पाकुड़: महेशपुर प्रखंड के नित्यानंदपुर गांव के बच्चों के लिए स्कूल जाना हर दिन आसान नहीं है। खासकर बारिश के मौसम में पढ़ाई की राह जोखिम भरी हो जाती है। गांव को स्कूल से जोड़ने के लिए न तो पक्की सड़क है और न ही पुल। ऐसे में बच्चे और शिक्षक उफनते चेकडैम को पार कर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं।
मानिकपुर पंचायत के अंतर्गत स्थित यह चेकडैम स्कूल तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता है। बारिश के दौरान जलस्तर बढ़ने और पानी का बहाव तेज होने से स्थिति और खतरनाक हो जाती है। छोटे बच्चों के लिए खतरा और बढ़ जाता है। कई बार शिक्षक बच्चों को अपने कंधों पर बैठाकर चेकडैम पार कराते हैं, ताकि वे सुरक्षित स्कूल पहुंच सकें।
शिक्षक हारुन मंडल के मुताबिक, “कई बार बच्चों को कंधे पर बैठाकर चेकडैम पार कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहता। पानी का बहाव अचानक बढ़ जाए तो कभी भी हादसा हो सकता है।” उन्होंने बताया कि बारिश के मौसम में यह समस्या सबसे गंभीर हो जाती है।
सड़क और पुल का प्रस्ताव भेजा गया, मंजूरी का इंतजार
महेशपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी सिद्धार्थ कुमार यादव ने बताया कि गांव के लिए सड़क और पुल, दोनों के प्रस्ताव जिला मुख्यालय को भेजे गए हैं। हालांकि, प्रखंड प्रशासन को अभी तक यह जानकारी नहीं मिली है कि इनमें से किसी प्रस्ताव को स्वीकृति मिली है या नहीं।
सिर्फ नित्यानंदपुर नहीं, दूसरे गांवों के बच्चे भी परेशान
यह समस्या केवल नित्यानंदपुर तक सीमित नहीं है। प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी गणेश कुमार भगत ने बताया कि सोनापुर समेत पागला नदी के दूसरी ओर बसे कई गांवों के बच्चों को भी स्कूल पहुंचने में इसी तरह की परेशानी होती है। अकेले सोनापुर के करीब 48 बच्चे इससे प्रभावित हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि स्थायी सड़क और सुरक्षित पुल की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। हर बार भारी बारिश के साथ ग्रामीणों की चिंता भी बढ़ जाती है कि तेज बहाव में कहीं कोई बच्चा या शिक्षक हादसे का शिकार न हो जाए।
अब ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से सड़क और पुल के प्रस्ताव पर जल्द कार्रवाई करने के साथ-साथ स्थायी समाधान होने तक सुरक्षित आवागमन की तत्काल व्यवस्था करने की मांग की है। उनके लिए सवाल सिर्फ सड़क और पुल का नहीं, बल्कि बारिश के बीच बच्चों की सुरक्षित शिक्षा और जिंदगी का भी है।
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