बोकारो। समाहरणालय सभागार में सोमवार को उपायुक्त अजय नाथ झा की अध्यक्षता में जिला परामर्शदात्री समिति (DCC) और जिला स्तरीय समीक्षा समिति (DLRC) की त्रैमासिक बैठक हुई। बैठक में जिले में बैंकिंग सेवाओं की स्थिति, ऋण वितरण और विभिन्न सरकारी वित्तीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
बैठक में कृषि ऋण, शिक्षा ऋण, स्वयं सहायता समूहों (SHG) को वित्तीय सहायता, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना (PMFME) और किसान क्रेडिट कार्ड सहित कई योजनाओं पर चर्चा हुई।
छोटे कारोबारियों तक पहुंचे बैंकिंग सुविधा
उपायुक्त अजय नाथ झा ने कहा कि छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और जरूरतमंद कारोबारियों के सामने अक्सर पूंजी और ऋण की समस्या रहती है। उन्होंने बैंकों से कहा कि वित्तीय सेवाओं को केवल बड़े कारोबारियों तक सीमित न रखते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाए।
उन्होंने कहा कि बैंकिंग व्यवस्था का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब छोटे व्यवसायी, किसान, स्वयं सहायता समूह और अन्य जरूरतमंद लोग भी आसानी से ऋण और दूसरी वित्तीय सुविधाओं का लाभ उठा सकें। इसके लिए बैंकों को समाज के बीच जाकर काम करने की जरूरत है।
बोकारो का CD रेशियो 60.28 प्रतिशत
बैठक में अग्रणी जिला प्रबंधक ने बताया कि जिले के क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) रेशियो में पिछली समीक्षा के मुकाबले सुधार हुआ है। फिलहाल बोकारो का CD रेशियो 60.28 प्रतिशत है और राज्य की रैंकिंग में जिला शीर्ष पांच में शामिल है।
उपायुक्त ने बैंकों को इसमें और सुधार लाने के लिए प्रयास जारी रखने का निर्देश दिया।
किसानों के लिए विशेष पहल
कृषि क्षेत्र में ऋण वितरण बढ़ाने पर भी बैठक में विशेष जोर दिया गया। उपायुक्त ने किसानों को अधिक से अधिक ऋण उपलब्ध कराने और फार्म क्रेडिट के प्रदर्शन में सुधार का निर्देश दिया।
उन्होंने कृषि विभाग, जेएसएलपीएस, एलडीएम और संबंधित बैंकों को मिलकर महीने के अंत तक विशेष कार्यशाला आयोजित करने को कहा, ताकि किसानों को ऋण योजनाओं और उपलब्ध वित्तीय सुविधाओं की जानकारी मिल सके।
विद्यार्थियों को शिक्षा ऋण दिलाने पर जोर
शिक्षा ऋण के मामलों में जिले का प्रदर्शन बेहतर करने के लिए पात्र विद्यार्थियों के बीच जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने बैंकों से निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने और योग्य छात्रों तक शिक्षा ऋण की सुविधा पहुंचाने को कहा।
इसके साथ ही कृषि अवसंरचना से जुड़ी परियोजनाओं के लिए ऋण वितरण बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
लंबित आवेदनों का समय पर निपटारा हो
उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार ने कहा कि वित्तीय समावेशन और स्वरोजगार को बढ़ावा देने में बैंकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने सरकारी योजनाओं के तहत पात्र लोगों को समय पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए बैंक और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई।
उन्होंने बैंक अधिकारियों को लंबित ऋण आवेदनों का समयबद्ध तरीके से निपटारा करने और प्रक्रिया को लाभुकों के लिए आसान बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि कृषि, शिक्षा, एमएसएमई और स्वरोजगार के लिए ऋण का प्रवाह बढ़ने से आर्थिक गतिविधियों के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
बैठक में PMEGP, PMFME, SHG, किसान क्रेडिट कार्ड और अन्य वित्तीय योजनाओं की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने प्राथमिक क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं की प्रगति की साप्ताहिक समीक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश एलडीएम को दिया।
बैठक में प्रशिक्षु आईएएस अरविंद राधाकृष्णन, एलडीएम प्रकाश चन्द्र मिश्रा, नाबार्ड डीडीएम सुरीना राजन, आरबीआई प्रतिनिधि एस. एस. तिर्की समेत विभिन्न बैंकों के अधिकारी और समन्वयक मौजूद रहे।
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