बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें चेक बाउंस से जुड़े मामलों में एक बार फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे अभिनेता को शीर्ष अदालत ने फिलहाल आखिरी मौका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को दो हफ्ते के भीतर भुगतान का ठोस प्रस्ताव पेश करने और रजिस्ट्री में 2 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान पिछले आदेशों का पालन नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। हालांकि, अदालत ने राजपाल यादव को फिलहाल राहत देते हुए सरेंडर से मिली छूट को 5 अक्टूबर तक बढ़ा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े चेक बाउंस मामलों का है। शिकायतकर्ता के अनुसार, वर्ष 2010 में एक फिल्म के लिए राजपाल यादव को करीब 5 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी गई थी। इसके भुगतान के लिए वर्ष 2013 में अभिनेता की ओर से 1.05 करोड़ रुपये के सात चेक जारी किए गए थे, लेकिन सभी चेक बाउंस हो गए।
शिकायत के मुताबिक, वर्ष 2012 में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता भी हुआ था, जिसमें राजपाल यादव, उनकी पत्नी और उनकी कंपनी ने ब्याज समेत करीब 11 करोड़ रुपये चुकाने की बात कही थी।
हाईकोर्ट ने सुनाई थी तीन महीने की सजा
इससे पहले 10 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट ने चेक बाउंस के मामलों में राजपाल यादव की तीन महीने की जेल की सजा बरकरार रखी थी। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि अभिनेता पहले किए गए भुगतान के वादों को पूरा करने में कई बार असफल रहे।
अब सुप्रीम कोर्ट ने भुगतान को लेकर उन्हें अंतिम अवसर दिया है। राजपाल यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया ने अदालत को बताया कि अभिनेता 2 करोड़ रुपये जमा करेंगे और भुगतान के लिए ठोस प्रस्ताव पेश करेंगे। वहीं, शिकायतकर्ता की ओर से कहा गया कि उनकी मुख्य चिंता बकाया राशि की वसूली को लेकर है।
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