. इसके लिए केंद्र सरकार ने राज्य के पथ निर्माण विभाग पर 100 करोड़ का फाइन लगाया है. पहले ही कर्ज से जूझते झारखंड के लिए यह फाइन काफी बड़ी चुनौती है.
15 हजार करोड़ के सड़क र्निमाण की मिली थी स्वीकृति, 10 हजार करोड़ की हो गयी अस्वीकृत
केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने झारखंड की लगभग 10 हजार करोड़ की सड़क परियोजनाओं को अस्वीकृत (De-sanction) कर दिया है। केंद्र सरकार ने समय पर जमीन का अधिग्रहण नहीं किए जाने, परियोजना निर्माण में राज्य सरकार की शिथिलता बरतने और समय पर अन्य तकनीकी स्वीकृति में विलंब को इसका आधार बनाया है. इतना ही नहीं सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने विभिन्न सड़क परियोजनाओं में हुई लापरवाही, भुगतान में देरी और कई अन्य शर्तों का पालन नहीं करने के लिए राज्य सरकार के पथ निर्माण विभाग पर लगभग 100 करोड़ का दंड भी लगाया है. यहां मालूम हो कि केंद्र सरकार के MORTH ने राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ी लगभग 15 हजार करोड़ की परियोजनाओं को स्वीकृति दी थी, उसमें अब 10 हजार करोड़ की सड़क परियोजनाओं को अस्वीकृत किया गया है.
इन सड़कों पर गिरी गाज
हाटगम्हरिया-नोवामुंडी-बराइबुरु सड़क, हजारीबाग-बगोदर सड़क व अन्य सड़क के निर्माण को अस्वीकृत कर दिया गया है. इसके अलावा चाईबासा-हाटगम्हरिया एनएच पर 6 नंबर आरओबी के निर्माण को भी अस्वीकृत कर दिया गया है. इसमें हाटगम्हरिया-नोवामुंडी-बराइबुरु, वही सड़क है जिसके निर्माण को लेकर राज्य में सरकार बदल गयी थी. जानकारी के अनुसार इस सड़क के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण का काम दो साल पहले आवंटित किया गया था, लेकिन समय पर जमीन का अधिग्रहण, फॉरेस्ट क्लियरेंस व अन्य तकनीकी स्वीकृतियों के नहीं मिलने के कारण यह सड़क भी लटक गयी.


